बर्खास्त किए गए अधिकारियों में अमेठी के मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के हर्ष मवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त नीति और जीरो टॉलरेंस रुख के मजबूत संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।।

UP News : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग पर योगी सरकार ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने समाज कल्याण विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अमेठी और हरदोई में तैनात रहे इन दोनों तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारियों पर लगे आरोप जांच में गंभीर पाए गए, जिसके बाद शासन ने सख्त फैसला लेने में देर नहीं की। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में अमेठी के मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के हर्ष मवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त नीति और जीरो टॉलरेंस रुख के मजबूत संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से सामने आए मामले ने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। आरोप है कि तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने अपने ही कार्यालय में तैनात प्रधान लिपिक गोकुल प्रसाद जायसवाल के साथ पद का दबाव बनाकर अनुचित हरकत की। शिकायत के मुताबिक, 26 दिसंबर 2024 को मनोज कुमार शुक्ला ने प्रधान लिपिक को अपने चैंबर में बुलाया। वहां उन्होंने कथित रूप से लिपिक का मोबाइल अपने कब्जे में लिया और दबाव बनाकर डिजिटल भुगतान एप का गुप्त पिन जान लिया। इसके बाद लिपिक के बैंक खाते से 40 हजार रुपये अपनी पत्नी डॉ. अंजू शुक्ला के खाते में ट्रांसफर करा दिए गए। इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी, क्योंकि मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं था। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आए कि संबंधित अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति अपमानजनक रवैया रखते थे और दफ्तर में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने शुरुआती जांच कराई, जिसके बाद मनोज कुमार शुक्ला को 5 मार्च 2025 को निलंबित कर दिया गया था। जांच अधिकारी संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विसेन की रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ कर्मचारी से अवैध रूप से धनराशि ट्रांसफर कराई। हालांकि, मनोज कुमार शुक्ला ने अपने बचाव में यह दलील दी थी कि संबंधित कर्मचारी ने उनसे उधार लिया था और वही रकम वापस ली गई थी, लेकिन जांच में यह दावा टिक नहीं पाया। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए आगे की कठोर कार्रवाई की राह चुनी।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से जुड़ा दूसरा मामला वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार पर सरकारी धन के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, चठिया धनवार में भोजन, सामग्री आपूर्ति और अन्य मदों में नियमों के विपरीत भुगतान किए गए। आरोप है कि हर्ष मवार ने कुछ चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से खरीद और भुगतान प्रक्रिया को प्रभावित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि बिना सक्षम स्वीकृति के बड़े भुगतान किए गए। इतना ही नहीं, कई भुगतानों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस तरह पेश किया गया, ताकि नियमित टेंडर प्रक्रिया से बचा जा सके। उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर यह एक गंभीर सवाल माना गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ संस्थाओं को भुगतान हुआ, जबकि उनके द्वारा वास्तविक सेवा या आपूर्ति का प्रमाण नहीं मिला।
दोनों मामलों की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई। इसके बाद नियमानुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), प्रयागराज से परामर्श लिया गया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता का परीक्षण करने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर सहमति दी। जानकारी के मुताबिक, हर्ष मवार की बर्खास्तगी पर आयोग ने 16 फरवरी को और मनोज कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी पर 26 फरवरी को अपनी अंतिम सहमति दे दी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया।
समाज कल्याण विभाग के इन दो मामलों में की गई कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अमेठी में अधीनस्थ कर्मचारी के साथ कथित जबरन धन हस्तांतरण का मामला हो या हरदोई में वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का प्रकरण, दोनों ही मामलों में शासन ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से अन्य विभागों में भी स्पष्ट संदेश गया है कि अगर कोई अधिकारी अधिकारों का गलत इस्तेमाल करता है, अधीनस्थ कर्मचारियों का शोषण करता है या सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। UP News