दूल्हे को चाकू मारकर प्रेमी के साथ भागी दुल्हन

पीड़ित दूल्हे ने पुलिस को बताया, "मैं रात करीब 9 बजे उसके पास गया और उसे छुआ। वह गुस्से से लाल हो गई और बोली 'मुझसे दूर रहना'। इसके बाद उसने चाकू निकालकर मेरे हाथ में मार दिया।" घटना के बाद जब दूल्हे ने दुल्हन के परिवार को सूचना दी।

knife to the groom
दुल्हन अपने ही चाचा के साथ गायब (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar28 Feb 2026 08:22 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को स्तंभित कर दिया है। नगला बस्ती इलाके में एक नवविवाहिता ने सुहागरात के दिन ही दूल्हे पर जानलेवा हमला कर दिया। घटना की गंभीरता इस कदर थी कि दुल्हन ने न सिर्फ दूल्हे को चाकू मारा, बल्कि बाद में ससुरालियों को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश कर दिया और लाखों के जेवरात व नकदी लेकर अपने 'प्रेमी चाचा' के साथ फरार हो गई।

सुहागरात पर बरसी तलवार

जानकारी के मुताबिक, दुल्हन का विवाह 21 फरवरी को हुआ था और 22 फरवरी को वह ससुराल पहुंची। सुहागरात के दिन जैसे ही दूल्हे ने उसके करीब जाने की कोशिश की, दुल्हन आग बबूला हो उठी। उसने दूल्हे को चेतावनी देते हुए कहा कि वह उससे दूर रहे, वरना वह या तो खुद मर जाएगी या उसे मार देगी। इसके तुरंत बाद उसने छिपाकर रखा चाकू निकाला और दूल्हे के हाथ पर हमला कर दिया, जिससे दूल्हा गंभीर रूप से घायल हो गया।

दूल्हे का दर्दनाक बयान

पीड़ित दूल्हे ने पुलिस को बताया, "मैं रात करीब 9 बजे उसके पास गया और उसे छुआ। वह गुस्से से लाल हो गई और बोली 'मुझसे दूर रहना'। इसके बाद उसने चाकू निकालकर मेरे हाथ में मार दिया।" घटना के बाद जब दूल्हे ने दुल्हन के परिवार को सूचना दी, तो उसकी मां, चाचा और चाची मौके पर पहुंचे। नई शादी को देखते हुए परिवार वालों ने समझाइश दी और वापस चले गए। इस डर से कि कहीं वह फिर हमला न कर दे, दूल्हा उस रात अलग खटिया पर सोया।

खाने में मिलाया जहर, लाखों की लूट

मामले का सबसे हैरान करने वाला खुलासा शादी के तीसरे दिन हुआ। भागने की नीयत से दुल्हन ने पूरे परिवार के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाते ही दूल्हा और उसके परिवारजन बेहोश हो गए। इस मौके का फायदा उठाते हुए दुल्हन घर से सोने के लाखों के जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गई।

प्रेमी चाचा के साथ मिली साजिश

सुबह जब परिवार के लोग होश में आए तो दुल्हन वहां नहीं थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुल्हन का अपने ही चाचा के साथ अवैध संबंध चल रहे थे। दुल्हन ने शादी के बाद भी इस रिश्ते को नहीं तोड़ा और चाचा के साथ मिलकर पूरा नाटक रचा।

पुलिस कार्रवाई

पीड़ित दूल्हे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस फरार दुल्हन और उसके प्रेमी चाचा की तलाश में जुट गई है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है। UP News

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Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश का प्राचीन शहर
locationभारत
userअसमीना
calendar28 Feb 2026 03:03 PM
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उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए पूरे भारत में जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के शहरों में वाराणसी का नाम सबसे प्रमुख है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक शहरों में से एक है। उत्तर प्रदेश में बसा यह शहर न केवल धर्म और संस्कृति का केंद्र है बल्कि शिक्षा और ज्ञान का भी प्रमुख स्थल माना जाता है। उत्तर प्रदेश की यह नगरी गंगा नदी के किनारे फैली हुई है और इसे दुनिया के सबसे पुराने शहरों में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश के इतिहास और संस्कृति में वाराणसी का योगदान अतुलनीय है यही कारण है कि इसे ‘ज्ञान नगरी’ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में वाराणसी ने अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को आज भी जीवित रखा है।

वाराणसी भारत का सबसे प्राचीन शहर

वाराणसी उत्तर प्रदेश के मध्य में गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। यह शहर अपनी पुरातन सभ्यता और ऐतिहासिक धरोहर के कारण भारत और दुनिया में विशिष्ट स्थान रखता है। पुरातत्व और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वाराणसी की उत्पत्ति हजारों साल पुरानी है। यहां मंदिर, घाट और सांस्कृतिक स्थलों की भरमार है जो शहर को जीवंत बनाते हैं। प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने भी लिखा है कि वाराणसी इतिहास से पुराना और परंपराओं से भी प्राचीन है।

तीन नामों से मशहूर है वाराणसी

वाराणसी को तीन नामों से जाना जाता है। ‘वाराणसी’ गंगा की सहायक नदियों वरुणा और आसी के नाम से जुड़ा है। ‘काशी’ सर्व ज्ञान और शिक्षा की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है जबकि ‘बनारस’ शास्त्रीय संगीत और कला का केंद्र है। इन तीन नामों ने शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक पहचान को मजबूती दी है। यहां कई महान कवि, संत और विद्वान जैसे कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद और पंडित रवि शंकर ने अपने योगदान से शहर की महत्ता को और बढ़ाया।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत

वाराणसी को धार्मिक नगरी के रूप में भी जाना जाता है। यहां भगवान शिव के प्राचीन मंदिर और गंगा नदी के घाट श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण हैं। इसे ‘मंदिरों का शहर’, ‘दीपों का शहर’ और ‘भगवान शिव की नगरी’ भी कहा जाता है। सारनाथ में गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन दिया जिससे यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया। इस शहर की गलियों, घाटों और मंदिरों में भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक मिलती है।

शिक्षा और विश्वविद्यालयों का केंद्र

वाराणसी शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र है। यहां चार बड़े विश्वविद्यालय हैं बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर टिबेटियन स्टडीज और संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय। यहां के लोग मुख्य रूप से काशिका भोजपुरी बोलते हैं जो हिंदी की एक प्यारी बोली है। शिक्षा और संस्कृति के यह केंद्र शहर को भारत की बौद्धिक राजधानी बनाते हैं।

वाराणसी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक खासियत

वाराणसी की कथाएं लगभग 10,000 साल पुरानी हैं और इसे विश्व के सबसे पुराने शहरों में शामिल किया गया है। गोस्वामी तुलसीदास ने यहीं रामचरितमानस लिखा और यहां शास्त्रीय संगीत का प्रमुख घराना विकसित हुआ। इसकी गलियां, घाट और मंदिर भारतीय संस्कृति का जीवंत चित्र प्रस्तुत करते हैं और शहर को हर दृष्टि से विशिष्ट बनाते हैं।

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उत्तर प्रदेश प्रशासन में री-शफल
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar28 Feb 2026 02:38 PM
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आईएएस राजेश कुमार सिंह को पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण से जुड़े दायित्वों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ये दोनों विभाग उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की रीढ़ माने जाते हैं। जहां पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं का संचालन करता है, वहीं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग विशेष जरूरतों वाले नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाता है। शासन का संकेत साफ है योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, और इसमें पारदर्शिता व समयबद्धता सुनिश्चित हो।

राजकमल यादव बने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण में विशेष सचिव

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