उत्तर प्रदेश बीजेपी में होली के बाद बड़ा बदलाव तय, इन वर्गों को मिलेगी प्राथमिकता

माना जा रहा है कि यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा है। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलते ही कार्यकारिणी का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

बीजेपी संगठन में बदलाव
बीजेपी संगठन में बदलाव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 10:52 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश संगठन में होली के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नई प्रदेश कार्यकारिणी की फाइनल लिस्ट पर तेजी से काम चल रहा है और इस बार नए चेहरों के साथ महिलाओं, दलित और ओबीसी को ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर संगठन को नया आकार देने की तैयारी है। माना जा रहा है कि यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा है। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलते ही कार्यकारिणी का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

होली के बाद हो सकता है औपचारिक ऐलान

भाजपा के संगठन चुनाव की लंबी प्रक्रिया के बाद, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में नई प्रदेश कार्यकारिणी की तैयारी लगभग पूरी मानी जा रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश में बचे हुए मंडल अध्यक्षों के नाम भी घोषित किए जा चुके हैं। अब निगाहें शेष जिलाध्यक्षों और प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा पर टिकी हैं, जिसे लेकर पार्टी में इस सप्ताह के भीतर स्थिति साफ होने की चर्चा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में कार्यकारिणी के नामों पर लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश नामों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अंतिम सूची तभी सार्वजनिक होगी जब केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिल जाएगी। इसी वजह से औपचारिक घोषणा होली के बाद किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध राज्य में संगठन का ढांचा क्षेत्रीय संतुलन पर भी टिकता है। नई प्रदेश कार्यकारिणी में नए लोगों को जगह देने के साथ-साथ पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर चर्चा यह भी है कि पूर्वांचल के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी यूपी को कार्यकारिणी में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि प्रदेश स्तर पर संगठन की पकड़ हर क्षेत्र में मजबूत दिखे।

महिलाओं-दलित-ओबीसी को मिलेगी प्राथमिकता

भाजपा संगठन के तहत उत्तर प्रदेश के 98 जिलों में जिलाध्यक्षों की घोषणा का बड़ा हिस्सा पहले ही हो चुका है। इसके बाद की घोषणा प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है और बचे हुए जिलाध्यक्षों के नाम जल्द सामने आने की उम्मीद है। वहीं जिला कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया भी जारी है, जिसमें संगठन स्तर पर महिलाओं, दलित और ओबीसी को प्राथमिकता देने के निर्देशों की चर्चा है। प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में भाजपा का उद्देश्य सिर्फ पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में नेतृत्व का विस्तार और स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाना भी माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह कवायद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक आधार को और व्यापक करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

लखनऊ मेट्रो नेटवर्क होगा और बड़ा, नए कॉरिडोर के लिए शुरू हुआ सर्वे

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने वसंत कुंज से IIM रोड तक प्रस्तावित नए मेट्रो कॉरिडोर का औपचारिक सर्वे शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि यह रूट आगे चलकर लखनऊ के एजुकेशन-हब को शहर के मुख्य हिस्सों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

लखनऊ मेट्रो
लखनऊ मेट्रो
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 09:40 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को लेकर एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया गया है। उत्तर प्रदेश के तेजी से बदलते इस शहर के उत्तरी इलाकों और बड़े शैक्षणिक संस्थानों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने वसंत कुंज से IIM रोड तक प्रस्तावित नए मेट्रो कॉरिडोर का औपचारिक सर्वे शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि यह रूट आगे चलकर लखनऊ के एजुकेशन-हब को शहर के मुख्य हिस्सों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

सर्वे तय करेगा रूट की लंबाई

UPMRC की टीम इस सर्वे के जरिए यह आकलन करेगी कि प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी होगी, कितनी लागत आएगी और रूट का कितना हिस्सा एलिवेटेड या अंडरग्राउंड बनाया जाना बेहतर रहेगा। प्राथमिक संकेतों के मुताबिक कॉरिडोर की लंबाई करीब 10 किलोमीटर के आसपास हो सकती है। लागत नियंत्रित रखने और निर्माण को तेज गति देने के लिए अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड रखने की दिशा में तैयारी की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के शिक्षा-हब को मिलेगा बड़ा फायदा

यह प्रस्तावित कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के शिक्षा-केंद्र के रूप में उभर रहे लखनऊ के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। वसंत कुंज से IIM रोड तक मेट्रो पहुंचने पर हजारों छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों को सीधी व भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलेगी। अभी IIM और आसपास के संस्थानों तक पहुंचने के लिए लोग अक्सर निजी वाहन, ऑटो या कैब पर निर्भर हैं, जिससे पीक आवर्स में ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। मेट्रो शुरू होने से समय की बचत, यात्रा अधिक सुरक्षित और प्रदूषण कम होने की उम्मीद है। लखनऊ मेट्रो विस्तार के मौजूदा रोडमैप में प्राथमिकता चारबाग से वसंत कुंज वाले सेक्शन को दी गई है। जैसे ही यह चरण निर्माण के लिहाज से आगे बढ़ेगा, वसंत कुंज से IIM रोड तक विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। UPMRC का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में मेट्रो नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से अधिकतम क्षेत्रों तक पहुंचे और यात्रियों को निर्बाध सुविधा मिले।

‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ कॉरिडोर पर फिलहाल रोक

इस बीच UPMRC ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक मेट्रो विस्तार के प्रस्ताव को फिलहाल लंबित रखने का फैसला किया है। वजह यह बताई गई है कि नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर को केंद्र और राज्य सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में नया हिस्सा जोड़ने पर पूरी परियोजना की DPR में बदलाव करना पड़ेगा और केंद्र से दोबारा मंजूरी लेनी होगी, जिससे प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसके अलावा, राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक विस्तार करने पर लगभग 757 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने की बात सामने आई है इसी के चलते फिलहाल इस प्रस्ताव पर ब्रेक लगाया गया है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

नवरात्र से पहले अयोध्या पहुंचेंगी राष्ट्रपति, पट्टिका की कराएंगी स्थापना

इस अवसर पर राष्ट्रपति रजत प्लेट पर स्वर्णांकित ‘राम’ नाम की पट्टिका की भी स्थापना कराएंगी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक यह पट्टिका लगभग साढ़े तीन फीट लंबी है और इसके मध्य में सोने के अक्षरों में ‘राम’ नाम अंकित है।

अयोध्या का प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर
अयोध्या का प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 09:22 AM
bookmark

UP News : वासंतिक नवरात्र शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या एक और बड़े आध्यात्मिक आयोजन की तैयारी में जुट गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के 19 मार्च को प्रस्तावित अयोध्या दौरे का कार्यक्रम मिल गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति करीब डेढ़ घंटे तक श्रीराम मंदिर परिसर में रुकेंगी और मंदिर के दूसरे तल पर आकार ले रहे राम नाम मंदिर से जुड़े विशेष पूजन अनुष्ठान में भाग लेंगी। माना जा रहा है कि यह दौरा न सिर्फ मंदिर के धार्मिक आयोजनों को नई गरिमा देगा, बल्कि नवरात्र से पहले अयोध्या के आध्यात्मिक वातावरण को भी और अधिक ऊर्जा से भर देगा।

श्रीराम यंत्र स्थापना के पूजन में रहेंगी यजमान

ट्रस्ट के अनुसार 19 मार्च को पूर्वाह्न 11 बजे राम नाम मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना का पूजन निर्धारित है। बताया गया है कि यह यंत्र कांची शंकराचार्य स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती द्वारा पूजित रहा है। इसी अनुष्ठान में राष्ट्रपति मुर्मु यजमान के रूप में शामिल होंगी। इस अवसर पर राष्ट्रपति रजत प्लेट पर स्वर्णांकित ‘राम’ नाम की पट्टिका की भी स्थापना कराएंगी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक यह पट्टिका लगभग साढ़े तीन फीट लंबी है और इसके मध्य में सोने के अक्षरों में ‘राम’ नाम अंकित है। जानकारी के अनुसार यह पट्टिका मुंबई में तैयार की गई थी और अब अयोध्या पहुंच चुकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि के मुताबिक सनातन उपासना परंपरा में साकार और निराकार ब्रह्म दोनों की कल्पना मिलती है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा राम नाम की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि निराकार ब्रह्म के उपासक निर्गुण संत कहलाते हैं और संत कबीरदास इसी परंपरा के प्रमुख संत थे। इसी भावभूमि में राम नाम मंदिर की स्थापना की जा रही है।

दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा संरक्षण

राम मंदिर के दूसरे तल पर “ग्रंथागार” बनाए जाने की चर्चाओं पर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यहां लाइब्रेरी की तरह ग्रंथागार नहीं बनेगा। महंत गिरि के अनुसार योजना प्राचीन काल की हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित करने की है। उन्होंने बताया कि कई लोग पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन पहले विशेषज्ञों की टीम यह जांच करेगी कि संबंधित पांडुलिपि दुर्लभ श्रेणी में आती है या नहीं। इसके लिए विशेषज्ञों के नाम अंतिम रूप दे दिए गए हैं। जहां-जहां से प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना मिलेगी, पहले विवरण जुटाया जाएगा, फिर जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ स्थल पर जाकर प्राचीनता का परीक्षण करेंगे। अनुशंसा के बाद ही पांडुलिपियों को राम मंदिर में संरक्षित किए जाने पर निर्णय होगा। महंत गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि पहले राष्ट्रपति के हाथों परकोटे के मंदिरों में ध्वजारोहण की योजना थी, लेकिन राष्ट्रपति के निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है। उनके अनुसार तय शेड्यूल में ध्वजारोहण के लिए पर्याप्त समय नहीं बच रहा था, इसलिए योजना को फिलहाल ड्रॉप किया गया है।

पूजन में कई प्रमुख हस्तियों को निमंत्रण

ट्रस्ट के मुताबिक राम नाम मंदिर में स्थापना-पूजन के दौरान राष्ट्रपति के साथ कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, कर्नाटक धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी पद्मभूषण वीरेंद्र हेगड़े और केरल की आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) शामिल हैं। UP News

संबंधित खबरें