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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपराध के खिलाफ जीरो टोलेरेंस मॉडल की गूँज पूरे देश में गूँज रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ किए जा रहे फूल और हाफ एनकाउंटर के कारण अपराधियों में डर बैठ गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपराध के खिलाफ जीरो टोलेरेंस मॉडल की गूँज पूरे देश में गूँज रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ किए जा रहे फूल और हाफ एनकाउंटर के कारण अपराधियों में डर बैठ गया है। जिस कारण उत्तर प्रदेश में क्राइम का ग्राफ गिर गया है। ये दावा हम यूं ही नहीं कर रहे है बल्कि इस दावे की पुष्टि देशभर में अपराध को लेकर आंकड़े साझा करने वाली संस्था NCRB ने की है। अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले उत्तर प्रदेश को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने एक अलग तस्वीर पेश की है। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर अपराध दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम दर्ज की गई है।
एनसीआरबी के अनुसार, वर्ष 2024 में देशभर में प्रति लाख आबादी पर औसतन 252.3 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 180.2 रहा। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग 28.5 प्रतिशत कम है। इससे स्पष्ट होता है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति अपराध दर अपेक्षाकृत कम रही है, भले ही कुल मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती हो। जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश में कुल अपराधों की संख्या अधिक दर्ज की गई। वर्ष 2024 में राज्य में IPC और BNS के तहत कुल 4,30,552 संज्ञेय अपराध दर्ज हुए। इनमें 2,21,615 मामले IPC और 2,08,937 मामले BNS के तहत दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में 2024 के दौरान प्रति लाख आबादी पर 513 मामले दर्ज किए गए, जो देश में सबसे अधिक अपराध दर है। इसके अलावा तेलंगाना (497.7), हरियाणा (368.5), ओडिशा (366.9) और मध्य प्रदेश (321.6) जैसे राज्यों में भी उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक अपराध दर दर्ज की गई। इसके अलावा महाराष्ट्र, जिसकी जनसंख्या लगभग 13.5 करोड़ है, वहां प्रति लाख आबादी पर करीब 300 मामले दर्ज हुए। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश से अधिक है, जबकि यूपी की आबादी इससे कहीं ज्यादा है। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक रही, जहां प्रति लाख आबादी पर 1,258.5 मामले दर्ज किए गए। यह देश में सबसे ऊंची अपराध दर मानी गई है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भी उत्तर प्रदेश में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम रही थी। उस वर्ष देश का औसत 448.3 था, जबकि यूपी में यह 335.3 दर्ज किया गया था, जो राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत से अधिक कम था।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पुलिसिंग सुधार, तकनीकी निगरानी, और संगठित अपराध पर सख्त कार्रवाई का असर इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में चार्जशीट दाखिल करने की दर 76.7 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 75.6 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि दर्ज मामलों में बड़ी संख्या में मामलों में समय पर कार्रवाई की गई है।
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