दुर्गा मां की मूर्ति बनाने मे 10 तरह की मिट्टी का इस्तेमाल क्यों किया जाता है ?
Navratri 2023
भारत
चेतना मंच
18 Oct 2023 10:21 PM
Navratri 2023 : नवरात्रि का त्योहार भारतवर्ष मे हिंदुओं का प्रमुख पर्व है । कहा जाता है कि नवरात्र, संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ है 'नौ रातों का समय'। नवरात्रि साल मे दो बार आती है । यह चंद्र-आधारित हिंदू महीनों में चैत्र, और अश्विन (क्वार) प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। चैत्र मास में वासंतिक अथवा वासंतीय और दूसरा अश्विन मास में शारदीय नवरात्र। शारदीय नवरात्र का समापन दशहरा को दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के रूप में होता है।
दुर्गा प्रतिमा का निर्माण पूरे देश मे होता है । लेकिन बंगाल मे बनने वाली मूर्ती खास होती है । इसके पीछे की वजह उसके बनने की प्रक्रिया और प्रतिमा में प्रयोग की जाने वाली मिट्टी है। तो आइए जानते हैं कि क्यों है बंगाल की दुर्गा मूर्ति इतनी खास और कहां से मूर्ति की मिट्टी लाई जाती है?
बंगाली पूजा परंपरा के अनुसार नवरात्र के छठे दिन मा दुर्गा की पूजा शुरु की जाती है । पश्चिम बंगाल मे प्रथा है कि मूर्ति को बनाने के लियें राजमहल, वेश्यालय, वाल्मीकि के घर समेत 10 जगहों की मिट्टी की जरूरत पड़ती है। 8 तरह के जल से रोज स्नान कराया जाता है। ये परंपरा पश्चिम्बंगाल मे शुरु हुई और आज कल के इस आधुनिकता के दौर मे भी पूरा किया जाता है ।
मूर्ति को बनाने के लियें मिट्टी कितने प्रकार की:
1 गंगा की मिट्टी जो की किनारे से ली जाती है ।2 हाथी दाँत से छुई मिट्टी।3 सूअर के दाँत से छुई मिट्टी।4 चौराहे की मिट्टी।5 वैश्यालय की मिट्टी।6 राजदरबार की मिट्टी ।7 नदी के दोनों छोर की मिट्टी।8 झील की मिट्टी।9 दलित के घर की मिट्टी।10 पर्वत से लायी गई मिट्टी ।
बंगाली परंपरा के अनुसार दुर्गा प्रतिमा के निर्माण मे इस सभी प्रकार की मिट्टी का इस्तेमाल करना इसलिये जरुरी जिससे समाज के सभी वर्ग की पूजा मे हिस्सेदारी हो और सभी को समानता मिले। उनका कहना है कि ये त्यौहार मनाने का प्रमुख कारण ये भी है की सभी वर्ग के लोंगो को रोजगार मिलें । पंडाल सजाने वाले हो ,मूर्ति बनाने वाले हों या फिर ढ़ाक बजाने वाले हो,सभी को मां की सेवा का अधिकार मिलें ।
दशकर्मा स्टोर पर मिलता है सब सामान
समय के साथ आये बदलाव में आजकल किसी के पास समय ना होने के कारण 10 तरह की मिट्टी और 8 प्रकार का जल जिससे मां को स्नान कराया जाता है यह सब दशकर्मा स्टोर पर मिलता है जो की दिल्ली मे है । दुर्गा पूजा के समान के लियें ये वन स्टॉप शॉप कही जाती हैं । अष्टमी की पूजा की विधि महत्त्वपूर्ण होती है । इस दिन कन्या भोग भी लगाया जाता है । इसी दिन संधि पूजा भी होती है जिसमे 108 दियें जलाते हैं । पहले इस दिन जानवर की बली दी जाती थी परंतु अब कद्दू को काट कर यह रिवाज पूरा किया जाता है ।
इन सभी बातों के पीछे एक ही बात है कि सभी लोग कोलकाता से दूर रह कर भी पारंपरिक तरीके से अपना त्यौहार मनाते है ।
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