उत्तर प्रदेश में सोमवार का दिन लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत, उम्मीद और सरकारी भरोसे का संदेश लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राजधानी लखनऊ से एक साथ कई अहम योजनाओं को गति देने जा रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में सोमवार का दिन लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत, उम्मीद और सरकारी भरोसे का संदेश लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राजधानी लखनऊ से एक साथ कई अहम योजनाओं को गति देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, बाल विकास और रोजगार से जुड़ी कई अहम योजनाओं को नई रफ्तार देंगे। एक ओर उत्तर प्रदेश के करीब 28 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की बड़ी धनराशि भेजी जाएगी, तो दूसरी ओर आंगनबाड़ी सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्टफोन, ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस और नई आधारभूत परियोजनाओं की शुरुआत भी होगी।
राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि हस्तांतरित करेंगे। इस मद में करीब 3350 करोड़ रुपये सीधे डीबीटी के जरिए छात्रों तक पहुंचेंगे। यह मदद कक्षा 9-10 और उससे ऊपर की कक्षाओं में पढ़ रहे उन विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिनकी पढ़ाई आर्थिक कारणों से प्रभावित हो सकती थी। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह शिक्षा को केवल योजना तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि आर्थिक सहयोग के जरिए उसे जमीन पर मजबूत करना चाहती है। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके लिए फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्च बड़ी चुनौती बन जाते हैं। ऐसे में यह आर्थिक सहायता उनके लिए सीधा सहारा साबित होगी।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस योजना का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को मिलेगा। अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के खातों में अलग-अलग श्रेणियों के तहत धनराशि पहुंचाई जाएगी। सबसे अधिक लाभार्थी अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, जबकि अनुसूचित जाति, सामान्य और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को भी बड़ी संख्या में इस योजना का लाभ मिलेगा। यह वितरण बताता है कि उत्तर प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति व्यवस्था को सामाजिक समावेशन के नजरिये से भी देख रही है, ताकि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रह जाए।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में कुल 65,05,151 लाभार्थियों के खातों में 4735.04 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति योजनाओं को और अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने के लिए पूरी व्यवस्था को ऑटोमेशन से जोड़ा जा रहा है। साथ ही आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है। इस पहल का सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को आवेदन से लेकर भुगतान तक कम भागदौड़ करनी पड़ेगी। तकनीक के इस्तेमाल से गड़बड़ियों की आशंका भी घटेगी और लाभार्थियों तक मदद समय पर पहुंच सकेगी।
सोमवार की सुबह लखनऊ के लोकभवन सभागार में होने वाले कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की शुरुआत भी करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतीकात्मक रूप से 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन वितरित करेंगे। इसके साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में 69,794 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में बाल विकास सेवाओं के कामकाज को आधुनिक बनाने की कोशिश है। स्मार्टफोन मिलने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डेटा संग्रहण, बच्चों और महिलाओं से जुड़ी जानकारी का रिकॉर्ड, योजनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग का काम पहले से अधिक आसान और व्यवस्थित हो सकेगा। आंगनबाड़ी नेटवर्क उत्तर प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक बाल देखभाल की बेहद अहम कड़ी है। ऐसे में जब इस व्यवस्था को डिजिटल साधनों से जोड़ा जाएगा, तो जमीनी स्तर पर काम की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं की मॉनिटरिंग मजबूत होगी और लाभार्थियों तक सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी।
मुख्यमंत्री आज आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के नए डिजाइन का विमोचन भी करेंगे। बताया गया है कि एक भवन के निर्माण पर लगभग 30.32 लाख रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नए निर्माण कार्यों का शिलान्यास और कई परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया जाएगा। योजना के तहत 13 जिलों में 633 आंगनबाड़ी केंद्रों, 28 districts में 71 बाल विकास परियोजना कार्यालयों और 27 जिलों में 69 अन्य केंद्रों के निर्माण कार्यों की शुरुआत होगी। इन परियोजनाओं पर कुल 1,37,04.29 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं 70 जिलों में 2,468 आंगनबाड़ी केंद्रों और 29 जिलों में 69 बाल विकास परियोजना कार्यालयों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिनकी कुल लागत 3,13,26.31 लाख रुपये बताई गई है।
उत्तर प्रदेश में इन निर्माण परियोजनाओं का असर केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और बाल विकास सेवाओं के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार होगा। सरकार इस पूरी कवायद को सामाजिक विकास और रोजगार सृजन, दोनों से जोड़कर देख रही है। दरअसल, जब प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों और परियोजना कार्यालयों का नेटवर्क मजबूत होगा, तो इसका लाभ सीधे बच्चों, महिलाओं और ग्रामीण-शहरी समुदायों तक पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश के लिए यह बुनियादी निवेश भविष्य की सामाजिक मजबूती का आधार बन सकता है।
लोकभवन में होने वाले कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस भी वितरित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतीकात्मक रूप से ये उपकरण सौंपेंगे। इनमें स्टैडियोमीटर, इन्फैंटोमीटर और मदर एंड चाइल्ड वेटिंग स्केल शामिल हैं। उत्तर प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर इन उपकरणों का वितरण किया जाएगा। इन साधनों की मदद से बच्चों की लंबाई, वजन और शारीरिक विकास की निगरानी अधिक सटीक ढंग से की जा सकेगी। इससे कुपोषण की पहचान और पोषण संबंधी हस्तक्षेप भी पहले से अधिक प्रभावी हो पाएंगे।
सोमवार के कार्यक्रम में मिशन रोजगार को भी आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री 10 नवचयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र देंगे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 46 जिलों में 739 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा 42 जिलों में 15,203 सहायिकाओं को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इस कदम को उत्तर प्रदेश में महिला रोजगार और स्थानीय स्तर पर सेवा तंत्र के विस्तार, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि आंगनबाड़ी सेवाओं की पहुंच और कार्यक्षमता भी मजबूत होगी।