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महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। उत्तर प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के बाद अब जिम्मेदार निर्माण एजेंसी पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में निर्माणाधीन महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। उत्तर प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के बाद अब जिम्मेदार निर्माण एजेंसी पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने निर्माण कार्य संभाल रही कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। FIR की खबर सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में हलचल बढ़ गई। जहां पहले निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी थी, वहीं कार्रवाई की सूचना के बाद परियोजना स्थल पर अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय नजर आए तथा मजदूरों की संख्या भी बढ़ती दिखाई दी। UP News
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव वर्ष 2021 में स्वीकृत हुआ था। सरकार का लक्ष्य तीन वर्ष के भीतर विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा कर उसे संचालित करने का था। हालांकि तय समयसीमा बीतने के बावजूद परियोजना अधूरी है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं कई बार निर्माण स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। हर समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्माण की धीमी गति पर नाराजगी जताई और कार्यदायी संस्था को फटकार लगाई, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला। UP News
लोक निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी को कार्य में तेजी लाने के लिए तीन बार नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद काम की गति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। परियोजना में हो रही देरी के कारण विश्वविद्यालय की भावी शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी थीं। इसी के चलते निर्माण खंड (भवन) के सहायक अभियंता दिनेश कुमार शर्मा की तहरीर पर निर्माण एजेंसी मेसर्स विजय निर्माण कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीडब्ल्यूडी की शिकायत के मुताबिक विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य ईपीसी मोड के तहत 27 दिसंबर 2021 को हुए अनुबंध के आधार पर शुरू किया गया था। अनुबंध के अनुसार 3 जनवरी 2022 से काम शुरू होकर 10 नवंबर 2024 तक पूरा होना था। बाद में निर्माण एजेंसी द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना में 26 फरवरी 2026 तक परियोजना पूर्ण करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद 15 जून 2026 तक निर्माण कार्य अधूरा पाया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए जाने पर ठेकेदार पक्ष की ओर से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और धमकी तक दी गई। UP News
निर्माण एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्य चलता रहा। हालांकि इस पूरे विवाद पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जुबिन सिक्का से संपर्क करने पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जून के पहले सप्ताह में लखनऊ में आयोजित विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आयुष विश्वविद्यालय परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई थी। बैठक में निर्माण की गति बेहद धीमी पाए जाने पर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई थी। बताया जाता है कि समीक्षा के दौरान निर्माण एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए थे। UP News
आयुष विश्वविद्यालय परियोजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है। 15 फरवरी 2023 को उन्होंने विश्वविद्यालय की ओपीडी का उद्घाटन किया था। इसके बाद जून 2023 में निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई थी। वर्ष 2025 में भी मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा कर कार्यदायी संस्था को चेतावनी दी थी और समयबद्ध तरीके से निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए थे। UP News
हाल ही में आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने भी विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की स्थिति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों से ठेकेदार कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। UP News
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