पत्नी-1, पत्नी-2… और संडे ऑफ: पंचायत का फार्मूला गांव में हिट!

जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।

पंचायत का संडे ऑफ फार्मूला चर्चा में
पंचायत का संडे ऑफ फार्मूला चर्चा में
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 10:14 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक गांव से सामने आई यह घटना रिश्तों की खींचतान और परंपराओं की पेचीदगी का ऐसा किस्सा बन गई है, जिसकी चर्चा अब उत्तर प्रदेश के चौपाल से लेकर थाने तक हो रही है। दो पत्नियों के बीच पति को अपने-अपने हिस्से में रखने की तकरार इतनी बढ़ी कि घर की बात सार्वजनिक हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख गांव की पंचायत ने मोर्चा संभाला और बातचीत के बाद एक लिखित समझौता तैयार कराया जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगलिया आकिल गांव का बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवक ने पहली शादी परिवार की रज़ामंदी से की थी, जबकि दूसरी शादी प्रेम-संबंध के बाद हुई। शुरुआत में दोनों रिश्ते अपनी-अपनी जगह चलते रहे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, पति के साथ रहने को लेकर दोनों पत्नियों के बीच टकराव तेज होता गया। घर का माहौल रोजाना की नोकझोंक और तनाव से भरने लगा, और विवाद इस हद तक बढ़ा कि घरेलू कलह उत्तर प्रदेश की पुलिस चौकी तक पहुंच गई, जहां से मामला फिर सामाजिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश शुरू हुई।

पंचायत का संडे हॉलिडे फॉर्मूला

शिकायत दर्ज होने के बाद मामला अदालत या लंबी कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ने से पहले ही उसे सामाजिक स्तर पर थामने के लिए उत्तर प्रदेश के इस गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पंचों ने दोनों पत्नियों और पति की दलीलें सुनीं, फिर विवाद को शांत करने के लिए दिनों के बंटवारे वाला फार्मूला तय किया। समझौते के मुताबिक सोमवार से बुधवार तक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा, जबकि गुरुवार से शनिवार तक दूसरी पत्नी के साथ। सबसे दिलचस्प शर्त यह रखी गई कि रविवार पति का वीकली ऑफ होगा उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिताएगा। विशेष परिस्थितियों में सीमित तौर पर एक-दो दिन आगे-पीछे करने की गुंजाइश भी रखी गई है। ताकि आगे फिर विवाद न उभरे, पंचायत ने इस फैसले को लिखित दस्तावेज में दर्ज कराकर तीनों पक्षों के हस्ताक्षर भी कराए।

उत्तर प्रदेश में पंचायतें क्यों बनती हैं मध्यस्थ

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई बार घरेलू विवाद जब थाने तक पहुंच जाते हैं, तो सामाजिक दबाव और घर की बात घर में निपटे वाली सोच के चलते पंचायतें मध्यस्थ की भूमिका निभाती हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कानूनी और सामाजिक दोनों पहलू जुड़े होते हैं, इसलिए समाधान अक्सर समझौते की शक्ल में सामने आता है जैसा इस मामले में भी बताया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब पति के समय को लेकर ऐसा बंटवारा चर्चा में आया हो। इससे पहले बिहार के पूर्णिया में भी एक प्रकरण सामने आया था, जहां परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा विवाद सप्ताह के दिनों के बंटवारे के आधार पर सुलझाया गया था। UP News

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सीजेएम के तबादले पर अखिलेश यादव का कटाक्ष, न्यायपालिका से स्वत: संज्ञान की उम्मीद

अखिलेश यादव का यह बयान उस समय आया है जब सीजेएम द्वारा सीओ अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था, जिसके कुछ ही समय बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। सपा प्रमुख ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था और स्वतंत्र सोच रखने वाले लोग इस पर चुप नहीं रहेंगे।

akhilesh (21)
अखिलेश यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Jan 2026 06:34 PM
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UP News : संभल में तैनात मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें आशा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट इस पूरे घटनाक्रम पर स्वयं संज्ञान लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ जज और देश के बुद्धिजीवी वर्ग इस विषय पर ध्यान देंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे। अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़े अहम सवाल खड़े करती हैं।

सीजेएम द्वारा सीओ अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर तबादला

अखिलेश यादव का यह बयान उस समय आया है जब सीजेएम द्वारा सीओ अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था, जिसके कुछ ही समय बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। सपा प्रमुख ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था और स्वतंत्र सोच रखने वाले लोग इस पर चुप नहीं रहेंगे।

संगठन और चुनावी रणनीति पर भी फोकस

इसी बीच अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सभी सांसदों की बैठक बुलाई। इस बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति, संगठन को मजबूत करने और हर लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीटों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान अखिलेश ने अपने सांसदों से कहा कि मौजूदा 37 सांसद 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत की नींव साबित होंगे। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया

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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के आधिकारिक आवास का नाम बदलकर जन भवन किया गया

यह कदम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा राज्यपाल के आवासों के नामकरण को एकसमान बनाने के निदेर्शों के अनुपालन में उठाया गया है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का आवास सभी सरकारी दस्तावेजों, पत्राचार और अन्य आधिकारिक प्रयोजनों में जन भवन के नाम से ही संदर्भित किया जाएगा।

jan bhawan
राज्यपाल आवास का नया नाम हुआ जन भवन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Jan 2026 05:50 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यपाल के आधिकारिक आवास का नाम बदलने का निर्णय लिया है। अब तक राज भवन के नाम से जाने जाने वाले इस प्रतिष्ठित भवन को जन भवन कहा जाएगा। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से सभी सरकारी और वैधानिक कार्यों में लागू होगा। जबसे भाजपा सरकार आई है तमाम शहरों और भवनों के पुराने नाम चेंज कर दिए गए हैं, उसी कड़ी में यह एक और बदलाव देखने को मिल रहा है।

राज भवन का नाम बदलकर जन भवन किया गया

यह कदम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा राज्यपाल के आवासों के नामकरण को एकसमान बनाने के निदेर्शों के अनुपालन में उठाया गया है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का आवास सभी सरकारी दस्तावेजों, पत्राचार और अन्य आधिकारिक प्रयोजनों में जन भवन के नाम से ही संदर्भित किया जाएगा। इस परिवर्तन का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता और जनता के प्रति प्रशासन की पहुँच को दर्शाना बताया जा रहा है।

कई शहरों के नाम पहले भी बदले जा चुके

अभी राज्यपाल के आधिकारिक निवास का नाम बदलकर राज भवन से जन भवन भले ही कर दिया गया है। आज से पहले भी देश व प्रदेश के कई शहरों, जिलों व भवनों और सड़कों का नाम बदला जा चुका है। विपक्ष का मानना है कि सरकार के पास कोई नया काम करने को तो है नहीं इसलिए वे पुराने शहरों, भवनों और सड़कों का नाम चेंज करके कुछ काम करने का स्वयं और दूसरों को सांत्वना दे रहे हैं।

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