विज्ञापन
प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब ग्राम पंचायतों का संचालन मौजूदा प्रधानों के हाथों में ही रहेगा।

UP News : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब ग्राम पंचायतों का संचालन मौजूदा प्रधानों के हाथों में ही रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह पहली बार होगा जब उत्तर प्रदेश में ऐसी व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे पहले पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर गांवों की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी जाती थी। लेकिन इस बार सरकार ने चुने हुए प्रधानों पर भरोसा जताते हुए उन्हें ही विकास कार्यों की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है।
UP News
राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला माना जा रहा है। आरक्षण की नई व्यवस्था तय करने और आयोग की सिफारिशों को लागू करने में अभी कई महीने लग सकते हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि 26 मई को मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में गांवों में विकास योजनाओं, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़क और अन्य जरूरी कार्यों को जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी थी।
UP News
नई व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल भले ही औपचारिक रूप से समाप्त हो जाए, लेकिन वे प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। उनके नेतृत्व में एक समिति बनाई जाएगी, जो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालेगी। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में चल रही योजनाएं प्रभावित नहीं होंगी और विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी। जरूरत पड़ने पर नए विकास कार्यों को भी मंजूरी दी जा सकेगी।
UP News
उत्तर प्रदेश में पहले जब भी पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाए, तब शासन की ओर से गांवों में तैनात एडीओ पंचायत या ग्राम सचिव को प्रशासक नियुक्त कर दिया जाता था। ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधानों के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार समाप्त हो जाते थे। लेकिन इस बार सरकार ने अलग रास्ता अपनाया है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से लागू मॉडल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। इसे स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
UP News
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से ग्राम प्रधानों की ताकत और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। पंचायत चुनाव टलने के कारण जहां कई गांवों में प्रशासनिक असमंजस की स्थिति बन रही थी, वहीं अब प्रधानों के हाथ में कमान रहने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही सरकार यह संदेश भी देना चाहती है कि गांवों में चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका को खत्म करने के बजाय उन्हें जिम्मेदारी देकर व्यवस्था को जारी रखा जाए।
UP News
हालांकि विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल भी उठा सकता है। राजनीतिक दल यह मुद्दा उठा सकते हैं कि चुनावों में देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। वहीं सरकार का तर्क है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निष्पक्ष और कानूनी रूप से मजबूत चुनाव कराना संभव होगा। उत्तर प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था में यह फैसला एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। पहली बार ऐसा होगा जब चुनाव टलने के बावजूद गांवों की सत्ता सीधे प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं जाएगी, बल्कि चुने हुए प्रधान ही प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पंचायत चुनाव कब तक कराए जाते हैं और नई व्यवस्था गांवों में विकास कार्यों को कितनी गति दे पाती है। UP News
विज्ञापन