मजबूत होता है प्रतिरक्षा तंत्र योग और मेडिटेशन से

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इन दिनों की बात करें तो हम देख रहे हैं कि महामारी की समस्या भयंकर रूप धारण किए हुए हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने  प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाकर रखे। अगर हमारा प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत रहेगा तो कोई भी जीवाणु, विषाणु इत्यादि उस पर प्रहार तो करेगा परंतु हमारा मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र उसे नष्ट कर देता है। किसी भी स्वस्थ व्यक्ति की पहचान इसी से होती है कि उसका प्रतिरक्षा तंत्र कितना मजबूत है अर्थात रोगों से लड़ने की क्षमता उसके अंदर किस हद तक है। 
अब क्योंकि बच्चों और बुजुर्गों में ये क्षमता कम होती है। इसलिए उन्हें कोई भी रोग उउन्हें जल्दी घेर लेता  है। इसलिए ऐसे समय में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने साथ साथ अपने  परिवार का भी ध्यान रखें। यजुर्वेद में लिखा है कि योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल कर ही परम सिद्धियों को प्राप्त किया जा सकता है।
सुबह सुबह योग करने से मनुष्य की सभी तंत्र एवं कोशिकाएं भलिपूर्वक अपना कार्य करने लगती है।  
मेडिटेशन अर्थात ध्यान शरीर के लिए अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति दिन भर न जाने कितने ही ख्यालों को अपने अंदर समाहित करते जाता है। और ऐसे में जब दिमाग के अंदर विचारों की बाढ़ आ जाता है। तब जरूरी है कि अपने मन को बिल्कुल शांत अवस्था में लाकर किसी ऐसी वस्तु का या स्वयं ईश्वर का ध्यान करें जो कि मन को आत्मा शांति प्रदान करती हो।
प्राचीन काल में वेदों और पुराणों में भी योग और मेडिटेशन को बहुत ही महत्व दिया गया था। कोई भी साधु सन्यासी बिना ध्यान या मेडिटेशन के परम सिद्धियों को प्राप्त नहीं कर सकता था।
तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि एक व्यक्ति के जीवन में योग और मेडिटेशन की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
ध्यान (मेडिटेशन )
ध्यान या मेडिटेशन एक ऐसी  मानसिक स्थिति है जिसमें मनुष्य अपने समस्त इंद्रियों को एकाग्रचित  करने की कोशिश करता है. जिससे उसके अंतर्मन में विचारों का जो समुंदर हिलोरे मार रहा है उसमें स्थिरता आये और मनुष्य का मन शांति की अवस्था को प्राप्त करे
योगा या प्राणायाम
योग और प्राणायाम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। अच्छा खान पान और योग ही मनुष्य को आरोग्यता का वरदान देता है। योग में ऐसे बहुत से आशन होते है जो की हमारे स्वास, उदर, फेफड़े, आंतो के कार्यो को सुचारू रूप से चलने के लिए प्रेरित करते है। 
मत्स्यासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, उत्कटासन, सुखासन
आदि कुछ ऐसे आशन है जो की शरीर में  रक्त स्त्राव ,तंत्रिकातंत्र, हार्मोन स्त्रावण , प्रतिरक्षा तंत्र, विषाक्त पदार्थो के वहन हेतु आवश्यक माने गए है। इसलिये जरुरी है कि अपने दिनचर्या में इन सभी आशनो को शामिल किया जाए और एक स्वस्थ्य शरीर का निर्माण किया जाए।