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प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सख्त और व्यवस्थित होने जा रही है। योगी सरकार सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से लाइसेंस सिस्टम को पासपोर्ट जैसी प्रक्रिया के मॉडल पर ढालने की तैयारी में है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सख्त और व्यवस्थित होने जा रही है। योगी सरकार सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से लाइसेंस सिस्टम को पासपोर्ट जैसी प्रक्रिया के मॉडल पर ढालने की तैयारी में है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बिना उचित प्रशिक्षण के ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं। सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक अब बिना ट्रेनिंग और ट्रैफिक नियमों की पूरी समझ के किसी भी आवेदक को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
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सरकारी स्तर पर हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में यह बात सामने आई कि प्रदेश में होने वाले कई सड़क हादसों के पीछे ड्राइविंग नियमों की अनदेखी और कम प्रशिक्षण एक बड़ी वजह है। इसी को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया को अधिक कठोर और चरणबद्ध बनाया जाए, ताकि केवल योग्य और प्रशिक्षित चालक ही सड़क पर उतरें।
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प्रस्तावित सिस्टम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
* आवेदक को पहले लर्निंग लाइसेंस प्राप्त करना होगा
* इसके बाद अनिवार्य ड्राइविंग ट्रेनिंग पूरी करनी होगी
* ट्रैफिक नियमों की लिखित और व्यावहारिक परीक्षा देना जरूरी होगा
* बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को और मजबूत किया जाएगा
* फाइनल टेस्ट पास करने के बाद ही स्थायी लाइसेंस जारी होगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार पूरी व्यवस्था को डिजिटल और ट्रैकिंग आधारित बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
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