मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘योगी की पाती’ में पितृ पक्ष, पूर्वजों के सम्मान, बुजुर्गों की सेवा, स्वच्छता, जलभराव रोकने और संचारी रोगों से बचाव का संदेश।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय-समय पर अपनी विशेष पहल ‘योगी की पाती’ के माध्यम से सीधे प्रदेश की जनता से संवाद करते हैं। मुख्यमंत्री की ताजा पाती में इस बार पितृ पक्ष, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, बुजुर्गों के सम्मान, स्वच्छता, जलभराव की रोकथाम और संचारी रोगों से बचाव जैसे विषयों को एक साथ जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में पितृ पक्ष को केवल धार्मिक परंपरा या श्राद्ध-तर्पण तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने पूर्वजों के तप, त्याग, परिश्रम और संस्कारों को याद करने तथा उनकी दी हुई विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पितृ पक्ष हमें यह याद दिलाता है कि आज हम जहां खड़े हैं, उसमें पिछली पीढ़ियों के त्याग और योगदान की बड़ी भूमिका है। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता केवल उन्हें याद करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके संस्कारों और मूल्यों को जीवन में उतारना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने समाज और परिवार को जो विरासत दी है, उसे सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों को उससे अधिक समृद्ध विरासत सौंपना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में आगरा किले से जुड़े शाहजहां और औरंगजेब के ऐतिहासिक प्रसंग का भी उल्लेख किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने भारतीय परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और जल अर्पित करने की भावना को रेखांकित किया। योगी ने बुजुर्गों के सम्मान को भी इसी सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए परिवारों से वृद्धजनों का सम्मान करने तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने की अपील की।
मुख्यमंत्री की इस पाती का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा है। प्रदेश में अक्टूबर महीने में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है, जबकि 12 अक्टूबर से ‘दस्तक अभियान’ शुरू होगा। इसके माध्यम से घर-घर स्वास्थ्य जागरूकता पहुंचाने, बीमारी के लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर और आसपास साफ-सफाई रखने, झाड़ियों को न उगने देने तथा कहीं भी जलभराव न होने देने की अपील की है। उनका संदेश खास तौर पर उन बीमारियों की रोकथाम से जुड़ा है, जिनके फैलने में गंदगी, रुका हुआ पानी और मच्छरों का प्रजनन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
योगी आदित्यनाथ ने लोगों से बुखार जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। उन्होंने बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय से चिकित्सकीय सलाह और उपचार लेने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ चलाए गए अभियानों का उल्लेख करते हुए जनभागीदारी को बीमारी की रोकथाम का महत्वपूर्ण आधार बताया।
‘योगी की पाती’ के इस संस्करण में मुख्यमंत्री का संदेश धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से शुरू होकर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों तक पहुंचता है। एक तरफ उन्होंने लोगों से पूर्वजों और बुजुर्गों के सम्मान तथा संस्कारों को आगे बढ़ाने की अपील की है, वहीं दूसरी तरफ स्वच्छता, जलभराव रोकने और बीमारी के प्रति जागरूक रहने को जनभागीदारी से जोड़ा है। पितृ पक्ष इस वर्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। ऐसे समय में मुख्यमंत्री की पाती का संदेश धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों पर भी केंद्रित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मूल संदेश यही है कि पूर्वजों की विरासत का सम्मान केवल स्मरण से नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने से होगा। इसी जिम्मेदारी का एक हिस्सा अपने आसपास स्वच्छता रखना, जलभराव रोकना और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग करना भी है।
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