नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है? जानिए नरकासुर वध की पौराणिक कथा, यम दीपदान, अभ्यंग स्नान की परंपरा और पूजा विधि का धार्मिक महत्व।

Narak Chaturdashi 2026 : दीपावली का पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला खुशियों, आस्था और परंपराओं का महापर्व है। इसी पर्व का एक महत्वपूर्ण दिन है नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, मृत्यु के भय से मुक्ति और जीवन में स्वच्छता एवं सकारात्मकता का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। वहीं, एक अन्य परंपरा में इस दिन यमराज के नाम दीपदान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यही वजह है कि छोटी दिवाली पर घरों में दीप जलाने, स्नान करने, पूजा-पाठ और यम दीपदान की परंपरा निभाई जाती है।
• चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे से
• चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे तक
• अभ्यंग स्नान का मुहूर्त: 8 नवंबर 2026 को सुबह 05:41 बजे से सुबह 06:38 बजे तक (अवधि: 57 मिनट)
• यम दीपदान / हनुमान पूजा / काली चौदस (प्रदोष काल/निशिता काल के अनुसार): 7 नवंबर 2026 की शाम और रात्रि को
यह भी पढ़ें : धनतेरस 2026: सोना-चांदी खरीदने से लेकर लक्ष्मी-कुबेर पूजा तक, जानिए इस पर्व का खास महत्व
नरक चतुर्दशी दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। इसे छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन से ही घरों में दीपोत्सव की रौनक शुरू हो जाती है। लोग अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, दीपक जलाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक दृष्टि से नरक चतुर्दशी का अर्थ है नरक के भय से मुक्ति की कामना करना। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कई क्षेत्रों में इसे रूप चौदस भी कहते हैं। वहां सूर्योदय से पहले स्नान और शरीर पर उबटन लगाने की परंपरा प्रचलित है।
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर ने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने अनेक राजाओं की कन्याओं को बंदी बना लिया था और तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध किया और नरकासुर का वध कर दिया। मान्यता है कि नरकासुर के बंदीगृह से हजारों महिलाओं को मुक्त कराया गया। इस विजय को अन्याय, अहंकार और अत्याचार पर धर्म की जीत के रूप में देखा जाता है। इसी प्रसंग के कारण नरक चतुर्दशी को बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम दीपदान करने की परंपरा भी विशेष रूप से प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-शांति और अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। कई परिवारों में यह दीपक शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर या निर्धारित स्थान पर जलाया जाता है। मान्यता है कि दीपदान से जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है। यह परंपरा मनुष्य को जीवन की अनिश्चितता का स्मरण कराने के साथ दूसरों के प्रति करुणा और सद्भाव रखने का संदेश भी देती है।
छोटी दिवाली पर सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसे नरक स्नान भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शरीर पर तेल लगाकर उबटन से स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को आरोग्य एवं सौंदर्य का आशीर्वाद मिलता है। अभ्यंग स्नान के दौरान शरीर पर तेल लगाकर स्नान किया जाता है। कई परिवारों में स्नान के लिए पारंपरिक उबटन का इस्तेमाल भी किया जाता है। इसे केवल शारीरिक स्वच्छता ही नहीं, बल्कि तन और मन को नई ऊर्जा देने वाली परंपरा के रूप में भी देखा जाता है।
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस कहने के पीछे भी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने, शरीर पर उबटन लगाने और स्वयं को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे रूप और सौंदर्य में निखार आता है। हालांकि, इस परंपरा का संदेश केवल बाहरी सुंदरता तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली को भी बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है। जिस तरह दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी तरह अच्छे विचार जीवन से नकारात्मकता दूर करने का माध्यम बन सकते हैं।
नरक चतुर्दशी पर पूजा-पाठ और दीपदान के लिए परिवार अपनी परंपराओं के अनुसार विधि अपनाते हैं। सामान्य रूप से इन बातों का ध्यान रखा जाता है:
विज्ञापन