उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में फिर गूंजा इस IAS अफसर का नाम

सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 10:52 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश का नाम चर्चा में है। लंबे समय से निलंबित चल रहे 2006 बैच के इस अधिकारी की बहाली को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन वर्ष 2025 में उन पर सोलर परियोजना की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा और सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब, जब अदालत से उन्हें राहत मिली है, तो उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में क्यों फिर चर्चा में आए अभिषेक प्रकाश

अभिषेक प्रकाश की बहाली की चर्चा यूं ही नहीं उठी है। दरअसल, फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया था। अदालत की इस राहत के बाद यह माना जाने लगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अब उनके निलंबन पर पुनर्विचार कर सकती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अभिषेक प्रकाश एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आएंगे। अभी आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन संकेतों ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

क्या था रिश्वत मांगने का आरोप

पूरा मामला 20 मार्च 2025 का है। उसी दिन लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई थी, जो एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए परियोजना लागत का 5 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। मामला गंभीर था, इसलिए सरकार ने तत्काळ कार्रवाई करते हुए अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने उस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और निवेश संबंधी व्यवस्थाओं पर भी कई सवाल खड़े किए थे।

बचाव पक्ष ने क्या कहा

मामले में अभिषेक प्रकाश की ओर से पेश पक्ष ने आरोपों को पूरी तरह कमजोर और अस्पष्ट बताया। उनकी तरफ से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं थे। यह भी दलील दी गई कि न तो किसी तरह की रकम वास्तव में दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई और न ही किसी प्रकार की धमकी या दबाव का प्रमाण सामने आया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस एक करोड़ रुपये नकद की चर्चा की गई, उसकी कोई बरामदगी नहीं हुई। उनकी ओर से इस पूरे विवाद को प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक भ्रम और अपुष्ट आरोपों का परिणाम बताया गया।

हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद बदला माहौल

फरवरी 2026 में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चार्जशीट को साक्ष्य के अभाव में रद्द किया, तब इस मामले का पूरा परिदृश्य बदल गया। अदालत की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। यही कारण है कि अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप सकती है।

कौन हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश

अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 को हुआ था। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों में जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जैसे जिलों में डीएम और कलेक्टर रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने प्रशासनिक और निवेश संबंधी भूमिकाओं में महत्वपूर्ण काम किया। UP News

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लखनऊ में आज कई जगह रूट डायवर्ट, दरोगा भर्ती के लिए कल से चलेंगी बसें

गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर में आयोजित दांडी मार्च के कारण प्रशासन ने कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे हजरतगंज समेत आसपास के इलाकों में सुबह 7 बजे से कार्यक्रम खत्म होने तक रूट डायवर्जन लागू रहेगा।

लखनऊ ट्रैफिक में बड़ा बदलाव
लखनऊ ट्रैफिक में बड़ा बदलाव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Mar 2026 10:38 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इस समय एक बड़ी और अहम अपडेट सामने आई है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर में आयोजित दांडी मार्च के कारण प्रशासन ने कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे हजरतगंज समेत आसपास के इलाकों में सुबह 7 बजे से कार्यक्रम खत्म होने तक रूट डायवर्जन लागू रहेगा। उधर, उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती की लिखित परीक्षा को लेकर भी राजधानी में हलचल बढ़ गई है। हजारों अभ्यर्थियों की आवाजाही को देखते हुए रोडवेज और रेलवे प्रशासन ने विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं, ताकि परीक्षार्थियों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।ं।

दांडी मार्च के चलते बदली ट्रैफिक व्यवस्था

लखनऊ पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब 8:30 बजे जनभवन से लखनऊ विश्वविद्यालय तक दांडी मार्च निकाला जाना प्रस्तावित है। इस आयोजन के कारण हजरतगंज, विधानसभा और आसपास के इलाकों में यातायात पर दबाव बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

इन मार्गों से गुजरेंगे वाहन

डीएसओ चौराहे से आने वाले वाहन अब हजरतगंज और जीपीओ पार्क की ओर न जाकर पार्क रोड या सिसेंडी तिराहे से होकर आगे निकलेंगे। रॉयल होटल चौराहे से विधानसभा और हजरतगंज जाने वाले वाहनों को कैसरबाग चौराहा, सिसेंडी तिराहा या बर्लिंगटन चौराहा की ओर मोड़ा जाएगा। संकल्प वाटिका पुल के नीचे तिराहे और महानगर की तरफ से आने वाले भारी वाहन और सिटी बसें सिकंदरबाग, हजरतगंज और विधानसभा मार्ग की बजाय बैकुंठ धाम, 1090 चौराहा, गांधी सेतु, बंदरियाबाग और लालबत्ती कैंट होकर गुजरेंगी। चारबाग की ओर से केकेसी तिराहे पहुंचने वाली सिटी और रोडवेज बसों को हुसैनगंज, रॉयल होटल और विधानसभा मार्ग के बजाय लोको, कैंट या हुसैनगंज-बर्लिंगटन चौराहे से कैसरबाग की तरफ भेजा जाएगा। बंदरियाबाग चौराहे से राजभवन, डीएसओ, हजरतगंज, जीपीओ और विधानसभा जाने वाले वाहन लालबत्ती चौराहा, कैंट, गोल्फ क्लब, गांधी सेतु और 1090 चौराहे के रास्ते आगे बढ़ सकेंगे।

उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था

उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती की लिखित परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए 13 मार्च से 16 मार्च तक अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। परिवहन निगम ने उन शहरों और जिलों से लखनऊ के लिए बस सेवाएं बढ़ाने का फैसला किया है, जहां से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र राजधानी में बनाए गए हैं।

इन शहरों से बढ़ाई जाएंगी बसें

लखनऊ आने वाले अभ्यर्थियों के लिए कानपुर नगर, कानपुर देहात, सुलतानपुर, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रतापगढ़, ऊंचाहार, फतेहपुर, अयोध्या और गोरखपुर जैसे शहरों से अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत के हिसाब से हर प्रमुख रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अभ्यर्थियों की सहायता के लिए आलमबाग और कैसरबाग बस अड्डों पर हेल्पडेस्क बनाई जाएगी। वहीं, रेलवे प्रशासन भी परीक्षा के दौरान अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में हेल्प डेस्क और होल्डिंग एरिया तैयार किए जाएंगे। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त टिकट काउंटर भी खोले जाएंगे।

मुफ्त बस यात्रा की खबर निकली भ्रामक

उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर मुफ्त बस यात्रा से जुड़ा एक संदेश तेजी से प्रसारित हो रहा है, लेकिन परिवहन निगम ने इसे पूरी तरह गलत बताया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को केवल प्रवेश पत्र दिखाकर रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा कराने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। निगम ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस तरह की भ्रामक सूचनाओं का तत्काल खंडन करने के निर्देश दिए हैं।

परीक्षा केंद्र पर दो घंटे पहले पहुंचना जरूरी

पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के मुताबिक परीक्षा दोनों दिनों में दो-दो पालियों में आयोजित की जाएगी। सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम दो घंटे पहले पहुंचना होगा, ताकि जांच प्रक्रिया समय से पूरी की जा सके। परीक्षा शुरू होने से आधा घंटा पहले प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने साथ प्रवेश पत्र, आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र जैसे ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट, तथा काला या नीला बॉल प्वाइंट पेन लेकर आना होगा।

ये चीजें परीक्षा केंद्र में रहेंगी प्रतिबंधित

परीक्षा केंद्र के अंदर कागज के टुकड़े, पेंसिल बॉक्स, प्लास्टिक पाउच, किसी भी प्रकार का कैलकुलेटर, स्केल, कॉपी, पेन ड्राइव और अन्य प्रतिबंधित सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करते हुए समय से केंद्र पर पहुंचें। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लखनऊ पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक डायवर्जन, बसों की उपलब्धता और अपने परीक्षा केंद्र की जानकारी अच्छी तरह जांच लें। राजधानी में एक तरफ दांडी मार्च और दूसरी तरफ भर्ती परीक्षा को देखते हुए अगले कुछ दिनों तक यातायात और परिवहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव रह सकता है। UP News

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गैस किल्लत के कारण अयोध्या में श्री राम रसोई में भोजन वितरण रोका गया

इन दिनों एलपीजी (रसोई गैस) की कमी महसूस की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, जिसका असर अब भारत के कई शहरों में दिखाई देने लगा है।

ram rasoi
श्री राम रसोई
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 07:25 PM
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UP News : देश के कई हिस्सों में इन दिनों एलपीजी (रसोई गैस) की कमी महसूस की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, जिसका असर अब भारत के कई शहरों में दिखाई देने लगा है। इस वजह से आम लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और सार्वजनिक कैंटीन तक कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई शहरों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। आॅनलाइन बुकिंग सिस्टम सही से काम नहीं कर रहे, इसलिए लोगों को खुद एजेंसी पर जाकर सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर संसद में भी चर्चा हुई और विपक्षी दलों ने लोकसभा में हंगामा किया।

अयोध्या में भोजन सेवा पर असर

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में गैस की कमी का असर धार्मिक और सामाजिक सेवाओं पर भी पड़ा है। राम मंदिर के पास अमावा मंदिर में संचालित श्री राम रसोई में फिलहाल भोजन वितरण रोक दिया गया है, क्योंकि वहां खाना बनाने के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं है। 

नई दिल्ली स्थित दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में भी एलपीजी खत्म हो जाने के कारण मुख्य भोजन (मेन कोर्स) परोसना बंद करना पड़ा है। कैंटीन प्रबंधन का कहना है कि गैस की सप्लाई सामान्य होने तक केवल हल्के खाद्य पदार्थ जैसे सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट ही उपलब्ध रहेंगे।

होटल और रेस्टोरेंट पर भी असर

कई शहरों के होटल और रेस्टोरेंट भी गैस की कमी से जूझ रहे हैं। मुंबई में कुछ होटलों को अपनी कैंटीन बंद करनी पड़ी है या मेनू सीमित करना पड़ा है। चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य क्षेत्रों में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई न मिलने से कई रेस्टोरेंट्स ने अपने कर्मचारियों को छुट्टी दे दी। कुछ होटल मालिकों ने बताया कि गैस बचाने के लिए उन्होंने डोसे की कई किस्मों को मेनू से हटा दिया है और फिलहाल केवल सीमित व्यंजन ही बनाए जा रहे हैं।

ट्रेन में मिलने वाले खाने पर भी पड़ सकता है असर

रेलवे की कैटरिंग सेवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है। रेलवे स्टेशनों की कैटरिंग इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे गैस की कमी को देखते हुए माइक्रोवेव और इंडक्शन कुकटॉप जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर रेडी-टू-ईट भोजन का स्टॉक रखने को भी कहा गया है।

कई शहरों में लंबी कतारें

बिहार, भोपाल और चंडीगढ़ सहित कई जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें देखी गई हैं। सप्लाई कम होने के कारण सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है और लोगों को कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। होटल और रेस्टोरेंट से जुड़े संगठनों ने पैनिक बाइंग से बचने की अपील की है। साथ ही उन्हें इंडक्शन कुकटॉप, हॉट प्लेट और राइस कुकर जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दी गई है ताकि गैस की कमी का असर कुछ हद तक कम किया जा सके। कुल मिलाकर, एलपीजी की सप्लाई में आई कमी ने घरेलू उपयोग के साथ-साथ होटल, कैंटीन और कैटरिंग सेवाओं पर भी दबाव बढ़ा दिया है। स्थिति सामान्य होने तक लोगों और व्यवसायों को वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है।


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