महिला पदों ने बढ़ाई भाजपा की चिंता, जिला कमेटियों का गठन हुआ मुश्किल

भाजपा ने पहली बार अपने संगठन में एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए तय किए हैं। महिला भागीदारी बढ़ाने की दृष्टि से यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, मगर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यही फार्मूला अब संगठन के लिए नई चुनौती बनता नजर आ रहा है।

महिला पदों पर अटकी भाजपा
महिला पदों पर अटकी भाजपा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Mar 2026 09:40 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी इस समय अपने संगठनात्मक ढांचे को नई धार देने में जुटी है, लेकिन जिला कमेटियों के गठन के दौरान एक ऐसा समीकरण सामने आ गया है, जिसने पार्टी पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा ने पहली बार अपने संगठन में एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए तय किए हैं। महिला भागीदारी बढ़ाने की दृष्टि से यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, मगर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यही फार्मूला अब संगठन के लिए नई चुनौती बनता नजर आ रहा है।

प्रदेश के 94 संगठनात्मक जिलों में नई जिला कार्यकारिणियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। 21 सदस्यीय कमेटी में सात महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। कागज पर यह व्यवस्था जितनी प्रभावशाली दिखाई देती है, जमीन पर उसे लागू करना उतना आसान नहीं पड़ रहा। खासकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय, मजबूत और जिम्मेदारी निभाने वाली महिला कार्यकर्ताओं की तलाश ने पर्यवेक्षकों और जिला स्तर के नेताओं की मुश्किल बढ़ा दी है। कई जिलों में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि तय मानक के मुताबिक ऐसे चेहरों का चयन कैसे हो, जो संगठन से जुड़ाव भी रखते हों और नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम भी हों।

उत्तर प्रदेश में संगठन से महिला सशक्तिकरण का संदेश

भाजपा की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को केवल चुनावी समर्थन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संगठन की निर्णायक भूमिका में भी आगे लाया जाए। वर्ष 2023 में लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद पार्टी अब उसी सोच को अपने संगठनात्मक ढांचे में उतारती दिखाई दे रही है। सदन में 33 फीसदी आरक्षण की नीति को आगे बढ़ाते हुए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में जिला इकाइयों के गठन में भी महिला भागीदारी को अनिवार्य बना दिया है। इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर पर्यवेक्षकों को विस्तृत दिशानिर्देश दिए गए। चयन प्रक्रिया में किन लोगों से राय लेनी है, किस आयु वर्ग को प्राथमिकता देनी है, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन कैसे बनाना है इन सभी बिंदुओं के साथ सबसे महत्वपूर्ण शर्त यही रखी गई कि हर जिला कार्यकारिणी में सात महिलाओं को शामिल करना होगा।

ग्रामीण उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दिक्कत

उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों, नगर इकाइयों और महानगरों में महिला पदाधिकारियों के नाम जुटाना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है, लेकिन ग्रामीण जिलों में स्थिति अलग है। वहां सक्रिय, अनुभवी और संगठन के साथ लगातार जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं की संख्या सीमित बताई जा रही है। यही वजह है कि कई जिलों में महिला प्रतिनिधित्व का लक्ष्य पूरा करना जिला संगठन और पर्यवेक्षकों के लिए कठिन हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लंबे प्रयास के बाद भी सात ऐसे नाम तय नहीं हो सके हैं, जिन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त माना जा सके। इस कारण जिला कमेटियों की सूची को अंतिम रूप देने में देरी की स्थिति भी बन रही है।

सिफारिशों में पुरुषों का पलड़ा अब भी भारी

उत्तर प्रदेश भाजपा के अंदरूनी फीडबैक से यह भी संकेत मिले हैं कि रायशुमारी की प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने अधिकतर पुरुष कार्यकर्ताओं के नाम ही आगे बढ़ाए हैं। इससे साफ है कि संगठन के निचले ढांचे में अब भी पुरुषों की पकड़ ज्यादा मजबूत बनी हुई है। महिला भागीदारी बढ़ाने का राजनीतिक संदेश तो साफ है, लेकिन उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत यह बता रही है कि संगठनात्मक संरचना में इस बदलाव को लागू करने के लिए अभी काफी मेहनत करनी होगी। कई जिलाध्यक्षों का मानना है कि महिलाओं को आगे लाने का फैसला सकारात्मक है, लेकिन उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में जहां स्थानीय राजनीति अब भी पुरुष प्रधान ढांचे में चलती है, वहां अचानक पर्याप्त संख्या में प्रभावशाली महिला चेहरे खोजना आसान नहीं है।

पुरुष कार्यकर्ताओं की बढ़ी बेचैनी

इस बदलाव का असर सिर्फ महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश भाजपा में लंबे समय से जिला कमेटियों में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे पुरुष कार्यकर्ताओं के बीच भी बेचैनी बढ़ी है। एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए तय होने से कई पुराने और सक्रिय पुरुष चेहरों की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में संगठन के भीतर हल्की असहजता और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ती दिख रही हैं। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार के इस नए मॉडल से सामाजिक संतुलन तो मजबूत होगा, लेकिन इसके साथ स्थानीय स्तर पर असंतोष को संभालना भी नेतृत्व के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

महिला प्रतिनिधित्व के लक्ष्य पर कायम पार्टी

जानकारी यह भी है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलाध्यक्षों और पर्यवेक्षकों ने अपनी व्यावहारिक दिक्कतें प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाई हैं। पार्टी की मंशा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की है और इस दिशा में वह पीछे हटती नहीं दिख रही, लेकिन जिन जिलों में ज्यादा परेशानी आ रही है वहां मानकों में सीमित लचीलापन या सूची फाइनल करने के लिए अतिरिक्त समय देने जैसे विकल्पों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में महिला प्रतिनिधित्व के सवाल को केवल औपचारिक निर्णय के रूप में नहीं देख रही। पार्टी इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक संदेश से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। UP News

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उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन विस्तार तेज, नए चेहरों पर जताया भरोसा

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार सामाजिक संतुलन, स्थानीय प्रभाव, युवा भागीदारी और महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देकर यह जताने की कोशिश की है कि संगठन को अब ज्यादा व्यापक, ज्यादा सक्रिय और ज्यादा चुनावी प्रभाव वाला बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा का विस्तार
उत्तर प्रदेश में भाजपा का विस्तार
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Mar 2026 09:20 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश सत्ता में काबिज भाजपा ने ने महानगर कार्यसमिति की नई सूची जारी कर साफ कर दिया है कि उसकी नजर अब अगले बड़े चुनावी पड़ाव पर टिक चुकी है। सोमवार शाम सामने आई इस सूची को केवल संगठनात्मक बदलाव भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीन मजबूत करने की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। मेरठ, अलीगढ़, सहारनपुर और फिरोजाबाद जैसे अहम शहरों में मनोनीत पार्षदों और कार्यसमिति सदस्यों के चयन से यह संकेत मिला है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में शहरी राजनीति को नई धार देने की तैयारी में है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार सामाजिक संतुलन, स्थानीय प्रभाव, युवा भागीदारी और महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देकर यह जताने की कोशिश की है कि संगठन को अब ज्यादा व्यापक, ज्यादा सक्रिय और ज्यादा चुनावी प्रभाव वाला बनाया जा रहा है। मेरठ महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी की अगुवाई में बनी नई टीम में अनुभवी चेहरों के साथ नई ऊर्जा का मिश्रण भी साफ दिखाई देता है।

उत्तर प्रदेश में 2027 की तैयारी का दिखा असर

भाजपा की इस नई महानगर कार्यसमिति को सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश की भावी चुनावी रणनीति के संकेत के रूप में भी समझा जा रहा है। पार्टी ने ऐसे चेहरों को तरजीह दी है, जो लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं, वहीं कई नए नामों को भी आगे लाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि संगठन में कार्यकर्ताओं के लिए अवसर खुले हैं। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में भाजपा की पकड़ और मजबूत करने के लिहाज से मेरठ, सहारनपुर और अलीगढ़ जैसे शहर बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में इन जिलों में की गई नियुक्तियां राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

मेरठ में नए समीकरणों के साथ टीम तैयार

उत्तर प्रदेश के मेरठ में घोषित नई सूची में कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें संगठन ने मनोनीत पार्षद के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। मेरठ में चतर सैन मित्तल, हितेश पाल गढ़रिया, सुरेंद्र पाल सिंह उर्फ गुल्लू ठाकुर, निर्मला लोधी, संजय शर्मा, दीपक गुप्ता, सुनील वर्मा, कमल जाटव, वरिंदर कौर कपूर और ममता त्यागी के नाम पर मुहर लगी है। इन नियुक्तियों को देखकर माना जा रहा है कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक प्रतिनिधित्व के व्यापक फार्मूले पर काम किया है। अलग-अलग वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने अपने राजनीतिक आधार को और व्यापक बनाने की कोशिश की है।

मेरठ महानगर कार्यसमिति में कई चेहरों को मिली जगह

उत्तर प्रदेश के मेरठ महानगर कार्यसमिति सदस्यों की सूची भी काफी लंबी और संतुलित बताई जा रही है। इसमें मीरा सिंह, अचला सिंह, शिप्रा रस्तोगी, अजय भारद्वाज भराला, आलोक रस्तोगी, जयवीर सिंह राणा, गौरव मलिक, ज्योति वाल्मीकि, सरला शर्मा, अशोक सबलोक, नीरज मित्तल, गणेश अग्रवाल, संजय त्रिपाठी, अमित सोलंकी, गीता शर्मा, दीपमाला शर्मा, विनोद उपाध्याय, अमित तोमर, बीना वाधवा, संगीता पंडित, बबीता चौहान, सीमा अग्रवाल, अंकित सिंघल, संजीव रस्तोगी, प्रवेश त्यागी, गौरव मित्तल, अजय त्यागी, रजनी कुशवाह, स्वाति बंसल, मुकेश कुमार धस्माना, इंद्रजीत कोरी, सुनील अग्रवाल, अरविन्द गुप्ता मारवाड़ी, संजीव माहेश्वरी, कोमल लोधी, गिरीश मोहन गुप्ता, उमा चतुर्वेदी, अनिता विद्यार्थी, पीयूष शास्त्री, दीपक शर्मा, प्रवीण शर्मा, मीनल गौतम, ओमकुमार त्यागी, हिमा गौड़, नरेश गुप्ता, मनोज वर्मा, रूप किशोर शर्मा, प्रवेश कुमार गुमी, मुनीष प्रजापति, अरविन्द पिंटू, ममता मित्तल, बीना शर्मा, सरोज जैन, सुनील चड्ढा, महेश बाली, सतीश गर्ग, वकुल रस्तोगी, भावना शर्मा, आशु सिंह, नवीन अरोड़ा, प्रदीप कपूर, हर्ष गोयल, हेमा पंत, रेनू जोगी, राम कुमार चौबे, डॉ. विनय गुप्ता और डॉ. ब्रजेश त्यागी को शामिल किया गया है। इस सूची से यह भी स्पष्ट हो गया है कि भाजपा उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अपने संगठन को बूथ और वार्ड स्तर तक अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

अलीगढ़ में भी सामाजिक संतुलन पर जोर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में भी भाजपा ने 10 नामों पर भरोसा जताया है। यहां सुशीला Rajput, अजीत चौधरी, वेद प्रकाश सिसौदिया, सुभाष बाबू गुप्ता, नीलेश उपाध्याय, विपिन चंचल वाल्मीकी, वीरेंद्र सिंह सविता, अरुण कुमार शर्मा, दिलीप निषाद और गुरुदास प्रजापति को मनोनीत किया गया है। अलीगढ़ की सूची को देखकर माना जा रहा है कि भाजपा ने यहां भी अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह रणनीति पार्टी के लिए आगे चलकर लाभकारी साबित हो सकती है।

सहारनपुर में भाजपा ने इन चेहरों पर जताया भरोसा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पार्टी ने धर्मपाल कश्यप, मुरारी खेलवाल, मनीष सदेवा, शिवमंगल सिंह, राजेश वालिया, जसवीर मोगा, प्रवीण रोहिल्ला, राहुल झाम, निशांत शर्मा और अरुण गुप्ता को मनोनीत किया है। सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक संवेदनशील और प्रभावशाली केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां की गई नियुक्तियां सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर आने वाले समय में स्थानीय राजनीति और चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

फिरोजाबाद में भी 10 नामों को मिली जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में भाजपा ने शिलांत जैन, पंकज अग्रवाल, सूरज पाल, मनोरमा प्रजापति, केशव देव शंखवार, उदय प्रताप सिंह, दिलीप कठेरिया, हरिओम वर्मा, मधुरिमा गुप्ता और निर्मल शर्मा को मनोनीत किया है। फिरोजाबाद की सूची से भी यही संदेश निकलकर सामने आता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को केवल पारंपरिक चेहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।

महिलाओं और युवाओं को आगे लाने की कोशिश

भाजपा की नई महानगर कार्यसमिति में महिलाओं को भी उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व दिया गया है। यह कदम उत्तर प्रदेश की शहरी राजनीति में महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। साथ ही, युवा चेहरों को शामिल कर पार्टी ने यह संकेत भी दिया है कि आने वाले चुनावी दौर में ऊर्जा, सक्रियता और स्थानीय जनसंपर्क को प्राथमिकता दी जाएगी। UP News

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पीएम आवास योजना से कैसे मिलेगा अपना घर? सरकार देती है लाखों की मदद

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार जरूरतमंद लोगों को मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने 16 मार्च को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की पहली किस्त जारी कर दी है, जिससे हजारों पात्र लाभार्थियों को अपना घर बनाने में मदद मिलेगी।

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प्रधानमंत्री आवास योजना
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar16 Mar 2026 07:15 PM
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UP News : अगर आप शहर में रहते हैं और अभी तक आपका खुद का पक्का घर नहीं है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार जरूरतमंद लोगों को मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने 16 मार्च को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की पहली किस्त जारी कर दी है, जिससे हजारों पात्र लाभार्थियों को अपना घर बनाने में मदद मिलेगी। नरेंद्र मोदी सरकार ने जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। सरकार इसके तहत लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का लाभ उन परिवारों को दिया जाता है जिनके पास कहीं भी पक्का मकान नहीं है। इस योजना के तहत मुख्य रूप से तीन वर्गों को शामिल किया गया है: 

* आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग 

* निम्न आय वर्ग 

* मध्यम आय वर्ग 

इन वर्गों के शहरी परिवार इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आय सीमा में किया गया बदलाव

सरकार ने योजना के दूसरे चरण में आय सीमा में भी बदलाव किया है। पहले जहां आय सीमा 3 लाख रुपये तक थी, उसे बढ़ाकर अब 6 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को इस योजना में प्राथमिकता दी जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति को आधिकारिक वेबसाइट पीएमएवाईएमआईएस.जीओवी.इन पर जाकर आवेदन करना होता है।

आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:

1. वेबसाइट पर जाकर राज्य का चयन करें।

2. अपनी आय और श्रेणी से जुड़ी जानकारी भरें।

3. यह जानकारी दें कि आपके पास पक्का घर है या नहीं।

4. आधार नंबर और आधार पर दर्ज नाम भरें।

5. ओटीपी सत्यापन के बाद आवेदन सबमिट करें।

इसके बाद दस्तावेजों की जांच की जाती है। यदि आवेदक पात्र पाया जाता है, तो उसे योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।


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