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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण गरीबों और वंचित समुदायों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दायरे का विस्तार करते हुए उन जनजातीय परिवारों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है, जो अब तक इस योजना के लाभ से बाहर थे।

UP News : उत्तर प्रदेश में ग्रामीण गरीबों और वंचित समुदायों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दायरे का विस्तार करते हुए उन जनजातीय परिवारों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है, जो अब तक इस योजना के लाभ से बाहर थे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, अब प्रदेश की शेष अनुसूचित जनजातियों को भी योजना की पात्रता सूची में जोड़ा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश में कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रह जाए। UP News
सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद उत्तर प्रदेश के उन परिवारों को सम्मानजनक जीवन देना भी है, जो वर्षों से कच्चे मकानों, झोपड़ियों में रहने को मजबूर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भोटिया, जौनसारी और राजी जैसी जनजातियों को अब इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे इन समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने उत्तर प्रदेश के पिछड़े और जनजातीय समाज को केवल राजनीतिक लाभ के नजरिए से देखा, लेकिन मौजूदा सरकार उन्हें बुनियादी सुविधाएं देकर वास्तविक सशक्तिकरण का काम कर रही है। UP News
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 में की गई थी। शुरुआती दौर में इस योजना का लाभ मुख्य रूप से वनटांगिया और मुसहर जैसी अत्यंत वंचित जातियों को दिया गया। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए कोल, थारू, सहरिया, नट, चेरो, बैगा, बोक्सा, बंजारा और सपेरा समेत कई अन्य समुदायों को भी इसमें शामिल किया। अब योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए शेष जनजातीय समूहों को भी योजना में जोड़ने का फैसला किया है। इससे उत्तर प्रदेश के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। UP News
नए निर्णय के बाद उत्तर प्रदेश में जिन जातियों के पात्र परिवार इस योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे, उनमें भोटिया, जौनसारी, राजी और गोंड शामिल हैं। इसके अलावा गोंड की पर्याय जातियां जैसे धुरिया, ओझा, नायक, पठारी और राजगोंड को भी योजना के दायरे में लाया गया है। इसी तरह खरवार, खैरवार, परहिया, पंखा, पनिका, अगरिया, पटारी, भुइयां और भुनिया समुदायों के पात्र परिवार भी अब लाभ पाने के हकदार होंगे। UP News
सरकार का मानना है कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान मिलेगा। पक्का घर मिलने से न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और परिवारों की सामाजिक स्थिति पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश में चिन्हित जातियों के पात्र परिवारों का सर्वे तेजी से कराया जाए और उन्हें जल्द से जल्द योजना से जोड़ा जाए। माना जा रहा है कि यह फैसला उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास को नई गति देने के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के बीच सरकार की पहुंच को भी मजबूत करेगा। UP News
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