उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए रबी सीजन से पहले राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन फसलों की सरकारी खरीद का खाका सामने रखते हुए चना, मसूर, सरसों और अरहर की नई MSP घोषित कर दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए रबी सीजन से पहले राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन फसलों की सरकारी खरीद का खाका सामने रखते हुए चना, मसूर, सरसों और अरहर की नई MSP घोषित कर दी है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का ज्यादा लाभकारी दाम मिलेगा और उन्हें मजबूरी में बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाया जा सकेगा। मंगलवार को प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता में समर्थन मूल्य, खरीद अवधि और खरीद लक्ष्य की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे किसान हित में बड़ा फैसला बताया. उनके मुताबिक, केंद्र सरकार के सहयोग से इस बार MSP में बढ़ोतरी की गई है, ताकि उत्तर प्रदेश के किसानों को बढ़ती लागत के बीच बेहतर आर्थिक सहारा मिल सके और खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।
प्रदेश सरकार की ओर से जारी नई दरों के अनुसार उत्तर प्रदेश में चना का MSP 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। मसूर के समर्थन मूल्य में 300 रुपये की बढ़ोतरी की गई है और अब इसका MSP 7000 रुपये प्रति क्विंटल होगा। इसी तरह सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पहले की तुलना में 250 रुपये ज्यादा है। वहीं अरहर के लिए MSP 8000 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में इन फसलों की MSP में वृद्धि का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों में जहां दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, वहां यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीद की समय-सीमा भी तय कर दी है। प्रदेश में रबी फसलों की सरकारी खरीद 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगी। यानी उत्तर प्रदेश के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए करीब 90 दिनों का समय मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस दौरान खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाएगा, ताकि किसानों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो। सरकारी योजना के तहत उत्तर प्रदेश में इस बार खरीद के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। मसूर की 6.77 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसे कुल उत्पादन का 100 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके अलावा सरसों की 5.30 लाख मीट्रिक टन, चना की 2.24 लाख मीट्रिक टन और अरहर की 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक क्रय केंद्र पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें लगाई जाएंगी। इसका उद्देश्य असली किसानों की पहचान सुनिश्चित करना और खरीद प्रक्रिया से बिचौलियों को बाहर रखना है। सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और किसानों को समय पर पैसा मिल सकेगा। साथ ही खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
राज्य में खरीद प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कुल 6 एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें दो केंद्रीय एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ शामिल हैं, जबकि चार राज्य स्तरीय एजेंसियां यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस भी इस अभियान में भाग लेंगी। सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश में नैफेड और एनसीसीएफ की ओर से सीधे खरीद के लिए 190 से अधिक क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा राज्य एजेंसियां भी अपने स्तर पर खरीद केंद्र संचालित करेंगी। इससे किसानों को अपने नजदीकी केंद्रों पर ही फसल बेचने की सुविधा मिल सकेगी और परिवहन की दिक्कत कम होगी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत 20 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिला था। इस बार सरकार की कोशिश है कि लाभार्थियों की संख्या और बढ़े तथा अधिक से अधिक किसान MSP पर अपनी फसल बेच सकें। यही वजह है कि खरीद ढांचे को मजबूत करने, केंद्रों की संख्या बढ़ाने और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। UP News