एलडीए ने यह कहा है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गरीबों को सस्ते में मिलने वाला आवास किसी मुनाफाखोर या बिचौलिए के हाथों में न चला जाए।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ में स्थित उन फ्लैट्स पर २५ वर्ष तक बिक्री, ट्रांसफर या किराए पर देने पर प्रतिबंध लगा दिया है जोकि माफिया नेता मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर बने हैं। ये फ्लैट्स लाभार्थियों के नाम आवंटित किए गए हैं जिन्हें स्वामित्व मिलेगा, लेकिन वो अगले २५ साल तक इन्हें बेचना, किराए पर देना या किसी को ट्रांसफर करने का काम नहीं कर पाएँगे। यह आवासीय प्रोजेक्ट सरदार वल्लभभाई पटेल हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत है जो मुख्यत: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए है। एलडीए ने यह कहा है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गरीबों को सस्ते में मिलने वाला आवास किसी मुनाफाखोर या बिचौलिए के हाथों में न चला जाए।
लोकेशन : यह प्रोजेक्ट डालीबाग जैसी प्राइम लोकेशन में है। इसलिए मूल्य अपेक्षाकृत बहुत अधिक हो सकता था, और इस वजह से लाभार्थियों द्वारा तुरंत बेचने-ट्रांसफर करने की संभावना थी। योजना की मूल भावना यह है कि जब सरकार सस्ते आवास दे रही है उन परिवारों को जिनकी आय कम है, तो यह आवश्यक है कि वे फ्लैट वास्तविक जरूरतमंदों के पास ही हों न कि निवेश के लिए या मुनाफे के लिए खरीदे जाएँ। इस शर्त से वह भावना संरक्षित रहेगी। बिचौलियों/मुनाफाखोरों की रोक इसलिए लगाई गई है कि एलडीए को डर था कि इस तरह की योजना का लाभ उठाकर कुछ लोग फ्लैट तुरंत बेच देंगे या किराए पर देंगे, और फिर लाभार्थी-परिस्थिति कमजोर हो जाएगी। इसको नियंत्रित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
लाभार्थी को स्वामित्व मिलेगा, यह पूर्ण स्वामित्व हो सकता है या आवंटन के आधार पर हो सकता है पर बेचना, ट्रांसफर करना, किराए पर देना इन तीनों पर अगले २५ साल तक पाबंदी है। एलडीए इस फैसले को लागू करने के लिए रजिस्ट्री में शर्तें जोड़ने, निबंधन विभाग को जानकारी देने जैसी कार्रवाई करने जा रही है ताकि इस प्रतिबंध को कानूनी रूप से पक्का किया जा सके। इस स्कीम के लिए आॅनलाइन पंजीकरण हुआ था, लॉटरिया (लकी ड्रॉ) के माध्यम से आवंटन किया गया था, और फ्लैट्स की कीमत लगभग 10.70 लाख प्रति यूनिट तय की गई थी। यह योजना ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए है जैसे कि आय सीमा, कोई पहले से मकान न होना इत्यादि शर्तें होंगी।
यदि आप लाभार्थी हैं : यह समझ लें कि आप मालिक तो होंगें, लेकिन अगले २५ साल तक फ्लैट को बेच नहीं पाएँगे, किराए पर नहीं दे पाएँगे और ट्रांसफर भी नहीं कर पाएँगे। इसलिए निर्माण या अन्य दृष्टिकोण से निवेश-पहल के रूप में नहीं सोचें। रजिस्ट्री / दस्तावेज अच्छे से जांचें क्योंकि रजिस्ट्री में यह शर्त लिखी गई होगी कि २५ साल की पाबंदी है इसे ध्यान से देखें। यदि आप आवेदन करने वाले हैं तो पात्रता शर्तें देखें जैसे आय सीमा, पूर्व में मकान न होना, ईडब्ल्यूएस श्रेणी, आॅनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया, अंतिम तिथि आदि।
इस योजना का उद्देश्य है सस्ते आवास वास्तव में जरूरतमंदों को देना, इसलिए इसे थोड़ी देर तक रोक के साथ-साथ सुरक्षित रखने की दिशा में देखा गया है।
कुछ समय पहले डॉलीबाग आवास योजना में माफिया मुख्तार अंसारी की कब्जाई गई जमीन पर 72 फ्लैट बनाए गए थे। इन फ्लैट्स की बाजार कीमत करोड़ों में थी। लेकिन सरकार ने इन्हें मात्र 10 लाख रुपये में जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया। इस योजना में 8184 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से 72 लोगों को चाबियाँ सौंपी गईं। इस सफलता के बाद ही योगी सरकार ने फैसला लिया कि अब इसी तरह की और योजनाएँ पूरे लखनऊ में चलाई जाएँगी।