उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफरा-तफरी, लखनऊ में आधा दर्जन पंप बंद, उमड़ी भीड़

प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक घबराहट का माहौल बन गया है। गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, गोंडा, देवरिया और श्रावस्ती समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

petrol pump
पेट्रोल-डीजल अफरा-तफरी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Mar 2026 05:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक घबराहट का माहौल बन गया है। गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, गोंडा, देवरिया और श्रावस्ती समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हालांकि प्रशासन बार-बार यह स्पष्ट कर रहा है कि ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है, फिर भी लोग एहतियात के तौर पर अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आधा दर्जन पेट्रौल पंप बद हो गए हैं।

गोरखपुर में हालात बिगड़े, डीएम को खुद मैदान में उतरना पड़ा

गोरखपुर में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण नजर आई, जहां अफवाह फैलते ही पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जुट गई। जैसे ही यह खबर फैली कि ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, लोग तुरंत पंपों की ओर दौड़ पड़े। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने सड़क पर उतरकर हालात का जायजा लिया और यह भरोसा दिलाया कि जिले में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है।

प्रयागराज, लखनऊ और देवरिया में भी दिखा पैनिक का असर

प्रयागराज और लखनऊ में भी देर रात से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने लगी। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए लंबी लाइनों में खड़े नजर आए। देवरिया में भी सुबह होते ही पेट्रोल खत्म होने की चर्चा फैल गई, जिसके बाद पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने तत्काल सफाई दी कि यह सिर्फ अफवाह है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

गोंडा में पुलिस को करनी पड़ी सख्ती

गोंडा में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ पेट्रोल पंप बंद मिलने के बाद लोगों में भ्रम फैल गया और बाकी पंपों पर भारी भीड़ जुट गई। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया और लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की गई। प्रशासन ने साफ कहा कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है।

श्रावस्ती में ड्रम-जरीकेन पर रोक, काला बाजारी पर सख्ती

श्रावस्ती में भी अफवाहों के चलते लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदने लगे। कई लोग ड्रम, जरीकेन और बोतलों में ईंधन भरवाने पहुंचे, जिससे हालात और बिगड़ गए। इस पर प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए ऐसे बर्तनों में पेट्रोल भरने पर रोक लगा दी। साथ ही पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए गए कि नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।

अफवाहों से बढ़ी समस्या, प्रशासन लगातार कर रहा अपील

प्रशासन का कहना है कि ईंधन की सप्लाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं है और सभी जिलों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बावजूद इसके, अफवाहों के कारण लोगों में घबराहट फैल रही है, जिससे अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर पर विश्वास न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल भरवाएं।

स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सतर्कता जरूरी

हालांकि प्रशासन की सक्रियता से कई जगह हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी कई जिलों में भीड़ देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अफवाहों पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो ऐसी स्थिति दोबारा भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग संयम बरतें और प्रशासन के निदेर्शों का पालन करें।


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गाजीपुर के कुंवारों ने सरकार से कर दी ऐसी मांग, हर कोई हैरान

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से जुड़ा यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन करने वाले 1784 जोड़े अपनी शादी की तारीख तय होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

शादी का लंबा इंतजार
शादी का लंबा इंतजार
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Mar 2026 12:36 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से बड़ा ही अजीब मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से जुड़ा यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।  दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन करने वाले 1784 जोड़े अपनी शादी की तारीख तय होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। महीनों पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन परिवारों को उम्मीद थी कि जल्द ही शुभ दिन तय होगा और उनके घरों में भी शहनाई बजेगी, लेकिन अब तक कोई अंतिम कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सका है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी योजना से उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों परिवार असमंजस, बेचैनी और इंतजार के दौर से गुजर रहे हैं। गाजीपुर के इन युवक-युवतियों ने योजना के भरोसे विवाह के लिए आवेदन किया था, मगर समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें अधर में लटकती नजर आ रही हैं। अब सभी की निगाहें अगले सरकारी फैसले पर टिकी हैं।

गरीब परिवारों के लिए राहत बनी उत्तर प्रदेश की यह योजना

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत पहले एक जोड़े के विवाह पर सरकार की ओर से 51 हजार रुपये की सहायता दी जाती थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया। सहायता राशि बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस योजना के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि गाजीपुर में भी इस योजना के लिए आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। कई परिवार इसे बेटी के विवाह और सामाजिक सम्मान से जुड़ी बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि इसमें जाति और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। हिंदू जोड़ों का विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जाता है, जबकि मुस्लिम जोड़ों का निकाह काजी की मौजूदगी में कराया जाता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना सामाजिक समरसता की मिसाल भी मानी जाती है।

गाजीपुर में 2017 से चल रही योजना

गाजीपुर जिले में यह योजना वर्ष 2017 से लागू है। तब से अब तक 7967 जोड़ों का विवाह इस योजना के तहत कराया जा चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर पर इसका असर भी दिखाई दिया है। अगर बीते वित्तीय वर्ष की बात करें तो शासन की ओर से गाजीपुर के लिए 799 शादियों का लक्ष्य तय किया गया था। समाज कल्याण विभाग ने इसके मुकाबले 796 शादियां संपन्न कराईं। यानी लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए। यही लंबित आवेदन अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

ऑनलाइन आवेदन के बाद भी तय नहीं हो सकी शादी की तारीख

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किए जाते हैं। गाजीपुर में इस समय पोर्टल पर 1784 ऐसे जोड़े दर्ज हैं, जिन्होंने आवेदन तो कर दिया है, लेकिन अब तक उनकी शादी की तारीख तय नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के भरोसे शादी की तैयारी कर रहे थे। मार्च में वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण इस वर्ष का तय लक्ष्य पूरा माना जा चुका है। ऐसे में नए या लंबित आवेदनों पर फिलहाल आगे की कार्रवाई रुक गई है। नतीजतन, अब इन सभी जोड़ों को अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार करना पड़ रहा है।

क्या बोले अधिकारी?

जिला समाज कल्याण अधिकारी राम नगीना यादव ने कहा है कि पोर्टल पर लंबित आवेदनों को अगले वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, जैसे ही उत्तर प्रदेश शासन की ओर से नया बजट जारी होगा और विवाह कार्यक्रमों की नई तिथियां तय होंगी, वैसे ही सभी लंबित जोड़ों का विवाह उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। UP News

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उत्तर प्रदेश सरकार ने रिंकू सिंह को दिया बड़ा सम्मान, मिली नई जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के उभरते क्रिकेट सितारे रिंकू सिंह को अब खेल के मैदान के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी भी मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने रिंकू सिंह को क्षेत्रीय खेल अधिकारी (रीजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर) के पद पर तैनात करने का फैसला किया है।

रिंकू सिंह को सरकारी सम्मान
रिंकू सिंह को सरकारी सम्मान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Mar 2026 12:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के उभरते क्रिकेट सितारे रिंकू सिंह को अब खेल के मैदान के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी भी मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने रिंकू सिंह को क्षेत्रीय खेल अधिकारी (रीजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर) के पद पर तैनात करने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में रिंकू सिंह को नियुक्ति पत्र दिया जाना था, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हो सके। इसके पीछे वजह उनकी क्रिकेट प्रतिबद्धताएं रहीं। रिंकू सिंह ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि वह इस समय आईपीएल 2026 की तैयारियों में व्यस्त हैं और कोलकाता नाइट राइडर्स के ट्रेनिंग कैंप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर नियुक्ति पत्र प्राप्त करेंगे।

आईपीएल से पहले रिंकू सिंह को मिली दोहरी सौगात

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से निकलकर राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में खास पहचान बनाने वाले रिंकू सिंह के लिए यह समय बेहद अहम साबित हो रहा है। एक तरफ उन्हें आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स की उपकप्तानी सौंपी गई है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें खेल प्रशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण पद देकर सम्मानित किया है। इस तरह रिंकू सिंह को आईपीएल सीजन शुरू होने से पहले दो बड़ी खुशखबरियां मिली हैं। यह उपलब्धि उनके बढ़ते कद और खेल जगत में उनकी मजबूत साख को भी दर्शाती है। बता दें कि रिंकू सिंह को उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय खेल अधिकारी (Regional Sports Officer) के पद पर तैनात किया गया है। यह पद राज्य सरकार की व्यवस्था में द्वितीय श्रेणी के गजेटेड अधिकारी के स्तर का माना जाता है। सामान्य रूप से इस स्तर के पदों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनके माध्यम से खेल गतिविधियों की निगरानी, समन्वय और प्रोत्साहन का काम आगे बढ़ाया जाता है। रिंकू सिंह की नियुक्ति को केवल एक सम्मानजनक पदस्थापना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में खिलाड़ियों को सरकारी सेवा से जोड़ने की नीति का मजबूत संकेत भी माना जा रहा है।

क्या होंगी रिंकू सिंह की जिम्मेदारियां

क्षेत्रीय खेल अधिकारी के रूप में रिंकू सिंह की भूमिका बहुआयामी हो सकती है। उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे लाने, स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दिलाने, स्टेडियमों और खेल परिसरों की व्यवस्था पर नजर रखने तथा नई खेल योजनाओं को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका अहम मानी जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेल ढांचे को मजबूत करने पर तेजी से काम किया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़े खेल परिसर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण चर्चा में रहा है, गोरखपुर में खेल ढांचे को विस्तारित करने की कोशिशें जारी हैं और गाजियाबाद समेत कई शहरों में भी खेल अवसंरचना को मजबूत करने की योजना पर काम हो रहा है। ऐसे में रिंकू सिंह जैसे लोकप्रिय और सक्रिय खिलाड़ी की मौजूदगी उत्तर प्रदेश के खेल तंत्र को नई ऊर्जा दे सकती है। यह उम्मीद की जा रही है कि वह जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों से बेहतर संवाद स्थापित कर सकेंगे और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में उपयोगी भूमिका निभाएंगे।

कितनी हो सकती है सैलरी

क्षेत्रीय खेल अधिकारी का पद गजेटेड श्रेणी का होने के कारण इससे जुड़ा वेतनमान भी आकर्षक माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस श्रेणी के अधिकारी को करीब 70 हजार रुपये से 80 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है। इसके अलावा अन्य भत्ते और सरकारी सुविधाएं भी नियमानुसार मिल सकती हैं। हालांकि अंतिम वेतनमान सरकार के सेवा नियमों और पद के स्तर के अनुसार तय होगा, लेकिन इतना साफ है कि यह पद सम्मान और जिम्मेदारी दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अलीगढ़ से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आने वाले रिंकू सिंह ने अपने संघर्ष, अनुशासन और प्रतिभा के दम पर भारतीय क्रिकेट में खास मुकाम बनाया है। आईपीएल ने उन्हें बड़ा मंच दिया, लेकिन उनकी असली पहचान उस समय बनी जब उन्होंने 2023 सीजन में गुजरात टाइटंस के खिलाफ लगातार पांच छक्के लगाकर कोलकाता नाइट राइडर्स को रोमांचक जीत दिलाई। उस एक पारी ने रिंकू सिंह को घर-घर में पहचान दिला दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी दमदार बल्लेबाजी और चुस्त फील्डिंग के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई और कई बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया। रिंकू सिंह उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सफलता में योगदान दिया और उत्तर प्रदेश का नाम भी रोशन किया। UP News

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