उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की रजिस्ट्री से जुड़ी परेशानी अब लोगों के लिए कम हो सकती है। योगी सरकार पंजीकरण व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की तैयारी में है, ताकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया ज्यादा आसान, पारदर्शी और व्यवस्थित बन सके।

UP News : उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की रजिस्ट्री से जुड़ी परेशानी अब लोगों के लिए कम हो सकती है। योगी सरकार पंजीकरण व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की तैयारी में है, ताकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया ज्यादा आसान, पारदर्शी और व्यवस्थित बन सके। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के रजिस्ट्री कार्यालयों में फ्रंट ऑफिस सिस्टम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, जहां लोगों को जरूरी जानकारी, दस्तावेजी मार्गदर्शन और प्रक्रिया से जुड़ी मदद एक ही जगह पर मिल सकेगी। माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रख सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार रजिस्ट्री कार्यालयों में भी वैसी ही सुविधा देने की तैयारी में है जैसी पासपोर्ट सेवा केंद्रों में देखने को मिलती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर चयनित रजिस्ट्री कार्यालय में एक फ्रंट ऑफिस बनाया जाएगा। यहां प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात रहेंगे, जो रजिस्ट्री कराने आए लोगों को जरूरी दस्तावेज, स्टांप, प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं के बारे में पूरी जानकारी देंगे। योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के हर ऐसे फ्रंट ऑफिस में शुरुआती चरण में चार विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। इनका काम केवल जानकारी देना ही नहीं होगा, बल्कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को बिना अनावश्यक उलझनों के पूरा कराने में भी मदद करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से आम नागरिकों की परेशानी कम होगी और कार्यालयों में कामकाज ज्यादा व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा।
इस नई सुविधा की शुरुआत उत्तर प्रदेश के चुनिंदा प्रमुख शहरों से किए जाने की तैयारी है। शुरुआती चरण में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, आगरा, बरेली, झांसी और गोरखपुर जैसे शहरों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सरकार की रणनीति यह है कि पहले उत्तर प्रदेश के बड़े और ज्यादा दबाव वाले रजिस्ट्री केंद्रों पर यह मॉडल लागू किया जाए, फिर इसके नतीजों के आधार पर इसे दूसरे जिलों तक बढ़ाया जाए। सरकारी स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निजी एजेंसियों या कंपनियों की मदद ली जाए। उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीदने-बेचने वालों के लिए यह कदम राहत भरा माना जा रहा है। अक्सर लोग रजिस्ट्री कार्यालयों में पहुंचने के बाद दस्तावेजों की कमी, स्टांप संबंधी भ्रम या प्रक्रिया की अधूरी जानकारी की वजह से परेशान होते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश में फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू होने से रजिस्ट्री प्रक्रिया न सिर्फ आसान बनेगी, बल्कि इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही, आम नागरिकों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और समय की भी बचत होगी।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ दिलाने के लिए फॉर्मर रजिस्ट्री पर भी तेजी से काम कर रही है। प्रदेश में किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ग्राम सचिवालयों में कैंप लगाकर किसानों का पंजीकरण कराया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह विशेष अभियान 15 अप्रैल तक चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के गांवों में लगाए जाने वाले इन कैंपों का मकसद किसानों का रजिस्ट्रेशन कराने के साथ-साथ रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को मौके पर ही ठीक करना भी है। सरकार चाहती है कि उत्तर प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा किसान डिजिटल सिस्टम से जुड़ें, ताकि उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि समेत अन्य कृषि योजनाओं का लाभ सीधे और बिना रुकावट मिल सके।
उत्तर प्रदेश में इस अभियान को सफल बनाने के लिए ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और लेखपालों की सक्रिय भूमिका तय की गई है। निर्देश दिए गए हैं कि हर क्षेत्र में कम से कम एक कैंप में लेखपाल की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को पंजीकरण के दौरान किसी तरह की तकनीकी या राजस्व संबंधी परेशानी न हो। गांव स्तर पर कैंप लगाकर फॉर्मर रजिस्ट्री तैयार करने की यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें प्रशासनिक सेवाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। एक ओर जहां शहरी क्षेत्रों में रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण उत्तर प्रदेश में किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त करने की कोशिश जारी है। UP News