नई जमीन पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद प्रेस की उत्पादन और वितरण व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी। अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में तैयार होने वाला यह नया परिसर गीता प्रेस की वर्तमान क्षमता को कई गुना तक बढ़ा देगा, जिससे देश–दुनिया के अधिक पाठकों तक पुस्तकें पहुंचाई जा सकेंगी।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर स्थित विश्वप्रसिद्ध गीता प्रेस के विस्तार का रास्ता साफ कर दिया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गीता प्रेस को गोरखपुर के गीडा (GIDA) सेक्टर–27 में 10 एकड़ जमीन आवंटित कर दी है। इस नई जमीन पर करीब 81 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है, जिसके जरिये उत्तर प्रदेश में लगभग 300 नए रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले GIDA क्षेत्र के स्थापना दिवस पर गीता प्रेस को जमीन आवंटन का औपचारिक ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर की गई इस कार्रवाई को गोरखपुर के साथ–साथ पूरे उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जगत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। गीता प्रेस प्रशासन ने बताया कि सरकार से जमीन मिलने के बाद नए परिसर के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। उत्तर प्रदेश में चल रही Ease of Doing Business और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप इस परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
गोरखपुर के साहबगंज मंडी में स्थित गीता प्रेस अभी तक सीमित जगह में ही बड़े स्तर पर प्रकाशन कार्य कर रहा था। हर साल करोड़ों प्रतियों में धार्मिक ग्रंथ और पुस्तकें छापने के बावजूद परिसर की जगह कम पड़ रही थी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाना चुनौती बन गया था। लंबे समय से गीता प्रेस प्रबंधन उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त भूमि की मांग कर रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मामले को संज्ञान में लेने के बाद यह मांग पूरी हो सकी। इससे न सिर्फ गोरखपुर, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश से जुड़े लाखों पाठकों और श्रद्धालुओं की लंबे समय से लंबित अपेक्षा पूरी हुई है।
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी के अनुसार, GIDA में मिली 10 एकड़ अतिरिक्त भूमि से उत्तर प्रदेश में किताबों के उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकेगी। नए परिसर में आधुनिक मशीनों, गोदाम, लॉजिस्टिक सुविधा और संपादकीय इकाइयों के लिए लगभग 81 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इस विस्तार योजना से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ–साथ उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए करीब 300 नए रोजगार अवसर बनने की उम्मीद है। प्रबंधन का कहना है कि अधिकतर नौकरियां गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को मिलेंगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल गीता प्रेस हर साल लगभग 3 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित करता है। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में बसने वाले भारतीयों के बीच इसकी पुस्तकों की बड़ी मांग है। उत्तर प्रदेश के भीतर ही गीता प्रेस की 20 शाखाओं को नियमित रूप से पुस्तकों की आपूर्ति करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नई जमीन पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद प्रेस की उत्पादन और वितरण व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी। अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में तैयार होने वाला यह नया परिसर गीता प्रेस की वर्तमान क्षमता को कई गुना तक बढ़ा देगा, जिससे देश–दुनिया के अधिक पाठकों तक पुस्तकें पहुंचाई जा सकेंगी।
नई आवंटित भूमि पर निर्माण और उत्पादन कार्य शुरू करने के लिए गीता प्रेस को लगभग चार वर्ष की समयावधि दी गई है। लेकिन प्रबंधन की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से रजिस्ट्री, बाउंड्रीवाल, भवन निर्माण और मशीनों की स्थापना जैसे चरणों को निर्धारित अवधि से पहले पूरा कर लिया जाए। लालमणि तिवारी के अनुसार, जमीन आवंटन के साथ ही गीता प्रेस के विस्तार का वर्षों पुराना सपना अब हकीकत में बदलता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से समय–समय पर मिलने वाले सहयोग ने इस सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है।
इस समय गीता प्रेस 15 भारतीय भाषाओं में 1848 प्रकार की पुस्तकों का प्रकाशन कर रहा है। अब तक 18.75 करोड़ से अधिक प्रतियां श्रीमद्भगवद्गीता की और लगभग 13.25 करोड़ प्रतियां रामचरितमानस तथा अन्य तुलसीदास रचित ग्रंथों की प्रकाशित की जा चुकी हैं। गोरखपुर से निकलने वाली ये किताबें न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश और विदेश में आध्यात्मिक साहित्य की पहचान बन चुकी हैं। नए परिसर के तैयार होने के बाद गीता प्रेस अपनी इस विरासत को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ा सकेगा। UP News