उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कहा है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता आंदोलन, और देशभक्ति चेतना का प्रतीक है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कहा है कि राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश में यह घोषणा विशेष रूप से उस अवसर पर की गई जब इस गीत ने 150 वर्ष पूरे किए और यह समारोह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर था। घोषणा के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि इसे लागू करने का इंतजाम किया जाए, जिससे छात्रों तथा शिक्षकों को उसके महत्व की जानकारी दी जा सके।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कहा है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता आंदोलन, और देशभक्ति चेतना का प्रतीक है। मंत्र यही है कि अगर बच्चों से रोज-रोज इसे गायन के माध्यम से जोड़ा जाए, तो उनमें देशप्रेम-भावना और राष्ट्र-चेतना विकसित होगी। सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी धर्म, जाति या भाषा को देश से ऊपर नहीं माना जा सकता; इसलिए यह कदम सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देने का प्रयास है।
वंदे मातरम का गायन अनिवार्य किए जाने से छात्र-छात्राओं में राष्ट्र-चेतना, एकजुटता की भावना को बढ़ावा मिलेगा। स्कूल-कॉलेजों की सुबह-सभा एवं कार्यक्रमों में यह गतिविधि एक नियमित-मूल्यांकन का हिस्सा बन सकती है, जिससे शैक्षिक वातावरण में राष्ट्र-प्रेरणा का आयाम जोड़ना संभव होगा। यह शिक्षा नीतियों में सिर्फ पाठ्यपुस्तक-कौशल से आगे जाकर सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करने की दिशा में एक संकेत है।
कुछ संस्थाओं, समुदायों ने इस तरह के अनिवार्य गायन को संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक संवेदनशीलता, और अभिव्यक्ति की आजादी के दृष्टिकोण से देखा है। उदाहरण के लिए मुत्ताहिदा मजलिस ए उलेमा (जम्मू-कश्मीर) ने कहा है कि उन्हें यह निर्देश जबरदस्ती जैसा लगता है और उनका तर्क है कि यह उनकी धार्मिक मान्यताओं से टकराता है। व्यावहारिक तौर पर यह देखना होगा कि स्कूल-प्रशासन इसे कैसे लागू करेंगे :
* क्या यह रोजाना गायन होगा या सिर्फ विशेष अवसरों पर?
* क्या इसमें प्रशिक्षण, समय-तालिका, संगठनात्मक बदलाव आदि होंगे?
* क्या यह निजी विद्यालयों, सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा विभिन्न शैक्षणिक भाषा/मध्यम-स्कूलों में समान रूप से लागू होगा?
* यदि यह लागू होते-होते अन्य शैक्षणिक कार्यों, पाठ्यक्रम या बच्चों की स्वतंत्रता पर असर डाले तो यह विवाद का विषय बन सकता है।
भविष्य में यह देखने योग्य है कि सरकार किस तरह कार्यान्वयन निर्देश जारी करती है। इसकी समय सीमा, मॉनिटरिंग, पालन-प्रक्रिया आदि क्या होगी। शिक्षक, अभिभावक और छात्र-समुदाय की प्रतिक्रिया जैसे उनका सहभाग, सहमति या विरोध कैसा रहेगा। यदि राज्य के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पहल होगी और उसकी तुलना उत्तर प्रदेश में होने वाले बदलाव से की जा सकेगी (उदाहरण के लिए महाराष्ट्र ने पूरी वंदे मातरम गायन-दायित्व रखा था एक सीमित अवधि के लिए।) यह भी देखना होगा कि भविष्य में यदि कोई संस्था या छात्र-समूह इस आदेश के विरुद्ध जाए, तो किस प्रकार के नीति या न्यायिक विवाद सामने आ सकते हैं।