
उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक फिजा में अप्रत्याशित बदलाव के संकेत दिए हैं। बद्रीनाथ जैसे परंपरागत भाजपा गढ़ में करारी शिकस्त और लैंसडाउन विधायक महंत दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत की हार ने साफ कर दिया है कि जनता अब जमीनी मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा जता रही है, न कि सिर्फ पार्टी पहचान पर। 358 जिला पंचायत सीटों में से अब तक घोषित 205 सीटों में कांग्रेस 76, भाजपा 58 और निर्दलीय उम्मीदवार 61 सीटों पर विजयी हुए हैं। यह स्थिति न केवल सत्ता दल के लिए चिंता का विषय है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में उभरते स्वतंत्र चेहरों की स्वीकार्यता को भी दर्शाती है। Uttarakhand Panchayat Elections 2025
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बद्रीनाथ इलाका पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार यहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इससे बड़ा झटका शायद ही कोई हो सकता है कि खुद प्रदेश अध्यक्ष के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा की पकड़ ढीली पड़ी हो। वहीं चमोली जिले की 26 सीटों में से भाजपा को केवल 4 पर संतोष करना पड़ा, जबकि 17 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों को चौंका दिया है।
लैंसडाउन से भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत की कांग्रेस उम्मीदवार ज्योति पटवाल के हाथों पराजय भाजपा के लिए प्रतीकात्मक और सियासी रूप से बड़ा झटका मानी जा रही है। पौड़ी जिले की कुल 38 सीटों में से भाजपा ने 18 सीटें भले ही जीती हों, लेकिन बड़े नेताओं के परिवारों की हार से पार्टी की अंदरूनी रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नैनीताल, बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। बागेश्वर की 19 सीटों में भाजपा ने 9, कांग्रेस ने 6 और निर्दलीयों ने 4 सीटों पर कब्जा जमाया। अल्मोड़ा में भी कोई दल स्पष्ट बहुमत नहीं पा सका – कांग्रेस 21, भाजपा 19 और निर्दलीय 5 सीटों पर सफल रहे। इससे साफ है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक होगी।
उत्तरकाशी जनपद में भी भाजपा को करारा झटका लगा है। 28 में से सिर्फ 7 सीटें पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को मिलीं। जबकि कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों और निर्दलीयों ने 21 सीटों पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि यहां की 28 में से 15 सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर महिला सशक्तिकरण की मजबूत झलक दी है।
राज्य के लगभग हर जिले में निर्दलीयों की उपस्थिति केवल संख्या में नहीं, बल्कि प्रभाव में भी भारी रही। देहरादून की 30 सीटों में से 10 पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि बाकी पर भाजपा (13) और कांग्रेस (7) ने जीत दर्ज की। अब जब जिला पंचायत अध्यक्षों के चयन की बारी आएगी, तो ये निर्दलीय ही सियासी संतुलन तय करेंगे। Uttarakhand Panchayat Elections 2025