Andal Jayanthi 2023: जानें क्यों मनाई जाती हैं अंदल जयंती और इसके पीछे की कथा
Andal Jayanthi 2023
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:55 AM
Andal Jayanthi 2023: aadi pooram festival celebrated in which state भारत के दक्षिण प्रांत में मनाया जाने वाला अंदल जयंती पर्व भक्त और भगवान के मिलन का बेहद अनुपम संगम दर्शाता है. तमिल पर्व अंदल जयंती इस वर्ष 22 जुलाई 2023 के दिन मनाई जएगी. अंदल जयंती को आदि पूरम या आंडाल जयंती भी कहा जाता है. यह पर्व एक विशेष संप्रदाय द्वारा मनाया जाने वाला विशेष उत्सव है. यह पर्व देवी लक्ष्मी के अवतार देवी अंडाल को समर्पित त्यौहार है जो दस दिनों तक मनाया जाता है. इस समय पर श्री विष्णु एवं लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष विधान रहा है. आदि पूरम तमिल पंचांग के आदि महीने के दौरान मनाया जाता है इस कारण से यह आदि पुरम कहलाता है. आदि पुरम का अर्थ आदि नामक माह से है और पुरम का अर्थ पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र से लिया गया है.
aadi pooram significance आदि पूरम का पर्व देवी अंडाल के भगवान रंगनाथन के साथ विवाह का समय होता है. आदि पूरम का दिन देवी शक्ति के दिन के रूप में भी मनाया जाता है. लोक मान्यताओं एवं धार्मिक आधार पर ऐसा माना जाता है कि देवी स्वयं इस शुभ दिन पर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं.
क्यों मनाई जाती है अंदल जयंती
वैष्णव परंपरा के बारह आलवार संतों में से एक संत आंडाल हुई हैं जिन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. जिस प्रकार मीरा का नाम कृष्ण भक्ति से जुड़ा है उसी प्रकार आण्डाल भी श्री विष्णु के रंगनाथन स्वरुप की परम भक्त थी और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु को अपने प्रिय के रूप में चुना. देवी अंडाल के जन्मोत्सव एवं भगवान के साथ उनके विवाह की परंपरा का निर्वाह ही अंदल जयंती के रुप में हर वर्ष किया जाता है.
Andal Jayanthi 2023 आदि पूरम का महत्व
दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला यह पर्व देश ओर दुनिया के समक्ष भक्ति का विशिष्ट रुप भी है. श्री रंगनाथ को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना गया है और इन्हीं के साथ अंदल का संबंध इस पर्व का मुख्य केन्द्र बिंदु है. यह भक्ति धारा पूरे दक्षिण भारत में व्यापक है. विशेष रुप से तमिलनाडु में भगवान विष्णु के निमित्त आदि पूरम का उत्सव बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसी के साथ देवी शक्ति मंदिरों में भी यह उत्सव अत्यधिक महत्व रखता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार इस समय पर ही देवी शक्ति ने अपना नारीत्व प्राप्त किया था. इसलिए शक्ति मंदिरों में इस शुभ अवसर पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं
Andal Jayanthi 2023 आदि पूरम के पीछे की पौराणिक कथा
आदि पुरम के संदर्भ में कई कथाएं प्रचलित हैं जिसमें से एक के अनुसार एक आलवार सन्त परंपरा में पेरियालवार नामक आलवार को भगवान के आशीर्वाद से एक कन्या को पाते है और कन्या का नाम आंडाल रखा जाता है. कन्या आण्डाल भगवान विष्णु की भक्ति में डूबी रहती थी. भगवान के लिए आंडाल जब माला बनाती तो सर्वप्रथम उस माला को स्वयं पहन कर देखती और उसके पश्चात भगवान को वही माला पहनाती थी. एक दिन, जब पेरियालवार ने आंडाल को अपनी माला को भगवान को पहनाते देखा तो उन्हें ऎसा करने से मना किया. उसी रात भगवान ने पेरियालवार को स्वप्न में दर्शन दिए और कहा की वह आंडाल के माला पहने के पश्चात ही माला को धारण करना चाहते हैं. इस घटना के बाद पेरियालवार ने आंडाल को नहीं टोका और आंडाल की भक्ति को अपनाया. आंडाल ने श्री विष्णु को अपना प्रिय माना और उनके लिए अनेकों भक्ति गीतों की रचना की. मान्यताओं के अनुसार आंडाल भगवान में विलिन हो गई थीं, इसी कारण से उनके साथ विवाह उत्सव के रुप में यह पर्व आज भी भक्तों द्वारा मनाया जाता है.
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