पत्नी-1, पत्नी-2… और संडे ऑफ: पंचायत का फार्मूला गांव में हिट!
जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।

UP News : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक गांव से सामने आई यह घटना रिश्तों की खींचतान और परंपराओं की पेचीदगी का ऐसा किस्सा बन गई है, जिसकी चर्चा अब उत्तर प्रदेश के चौपाल से लेकर थाने तक हो रही है। दो पत्नियों के बीच पति को अपने-अपने हिस्से में रखने की तकरार इतनी बढ़ी कि घर की बात सार्वजनिक हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख गांव की पंचायत ने मोर्चा संभाला और बातचीत के बाद एक लिखित समझौता तैयार कराया। जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगलिया आकिल गांव का बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवक ने पहली शादी परिवार की रज़ामंदी से की थी, जबकि दूसरी शादी प्रेम-संबंध के बाद हुई। शुरुआत में दोनों रिश्ते अपनी-अपनी जगह चलते रहे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, पति के साथ रहने को लेकर दोनों पत्नियों के बीच टकराव तेज होता गया। घर का माहौल रोजाना की नोकझोंक और तनाव से भरने लगा, और विवाद इस हद तक बढ़ा कि घरेलू कलह उत्तर प्रदेश की पुलिस चौकी तक पहुंच गई, जहां से मामला फिर सामाजिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश शुरू हुई।
पंचायत का संडे हॉलिडे फॉर्मूला
शिकायत दर्ज होने के बाद मामला अदालत या लंबी कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ने से पहले ही उसे सामाजिक स्तर पर थामने के लिए उत्तर प्रदेश के इस गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पंचों ने दोनों पत्नियों और पति की दलीलें सुनीं, फिर विवाद को शांत करने के लिए दिनों के बंटवारे वाला फार्मूला तय किया। समझौते के मुताबिक सोमवार से बुधवार तक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा, जबकि गुरुवार से शनिवार तक दूसरी पत्नी के साथ। सबसे दिलचस्प शर्त यह रखी गई कि रविवार पति का वीकली ऑफ होगा उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिताएगा। विशेष परिस्थितियों में सीमित तौर पर एक-दो दिन आगे-पीछे करने की गुंजाइश भी रखी गई है। ताकि आगे फिर विवाद न उभरे, पंचायत ने इस फैसले को लिखित दस्तावेज में दर्ज कराकर तीनों पक्षों के हस्ताक्षर भी कराए।
उत्तर प्रदेश में पंचायतें क्यों बनती हैं मध्यस्थ
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई बार घरेलू विवाद जब थाने तक पहुंच जाते हैं, तो सामाजिक दबाव और घर की बात घर में निपटे वाली सोच के चलते पंचायतें मध्यस्थ की भूमिका निभाती हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कानूनी और सामाजिक दोनों पहलू जुड़े होते हैं, इसलिए समाधान अक्सर समझौते की शक्ल में सामने आता है जैसा इस मामले में भी बताया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब पति के समय को लेकर ऐसा बंटवारा चर्चा में आया हो। इससे पहले बिहार के पूर्णिया में भी एक प्रकरण सामने आया था, जहां परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा विवाद सप्ताह के दिनों के बंटवारे के आधार पर सुलझाया गया था। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक गांव से सामने आई यह घटना रिश्तों की खींचतान और परंपराओं की पेचीदगी का ऐसा किस्सा बन गई है, जिसकी चर्चा अब उत्तर प्रदेश के चौपाल से लेकर थाने तक हो रही है। दो पत्नियों के बीच पति को अपने-अपने हिस्से में रखने की तकरार इतनी बढ़ी कि घर की बात सार्वजनिक हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख गांव की पंचायत ने मोर्चा संभाला और बातचीत के बाद एक लिखित समझौता तैयार कराया। जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगलिया आकिल गांव का बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवक ने पहली शादी परिवार की रज़ामंदी से की थी, जबकि दूसरी शादी प्रेम-संबंध के बाद हुई। शुरुआत में दोनों रिश्ते अपनी-अपनी जगह चलते रहे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, पति के साथ रहने को लेकर दोनों पत्नियों के बीच टकराव तेज होता गया। घर का माहौल रोजाना की नोकझोंक और तनाव से भरने लगा, और विवाद इस हद तक बढ़ा कि घरेलू कलह उत्तर प्रदेश की पुलिस चौकी तक पहुंच गई, जहां से मामला फिर सामाजिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश शुरू हुई।
पंचायत का संडे हॉलिडे फॉर्मूला
शिकायत दर्ज होने के बाद मामला अदालत या लंबी कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ने से पहले ही उसे सामाजिक स्तर पर थामने के लिए उत्तर प्रदेश के इस गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पंचों ने दोनों पत्नियों और पति की दलीलें सुनीं, फिर विवाद को शांत करने के लिए दिनों के बंटवारे वाला फार्मूला तय किया। समझौते के मुताबिक सोमवार से बुधवार तक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा, जबकि गुरुवार से शनिवार तक दूसरी पत्नी के साथ। सबसे दिलचस्प शर्त यह रखी गई कि रविवार पति का वीकली ऑफ होगा उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिताएगा। विशेष परिस्थितियों में सीमित तौर पर एक-दो दिन आगे-पीछे करने की गुंजाइश भी रखी गई है। ताकि आगे फिर विवाद न उभरे, पंचायत ने इस फैसले को लिखित दस्तावेज में दर्ज कराकर तीनों पक्षों के हस्ताक्षर भी कराए।
उत्तर प्रदेश में पंचायतें क्यों बनती हैं मध्यस्थ
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई बार घरेलू विवाद जब थाने तक पहुंच जाते हैं, तो सामाजिक दबाव और घर की बात घर में निपटे वाली सोच के चलते पंचायतें मध्यस्थ की भूमिका निभाती हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कानूनी और सामाजिक दोनों पहलू जुड़े होते हैं, इसलिए समाधान अक्सर समझौते की शक्ल में सामने आता है जैसा इस मामले में भी बताया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब पति के समय को लेकर ऐसा बंटवारा चर्चा में आया हो। इससे पहले बिहार के पूर्णिया में भी एक प्रकरण सामने आया था, जहां परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा विवाद सप्ताह के दिनों के बंटवारे के आधार पर सुलझाया गया था। UP News












