उत्तर प्रदेश सरकार के सभी विभाग और कार्यालय, नगर निकाय व अन्य स्थानीय संस्थाएं, सरकारी निगम/बोर्ड/प्राधिकरण, साथ ही सरकारी उपक्रम (PSUs) और उनसे जुड़ी तमाम संबद्ध संस्थाएं भी। यानी संदेश बिल्कुल साफ है: उत्तर प्रदेश में अब किसी भी सरकारी मंच पर ‘हड़ताल’ के जरिए काम ठप करने की गुंजाइश नहीं रहेगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में सरकारी मशीनरी की रफ्तार एक पल को भी धीमी न पड़े इसी लाइन पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने तक कर्मचारियों की किसी भी तरह की हड़ताल पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया गया है। जरूरी सेवाओं को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकार ने ESMA (Essential Services Maintenance Act) लागू कर दिया है, जिसकी औपचारिक अधिसूचना नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने सभी विभागों को जारी कर दी है। नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार के हर विभाग, कार्यालय, स्थानीय निकाय, निगम, बोर्ड, प्राधिकरण और सरकारी उपक्रम पर समान रूप से लागू होगा। मतलब साफ है उत्तर प्रदेश में अब कोई भी सरकारी इकाई, चाहे वह सेवा-प्रदाय से जुड़ी हो या प्रशासनिक व्यवस्था से, हड़ताल के जरिए काम रोकने की छूट नहीं पाएगी; सरकार ने संदेश दे दिया है कि जनता की सुविधाएं पहले, ठप व्यवस्था अब नहीं।
सरकारी आदेश में ESMA का दायरा बेहद व्यापक रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश में कहीं भी कामकाज की रफ्तार पर ब्रेक न लगे। प्रतिबंध सिर्फ किसी एक विभाग तक सीमित नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की पूरी व्यवस्था इसकी जद में आएगी। उत्तर प्रदेश सरकार के सभी विभाग और कार्यालय, नगर निकाय व अन्य स्थानीय संस्थाएं, सरकारी निगम/बोर्ड/प्राधिकरण, साथ ही सरकारी उपक्रम (PSUs) और उनसे जुड़ी तमाम संबद्ध संस्थाएं भी। यानी संदेश बिल्कुल साफ है: उत्तर प्रदेश में अब किसी भी सरकारी मंच पर ‘हड़ताल’ के जरिए काम ठप करने की गुंजाइश नहीं रहेगी।
सूत्रों की मानें तो बिजली विभाग और शिक्षक संगठनों की ओर से अपनी मांगों को लेकर बड़े आंदोलन/हड़ताल की चेतावनी के संकेत मिलने लगे थे। उत्तर प्रदेश सरकार को आशंका थी कि अगर यह चिंगारी भड़कती, तो उत्तर प्रदेश में बिजली सप्लाई, शिक्षा व्यवस्था और दूसरी जरूरी सेवाओं की धड़कन तक लड़खड़ा सकती है। यही वजह है कि योगी सरकार ने पहले से ही सिस्टम को “बैकफुट” पर जाने से रोकते हुए ESMA का सहारा लिया। सरकार का तर्क है कि आने वाले महीनों में त्योहारों के दौरान व्यवस्थाएं पटरी पर रखना, विधानसभा सत्र के बीच प्रशासनिक कामकाज बिना रुकावट चलाना और विकास परियोजनाओं की रफ्तार कायम रखना इन तीनों मोर्चों पर किसी भी तरह की ठप व्यवस्था यूपी के लिए भारी पड़ सकती थी; इसलिए यह फैसला एहतियात नहीं, “ऑपरेशन कंटिन्यूटी” की रणनीति है।
ESMA लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में हड़ताल अब सिर्फ “विरोध” नहीं, कानूनी तौर पर अपराध मानी जाएगी। सरकारी आदेश में साफ चेतावनी है कि कोई कर्मचारी या संगठन यदि खुद हड़ताल करता है या फिर हड़ताल के लिए दूसरों को उकसाता/प्रेरित करता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कानूनी शिकंजा भी कस दिया जाएगा। कानून के प्रावधानों के मुताबिक दोष सिद्ध होने पर 6 महीने तक की सजा, जुर्माना, या फिर दोनों की सख्त सजा का प्रावधान है। यानी सरकार ने संदेश बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है उत्तर प्रदेश में जरूरी सेवाओं को ठप करने की कीमत अब भारी पड़ेगी। UP News