
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने के बाद उत्पन्न जलप्रलय ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार दोपहर लगभग दो बजे आई इस प्राकृतिक आपदा में जहां अब तक 5 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, वहीं सेना के 11 जवान अब भी लापता हैं। राहत की बात यह है कि अब तक करीब 190 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। Uttarkashi Cloudburst
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के उप महानिरीक्षक (ऑपरेशंस) मोहसिन शहेदी के अनुसार, सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। लेकिन ऋषिकेश-उत्तरकाशी हाईवे पर भूस्खलन के कारण मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध है, जिससे NDRF की तीन टीमें अब तक घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं। देहरादून से एयरलिफ्ट के जरिए टीमें भेजने की योजना भी खराब मौसम के चलते विफल हो गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अब तक 190 लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें से 120 लोगों को सेना ने दाईं ओर से जबकि 70 लोगों को बाईं ओर से सुरक्षित निकाला। हर्षिल में हेलीपैड पानी में डूब गया है और कई पुल एवं मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। क्षेत्र में बिजली और संचार व्यवस्था भी ठप हो चुकी है। सरकार सेना और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुटी हुई है, लेकिन लगातार बिगड़ता मौसम गंभीर चुनौती बना हुआ है।
DIG शहेदी ने बताया कि गंगनानी में स्थित वैली ब्रिज, जो गंगोत्री और हर्षिल को जोड़ता था, बाढ़ की चपेट में आकर बह गया है। जब तक इस पुल का पुनर्निर्माण नहीं होता, वाहनों के ज़रिए राहत सामग्री धराली तक पहुंचाना असंभव है। वर्तमान में NDRF के जवानों को पहाड़ियों के रास्ते पैदल ही गंगनानी की ओर भेजा गया है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भटवाड़ी के दो अलग-अलग स्थानों पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। वहां चट्टानों और भारी मलबे का गिरना जारी है, जिससे मार्ग के पुनर्निर्माण में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भी हालात चुनौतीपूर्ण रहे। यहां किन्नौर कैलाश यात्रा पर गए 413 श्रद्धालु बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंस गए थे। ITBP ने साहसिक प्रयास करते हुए ‘ट्रवर्स क्रॉसिंग’ तकनीक का इस्तेमाल कर सभी श्रद्धालुओं को रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाला। धराली के ऊपर बनी एक अस्थायी झील को लेकर चिंता जताई जा रही थी, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि उसका जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है और वर्तमान में उससे कोई खतरा नहीं है।
मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों तक और अधिक बारिश की चेतावनी दी है। इस कारण थराली तक वाहनों की आवाजाही भी पूरी तरह बंद है। ऐसे में राहत एवं बचाव कार्यों के समक्ष अब भी कठिन चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनका सामना प्रशासन युद्धस्तर पर कर रहा है। Uttarkashi Cloudburst