वहीं, बैठक के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का दिल्ली रवाना होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश का अगला सियासी रोडमैप अब केंद्रीय नेतृत्व की टेबल पर पहुंच चुका है और अंतिम मुहर वहीं से लगेगी।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास 5, कालीदास मार्ग पर हुई बीजेपी कोर कमेटी की बैठक के बाद संकेत मिल रहे हैं कि यूपी की सत्ता में जल्द नई एंट्री हो सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संगठन को ज्यादा धारदार बनाने के साथ-साथ सरकार में खाली चल रहे मंत्री पदों को भरने पर भी गंभीर चर्चा हुई। वहीं, बैठक के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का दिल्ली रवाना होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश का अगला सियासी रोडमैप अब केंद्रीय नेतृत्व की टेबल पर पहुंच चुका है और अंतिम मुहर वहीं से लगेगी।
उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनावी रण अभी दूर है, लेकिन बीजेपी ने मैदान सजाने की कवायद अभी से तेज कर दी है। जैसे-जैसे चुनावी कैलेंडर करीब आ रहा है, वैसे-वैसे पार्टी की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन दोनों एक ही रणनीतिक दिशा में चलें। कोर कमेटी की बैठक में इसी “एक लाइन एक संदेश” फॉर्मूले पर जोर रहने की चर्चा है, ताकि योगी सरकार का कामकाज और बीजेपी का राजनीतिक नैरेटिव दोनों में तालमेल साफ नजर आए।
लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस अहम बैठक में उत्तर प्रदेश की सत्ता और संगठन दोनों के शीर्ष चेहरे एक ही टेबल पर नजर आए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक मौजूद रहे, जबकि संघ के पदाधिकारी भी बैठक का हिस्सा बने।
सूत्रों के अनुसार, योगी सरकार में फिलहाल मंत्रियों की संख्या 54 बताई जा रही है, जबकि अधिकतम कोटा 60 तक माना जाता है। यानी करीब 6 पद खाली हैं। यही वजह है कि यूपी में “आधा दर्जन मंत्री बनाए जाने” की चर्चा फिर उभर आई है। पार्टी के रणनीतिकारों का फोकस यह भी बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकार का चेहरा अधिक “मैदान-तैयार” और प्रतिनिधित्व के लिहाज से संतुलित दिखे।
चर्चा है कि 14 जनवरी 2026 को खरमास खत्म होने के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। पार्टी के अंदरूनी गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि जनवरी के तीसरे हफ्ते के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना मजबूत हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर तारीख और नामों को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है।
यूपी पॉलिटिक्स में संभावित नामों को लेकर अटकलें भी चल रही हैं। इन्हीं चर्चाओं में भूपेंद्र चौधरी का नाम भी सामने लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे पहले सरकार में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और संगठन का अनुभव भी रखते हैं, ऐसे में उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसके अलावा अन्य नामों पर भी अंदरखाने मंथन की बात कही जा रही है, लेकिन अंतिम सूची दिल्ली स्तर पर ही तय होने की चर्चा है।
योगी कैबिनेट विस्तार को सिर्फ सीट भरने की कवायद नहीं माना जा रहा। इसके जरिए बीजेपी उत्तर प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने का दांव भी खेल सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक माहौल और विपक्ष की नई रणनीतियों के बीच बीजेपी की कोशिश यही बताई जा रही है कि संगठन और सरकार दोनों में प्रतिनिधित्व का संदेश स्पष्ट जाए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों का पूर्वांचल से जुड़ाव होने के चलते यह तर्क भी सामने आ रहा है कि पार्टी क्षेत्रीय संतुलन का संकेत देने के लिए सरकार में नए चेहरों को आगे बढ़ा सकती है। UP News