Saturday, 18 May 2024

Sawan 2023 : क्यों लगाया जाता है त्रिपुंड तिलक ? जानिए इसका वैज्ञानिक महत्व

Sawan 2023 : मित्रों सावन मास में शिवालयों पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है ऐसे में अधिकतर…

Sawan 2023 : क्यों लगाया जाता है त्रिपुंड तिलक ? जानिए इसका वैज्ञानिक महत्व

Sawan 2023 : मित्रों सावन मास में शिवालयों पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है ऐसे में अधिकतर भक्तों के माथे पर ‘त्रिपुंड’ लगा हुआ दिखाई देता है ये ‘त्रिपुंड’ चंदन के लेप, रोरी,भस्म, बेलपत्र इत्यादि प्राकृतिक संपदाओं से मिलकर तैयार किया जाता है।


Sawan 2023  ‘त्रिपुंड’ तिलक का महत्व

शिव पुराण में बताया गया है कि त्रिपुंड की तीनों रेखाओं में से प्रत्येक के नौ नौ देवता हैं, जो सभी अंगों में स्थित हैं। त्रिपुंड की पहली रेखा में प्रथम अक्षर अकार, गार्हपत्य अग्नि, पृथ्वी, धर्म, रजोगुण, ऋृग्वेद, क्रियाशक्ति, प्रात:सवन तथा महादेव 9 देवता होते हैं। दूसरी रेखा में प्रणव का दूसरा अक्षर उकार, दक्षिणाग्नि, आकाश, सत्वगुण, यजुर्वेद, मध्यंदिनसवन, इच्छाशक्ति, अंतरात्मा तथा महेश्वर ये 9 देवता हैं। तीसरी रेखा के 9 देवता प्रणव का तीसरा अक्षर मकार, आहवनीय अग्नि, परमात्मा, तमोगुण, द्युलोक, ज्ञानशक्ति, सामवेद, तृतीयसवन तथा शिव हैं।


Sawan 2023  वैज्ञानिक महत्व

वहीं इसके वैज्ञानिक महत्व की बात करें तो माथे पर जहां त्रिपुंड धारण किया जाता है वह पीनियल ग्रन्थि का स्थान होता है। पीनियल ग्रंथि (जिसे पीनियल पिंड, एपिफ़ीसिस सेरिब्रि, एपिफ़ीसिस या “तीसरा नेत्र” भी कहा जाता है) पृष्ठवंशी मस्तिष्क में स्थित एक छोटी-सी अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह सेरोटोनिन व्युत्पन्न मेलाटोनिन को पैदा करती है, जोकि जागने/सोने के ढर्रे तथा मौसमी गतिविधियों का नियमन (रेगुलेशन) करने वाला हार्मोन है। चंदन का त्रिपुंड लगाने से पीनियल ग्रन्थि के दोष समाप्त हो जाते हैं। पीनियल ग्रन्थि के दोष ज्यादातर ऐसे लोगों में पाए जाते हैं जो तनाव की स्थिति में और मौसम के विरुद्ध संघर्ष करते हैं।

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