इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 5 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार का मकसद केवल ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों, सेवाक्षेत्र और स्वरोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है।

UP News : उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम अपडेट सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह अहम अपडेट उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 के तहत ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर बड़ा दांव खेलते हुए 3349 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 5 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार का मकसद केवल ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों, सेवाक्षेत्र और स्वरोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश के सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों, महिलाओं और वंचित तबकों को इस योजना के केंद्र में रखकर समावेशी विकास की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल के मुताबिक, DDU-GKY 2.0 के तहत इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग के बजट में करीब 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, ताकि राज्य में कौशल विकास कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में रोजगार की चुनौती का समाधान केवल पारंपरिक नौकरियों से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन तैयार करके ही संभव है। यही वजह है कि अब स्किल ट्रेनिंग को सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में DDU-GKY 1.0 के तहत पहले 2.63 लाख ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था। इनमें से करीब 2 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। इस प्रदर्शन को आधार बनाकर अब राज्य सरकार ने DDU-GKY 2.0 में लक्ष्य को लगभग दोगुना कर दिया है। सरकार को उम्मीद है कि बढ़े हुए बजट और बेहतर योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को बाजार की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी कम करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना को सिर्फ सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है। DDU-GKY 2.0 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवारों के युवा और महिलाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है। इन वर्गों तक योजना का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश के ऐसे परिवार, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं, उनके युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्थायी आय का रास्ता दिया जाए। महिला सशक्तिकरण के नजरिए से भी यह पहल अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी प्रशिक्षण और रोजगार के दायरे में आएंगी।
राज्य सरकार इससे पहले दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष अभियान चला चुकी है। ऐसे अभियानों के तहत विशेष रोजगार मेलों का आयोजन किया गया था, जिनके जरिए दो चरणों में करीब 2000 दिव्यांगों को रोजगार से जोड़ा गया। अब सरकार इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए अन्य वंचित वर्गों पर भी फोकस बढ़ाना चाहती है। उत्तर प्रदेश में यह कोशिश बताती है कि सरकार केवल आंकड़ों का लक्ष्य नहीं बना रही, बल्कि उन वर्गों तक भी पहुंचने की रणनीति बना रही है, जो अक्सर मुख्यधारा के रोजगार ढांचे से बाहर रह जाते हैं। DDU-GKY 2.0 को लेकर पहले आयोजित एक कार्यशाला में भी उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए थे। सात राज्यों की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन के दौरान मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने कहा था कि उत्तर प्रदेश केंद्र सरकार से 4.50 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य मांग रहा है। यह बयान इस बात का संकेत था कि राज्य सरकार पहले से ही बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट विस्तार की तैयारी कर रही थी। अब बजट मंजूरी के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश आने वाले समय में कौशल विकास को रोजगार नीति के केंद्र में रखने जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ नौकरी दिलाने पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार जिलों के बाद अब ब्लॉक स्तर पर रोजगार मेले आयोजित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि गांव और कस्बों के युवाओं को शहरों तक भटकना न पड़े और उन्हें स्थानीय स्तर पर भी अवसर मिल सकें। यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के बाद नौकरी पाने की राह आसान हो सकती है। इससे एक ओर उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर युवाओं में कौशल आधारित रोजगार की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।
वर्ष 2026-27 के बजट में कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता देकर उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में विकास का मॉडल सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर या निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार अब मानव संसाधन को भी विकास की केंद्रीय ताकत के रूप में देख रही है। बजट प्रावधानों में खास तौर पर ग्रामीण युवाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग और वंचित समुदायों पर फोकस रखा गया है। यह बताता है कि उत्तर प्रदेश समावेशी विकास के उस मॉडल पर आगे बढ़ना चाहता है, जिसमें रोजगार, कौशल और सामाजिक न्याय तीनों को साथ लेकर चला जाए।
देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में युवाओं की आबादी बहुत बड़ी है। ऐसे में कौशल विकास पर यह बड़ा निवेश सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करने वाला कदम भी माना जा रहा है। अगर DDU-GKY 2.0 अपने लक्ष्यों के अनुरूप लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में न सिर्फ रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे उद्योगों, सेवा क्षेत्र और स्थानीय रोजगार बाजार को प्रशिक्षित युवाओं का मजबूत आधार मिल सकता है। UP News