मौसम विभाग का अलर्ट : उत्तर प्रदेश में 2026 की गर्मी तोड़ सकती है रिकॉर्ड

मार्च के पहले सप्ताह से ही गर्मी की औपचारिक शुरुआत हो सकती है। अप्रैल में तापमान 40 डिग्री के आसपास और मई-जून में 45 डिग्री से ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही है। इस बार हीटवेव के दिन अधिक और लंबे हो सकते हैं।

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भीषण गर्मी का असर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 06:10 PM
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UP News : मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह से ही गर्मी की औपचारिक शुरुआत हो सकती है। अप्रैल में तापमान 40 डिग्री के आसपास और मई-जून में 45 डिग्री से ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही है। इस बार हीटवेव के दिन अधिक और लंबे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एल-नीनो की स्थिति मजबूत बनी रहती है तो प्रदेश में लू और भीषण गर्मी का असर ज्यादा समय तक रह सकता है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित होगा।

यूपी के सबसे गर्म जिले कौन से?

बांदा कई बार प्रदेश का सबसे गर्म जिला दर्ज किया जा चुका है। सूखी जलवायु, कम हरियाली और राजस्थान से आने वाली गर्म हवाओं के कारण यहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। झांसी भी गर्मी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। अनुमान है कि होली से पहले ही तापमान 32 डिग्री तक पहुंच सकता है।

आगरा और प्रयागराज में हीट आइलैंड का असर

ताज नगरी आगरा में कंक्रीट संरचनाओं के कारण अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। वहीं प्रयागराज में भी लू के थपेड़े अक्सर जनजीवन को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों की कटाई, सूखते जलस्रोत, बढ़ती आबादी, कंक्रीट का फैलाव और वाहनों की संख्या में वृद्धि तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। शहरी इलाकों में रात के समय भी गर्मी से राहत कम मिल रही है।


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उत्तर प्रदेश के इस शहर में औद्योगिक क्रांति की तैयारी, 1000 हेक्टेयर में बसेगा औद्योगिक क्षेत्र

मैनपुरी जिले में औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 1000 हेक्टेयर भूमि पर नया औद्योगिक गलियारा स्थापित किया जाएगा।

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औद्योगिक गलियारा स्थापित किया जाएगा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 05:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 1000 हेक्टेयर भूमि पर नया औद्योगिक गलियारा स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करना है।

भूमि अधिग्रहण और रजिस्ट्री प्रक्रिया

भोगांव और किशनी तहसीलों में भूमि चिन्हित की गई है। प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए लेखपालों को निर्देश दिए हैं कि किसानों और भूमि मालिकों को तहसील में बुलाकर रजिस्ट्री पूरी करवाई जाए। इस कदम से परियोजना की शुरुआत शीघ्र होने की उम्मीद है।

एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी

यह एक्सप्रेसवे इटावा के कुदरैल से हरदोई के कौसिया तक विस्तृत होगा। मैनपुरी जिले में इसके तहत लगभग 30 किलोमीटर लंबी सिक्सलेन सड़क बनायी जाएगी। बेहतर सड़क संपर्क जिले को प्रदेश के अन्य औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों से जोड़ देगा, जिससे निवेश और व्यवसायिक गतिविधियों में वृद्धि संभव होगी।

औद्योगिक गलियारे का महत्व

इस औद्योगिक क्षेत्र के माध्यम से मैनपुरी के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को बाजार में बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित औद्योगिक केंद्रों में प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित गतिविधियाँ संचालित होंगी। इससे लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद मैनपुरी में औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि जिले की आर्थिक समृद्धि में भी योगदान मिलेगा। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र आकर्षक बन जाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। संक्षेप में, यह परियोजना मैनपुरी जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना रोजगार, निवेश और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ करेगी।



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चर्चित शंकराचार्य के साथ CBI के अफसर की मुलाकात से मचा हड़कंप

सब जानते हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरूद्ध बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। ताजा मुलाकात के कारण उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar25 Feb 2026 05:32 PM
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UP News : चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मीटिंग से हडक़ंप मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ CBI के अफसर की यह मुलाकात बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। सब जानते हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 36 का आंकड़ा चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरूद्ध बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। ताजा मुलाकात के कारण उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हलकों में हडक़ंप मचा हुआ है।

सामान्य नहीं है शंकराचार्य तथा CBI अफसर की मुलाकात

उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आश्रम स्थापित है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थापित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम का नाम श्री विद्या मठ है। मंगलवार को अचानक CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव उत्तर प्रदेश के श्री विद्या मठ में पहुंचे जहां श्री राव तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एकांत कमरे में 25 मिनट तक  मुलाकात की। यह मुलाकात उत्तर प्रदेश के राजनैतिक तथा प्रशासनिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। इस मुलाकात को लेकर शुरूआत में खबर आई थी कि यह शिष्टाचार भेंट हो सकती है। बाद में पता चला कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की यह मुलाकात बहुत ही महत्वपूर्ण है।

CBI के पूर्व डायरेक्टर कर रहे हैं शंकराचार्य मामले की गुप्त जांच

चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा CBI के पूर्व डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव की मुलाकात का सच जानने के बाद पता चला है कि CBI से रिटायर्ड होने के बाद एम. नागेश्वर राव ने एक निजी जांच एजेंसी बना रखी है। यह जांच एजेंसी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कर रही है। इसी जांच के सिलसिले में एम. नागेश्वर राव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विस्तार से बातचीत की। जांच का फोकस इस बात पर है कि 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन परिस्थितियां क्या थीं, शंकराचार्य की परंपरागत पालकी यात्रा को क्यों रोका गया, पुलिस और प्रशासन की भूमिका क्या रही और किस बिंदु पर विवाद बढ़ता चला गया। टीम यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि परंपरा और प्रशासनिक निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति कैसे बनी। जानकारी के मुताबिक, एम.नागेश्वर राव की टीम ने इस पूरे मामले में प्रयागराज प्रशासन से पालकी यात्रा की अनुमति, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किए गए नोटिस और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर जानकारी मांगी है। इसके साथ ही टीम उस दिन मौके पर मौजूद रहे पत्रकारों, पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी बातचीत करने की तैयारी कर रही है।

शंकराचार्य के चेले ने कर दिया बड़ा दावा

इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिष्य रह चुके आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जल्द ही जेल में जाना पड़ेगा। इस दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी तथा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों के बीच विवाद भी बढ़ता जा रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लोगों ने आशुतोष ब्रह्मचारी को पुराना अपराधी बताया है। अपराधी बताये जाने पर आशुतोष ब्रह्मचारी ने पलटवार किया है तथा कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कुछ भी कर लें उन्हें जेल जाने से कोई भी नहीं बचा सकता।

अपराधी होने के दावे को बताया फर्जी

आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपराधी होने के आरोपों को फर्जी करार दिया है। एक बयान में आशुतोष ने चुनौती दी है कि स्वामी कोई भी ऐसा अदालती सबूत पेश करें जो उन्हें अपराधी साबित करे। आशुतोष का कहना है कि उनके खिलाफ 21 मुकदमों की जो लिस्ट वायरल की गई है, वह पूरी तरह फर्जी है और पुलिस ने भी ऐसी किसी सूची की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद पीडि़त नहीं बल्कि केवल एक 'सूचनाकर्ता' हैं जो बटुकों (बच्चों) को न्याय दिलाना चाहते हैं। बातचीत के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तुलना 'कालनेमी' से की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी एक डिप्टी सीएम के इशारे पर माघ मेले में धरने पर बैठे थे, जिसकी जांच के लिए डीजीपी को पत्र भेजा गया है। आशुतोष ने घोषणा की है कि वे जल्द ही 'सनातन न्याय यात्रा' निकालेंगे ताकि स्वामी की असलियत जनता के सामने ला सकें। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ गवाहों को डराया जा रहा है और झूठी साजिशें रची जा रही हैं।

13 मार्च को अदालत में होगा आमना-सामना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा आशुतोष ब्रह्मचारी का आमना-सामना 13 मार्च को उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में हो सकता है। आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को एडीजे पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्वामी मुकुंदानंद के वकील ने 104 पेज का एफिडेविट दाखिल किया। इसमें आशुतोष पर 27 मुकदमें होने का दावा करते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा-22 और 23 के तहत कार्रवाई की मांग की गई। आरोप है कि आशुतोष ने पीडि़तों की पहचान सार्वजनिक की है। वहीं आशुतोष ने इन दावों को झूठा बताते हुए कोर्ट से मोहलत मांगी है और 'इन पर्सन' यानी खुद बहस करने की इच्छा जताई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च के बाद होगी।

उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा पर लगाया बड़ा आरोप

इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में वाराणसी के एडीशनल पुलिस कमिश्नर तथा IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा की भी एंट्री हो गई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के विरूद्ध बड़ा आरोप लगाया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा उनको झूठे मामले में फंसाने के लिए साजिश कर रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने आरोप के समर्थन में कहा है कि उनके विरूद्ध शिकायत करने वाला आशुतोष ब्रह्मचारी उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा का चेला है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक तस्वीर भी जारी की है। उस तस्वीर में IPS  अधिकारी अजय पाल शर्मा शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते हुए नजर आ रहे हैं।

शिकायतकर्ता के साथ IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के पुराने रिश्ते

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केक काटने वाली फोटो जारी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारी के पुराने रिश्ते हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। पुलिस वर्तमान में पॉक्सो एक्ट के तहत मामले की जांच तेज कर चुकी है। अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जारी की गई तस्वीर में 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक प्लास्टिक के स्टूल पर केक काटते दिख रहे हैं। स्वामी का आरोप है कि शिकायतकर्ता आशुतोष शामली के कांधला का रहने वाला है और अजय पाल शर्मा भी वहां एसपी रह चुके हैं। उनके अनुसार, यह तस्वीर दोनों के बीच पुराने और करीबी रिश्तों को दर्शाती है। इसी आधार पर अब प्रयागराज पुलिस द्वारा की जा रही पोक्सो एक्ट की एफआईआर और पूरी जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं।


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