यह कदम न सिर्फ शहरों की सूरत बदलने का दावा करता है, बल्कि आवास की समस्या सस्ते और टिकाऊ तरीके से हल करने का अखिल भारतीय मॉडल भी बन सकता है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक बेहतरीन पुनर्विकास योजना के साथ आगे बढ़ रही है, जिसके जरिए पुराने और जर्जर भवनों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक, सुरक्षित और बहुउद्देशीय हाई-राइज बिल्डिंग्स खड़ी की जाएंगी। यह कदम न सिर्फ शहरों की सूरत बदलने का दावा करता है, बल्कि आवास की समस्या सस्ते और टिकाऊ तरीके से हल करने का अखिल भारतीय मॉडल भी बन सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि शहरों को सिर्फ भवनों के समूह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जीवंत सामाजिक संरचनाएँ माना जाना चाहिए। उनकी यह सोच नए नीति मसौदे में झलकती है, जिसमें आधुनिकता, परंपरा और मानवता का संतुलन रखने की बात कही गई है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि यह नीति केवल भवनों का नवीनीकरण नहीं करेगी, बल्कि शहरों के समग्र पुनर्जागरण की दिशा में काम करेगी। भू-खंडों का पुनर्गठन, निजी निवेश को प्रोत्साहन, जनहित को प्राथमिकता देना और प्रभावित परिवारों की आजीविका की रक्षा शामिल है।
1. लंबे समय से बने पुराने भवनों पर फोकस
जिन भवनों की उम्र 25 वर्ष या उससे अधिक होगी, उन्हें पुनर्विकास की श्रेणी में रखा जाएगा। इन भवनों की संरचनात्मक आॅडिट अनिवार्य होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे वास्तव में असुरक्षित या जर्जर हैं। यह नीति छोटे एकल-इमारतों पर लागू नहीं होगी; यह केवल बड़े भू-खंडों (जैसे को-आॅपरेटिव सोसाइटी, औद्योगिक भूखंड) पर असर करेगी। लीज पर दी गई जमीनों पर पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विकास शुल्क में लगभग 50% तक की छूट देने की योजना है। जमीन के उपयोग को बदलने के लिए 25% छूट दी जा सकती है। यदि कोई परियोजना पारंपरिक जोन-रेगुलेशन से अलग उपयोग करना चाहती है, तो प्रभाव शुल्क पर भी 25% छूट मिलने की संभावनाएं हैं। इसके बदले में, डेवलपर्स को सामाजिक दायित्व उठाने होंगे। नई इमारतों में 10% इकाइयाँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और 10% निम्न-आय वर्ग (एलआईजी) के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
पुनरनिर्माण परियोजनाओं के लिए सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली बनाई जाएगी, जिससे मंजूरी लेने में समय कम लगे। नीति में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को बढ़ावा देने की बात की गई है, ताकि निजी क्षेत्र अधिक सक्रिय हो सके। एक राज्य-स्तरीय पुनर्विकास प्राधिकरण का गठन हो सकता है, जो इन पहलों की निगरानी करेगा और मार्गदर्शन देगा।
हर परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग मानक और ऊर्जा दक्षता आवश्यक होगी। पर्यावरण संतुलन, सार्वजनिक सुविधाओं, पार्किंग, पानी और ड्रेनेज जैसी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास होगा। नीति पुराने बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों, सरकारी आवास परिसरों और अनधिकृत बस्तियों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियाँ तैयार करेगी।
सिर्फ नए निर्माण ही नहीं, उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी महत्व दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि विरासत भवनों को संरक्षित करना और उनका पुनरुद्धार करना भी इस नीति का हिस्सा होगा। परियोजनाओं में ऐसे भवनों की पहचान कर, उन्हें पर्यटन-केंद्रित पुर्नरूप में विकसित करने की भी योजना है।
यह नीति योगी सरकार की विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की विजन के हिस्से के रूप में भी देखी जाती है, जिसमें लखनऊ, कानपुर जैसे शहरों को अक हब और ग्लोबल-क्लास शहरों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि पुनर्विकास नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को हटाकर शहरों को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि नगरों की अर्थव्यवस्था, रिहायशी क्षमता, कृषि-भूमि दबाव, और निवास लागत को संतुलित करने में भी मदद करेगी।?