मेरठ में तेल-गैस संकट से उद्योग प्रभावित, उत्पादन घटा, 50 यूनिट बंद
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।

UP News : मेरठ के उद्योगों पर तेल और गैस की कमी का गंभीर असर पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।
उद्योगों पर असर
* प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में प्लास्टिक, रबर, फाइबर ग्लास, पेंट, कॉटन फाइबर, वेल्डिंग, मेटल और पेट्रोकेमिकल शामिल हैं।
* उत्पादन घटने के कारण एमएसएमई सेक्टर, निर्यातक कंपनियों और मशीनरी उद्योग भी संकट में हैं।
* प्लास्टिक और रबर जैसी कच्ची सामग्री की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित है।
*कच्चे माल और उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। जिनमें प्लास्टिक दाना, रबर, रबर प्रोसेसिंग आयल, अन्य पेट्रोलियम पदार्थ, कामर्शियल गैस सिलेंडर शामिल है।
* ट्रांसफार्मर निर्माण सामग्री के दाम दोगुने हो गए हैं।
* जेम्स ज्वैलरी में चांदी और सोने की कीमतों में भी तेजी आई है।
गैस सिलिंडर की कमी
* इंडस्ट्रियल गैस सिलिंडर का ब्लैक मार्केट रेट 1,800-2,000 रुपये तक पहुँच गया।
* घरेलू एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध हैं, लेकिन रिफिल अब केवल 25 दिन बाद बुक किया जा सकता है।
* होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसायों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
निर्यात पर असर
* समुद्री मार्ग बदलने से यूरोप तक माल पहुँचाने की लागत बढ़कर $1,400-$7,000 हो गई है।
* समय पर डिलीवरी में देरी और अतिरिक्त लागत की आशंका बनी हुई है।
* शहर में 55,000 घरेलू कनेक्शन हैं, जिन पर आपूर्ति बनी हुई है।
* उद्योगों की आपूर्ति में केवल 20% कटौती संभव है, घरेलू उपयोग पर असर नहीं पड़ेगा।
यह संकट मुख्य रूप से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान के कारण उत्पन्न हुआ है। इसके चलते मेरठ के उद्योगों को उत्पादन घटाने, लागत बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
UP News : मेरठ के उद्योगों पर तेल और गैस की कमी का गंभीर असर पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।
उद्योगों पर असर
* प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में प्लास्टिक, रबर, फाइबर ग्लास, पेंट, कॉटन फाइबर, वेल्डिंग, मेटल और पेट्रोकेमिकल शामिल हैं।
* उत्पादन घटने के कारण एमएसएमई सेक्टर, निर्यातक कंपनियों और मशीनरी उद्योग भी संकट में हैं।
* प्लास्टिक और रबर जैसी कच्ची सामग्री की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित है।
*कच्चे माल और उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। जिनमें प्लास्टिक दाना, रबर, रबर प्रोसेसिंग आयल, अन्य पेट्रोलियम पदार्थ, कामर्शियल गैस सिलेंडर शामिल है।
* ट्रांसफार्मर निर्माण सामग्री के दाम दोगुने हो गए हैं।
* जेम्स ज्वैलरी में चांदी और सोने की कीमतों में भी तेजी आई है।
गैस सिलिंडर की कमी
* इंडस्ट्रियल गैस सिलिंडर का ब्लैक मार्केट रेट 1,800-2,000 रुपये तक पहुँच गया।
* घरेलू एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध हैं, लेकिन रिफिल अब केवल 25 दिन बाद बुक किया जा सकता है।
* होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसायों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
निर्यात पर असर
* समुद्री मार्ग बदलने से यूरोप तक माल पहुँचाने की लागत बढ़कर $1,400-$7,000 हो गई है।
* समय पर डिलीवरी में देरी और अतिरिक्त लागत की आशंका बनी हुई है।
* शहर में 55,000 घरेलू कनेक्शन हैं, जिन पर आपूर्ति बनी हुई है।
* उद्योगों की आपूर्ति में केवल 20% कटौती संभव है, घरेलू उपयोग पर असर नहीं पड़ेगा।
यह संकट मुख्य रूप से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान के कारण उत्पन्न हुआ है। इसके चलते मेरठ के उद्योगों को उत्पादन घटाने, लागत बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।












