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नारियल से बना गुड़ व उसके फायदे :
दक्षिण भारत में नारियल की पैदावार सबसे अधिक होती है। यही कारण है कि दक्षिण भारत में नारियल से बना गुड़ अधिक प्रयोग किया जाता है। इससे बना गुड़ गहरे भूरे रंग का एवं पिरामिड के आकार का होता है। नारियल के गुड़ को किण्वन विधि द्वारा नहीं बनाया जाता है। नारियल में उपस्थित शर्करा क्रिस्टल के आकार की होती हैं, जिसके कारण इससे बना गुड़ थोड़ा सख्त होता है। इस गुड़ में उपस्थित विशेष पोषक तत्व इसे और भी अधिक सेहतमंद बना देते हैं। इस गुड़ में फॉस्फोरस, कैल्शियम, लौह तत्व, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे कई आवश्यक खनिज लवण, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं, जो कि हमारे शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
आयुर्वेद के अनुसार यह गुड़ खांसी-जुकाम जैसे रोगों में एक अच्छा घरेलू नुस्खा है। इसमें उपस्थित खनिज लवण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही गुड़ में जीवाणुरोधी क्षमता होने के कारण ये जीवाणुओं से होने वाले संक्रमण से भी शरीर की रक्षा करता है।
खजूर से बना गुड़:
यह मुख्यत: भारत के पूर्वी उप्र राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड आदि में बनाया जाता है। इसे खजूर के गुड़ के अलावा 'पाताली गुड़ के नाम से भी जाना जाता है। यह गुड़ खजूर के पेड़ से निकलने वाले रस से बनाया जाता है। इसे बनाने का तरीका भी गन्ने के गुड़ के ही समान होता है। इसे बनाने के लिए खजूर के रस को तब तक उबाला जाता है, जब तक वह गाढ़ा न हो जाए। खजूर से तैयार किये जाने वाले गुड़ का रंग गहरा भूरा, काफी हद तक गहरे चॉकलेट के रंग जैसा होता है। इस गुड़ की सबसे खास बात ये है कि यह मुंह में डालते ही घुल जाता है। यह स्वाद में मीठा होता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य कृषि संगठन द्वारा प्रकाशित एक शोध लेख के अनुसार खजूर के रस में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन 'बी, 'सी लौह तत्व और कैल्शियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं।
पश्चिम बंगाल में ताड़ का गुड़ :
इसका वृक्ष देखने में काफी हद तक कृषि संगठन नारियल के वृक्ष की तरह ही होता है। लेकिन, नारियल के वृक्ष से काफी अलग होता है। इसे करुपट्टी भी कहा जाता है। यह गुड़ आमतौर पर सख्त होता है, जो तुरंत घुल नहीं सकता है। इसके रस को भी अन्य रसों की तरह ही उबालकर गाढ़ा किया जाता है। इसके बाद उससे गुड़ बनाया जाता है। यह धूमिल सफेद से लेकर हल्के पीले सफेद रंग का होता है। इसका स्वाद कुछ—कुछ चॉकलेट जैसा होता है। यह स्वाद में गन्ने के रस से बने गुड़ से अधिक मीठा होता है। स्वाद में अच्छा होने के साथ ही यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी माना जाता है । ताड़ के गुड़ में पर्याप्त मात्रा में विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, कई फायदेमंद पोषक तत्व जैसे-ग्लूकोज, फ्रक्टोज, सुक्रोज आदि मौजूद होते हैं। विभिन्न खनिज लवण जैसे- कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व, पोटेशियम, मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इस गुड़ की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि इसकी निर्माण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इसके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।
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गुड़ का उद्यम
चीनी की अपेक्षा गुड़ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा माना गया है। ऐसे लोग जिन्हें चीनी खाना ज्यादा पसंद नहीं है या फिर चीनी का विकल्प ढूंढ रहे हैं, उनके लिए गुड़ एक अच्छा विकल्प है। आजकल होने वाले फायदों को ध्यान में रखकर मिठाइयों, बेकरी, कन्फेक्शनरी के अलावा दवाओं में भी इसका उपयोग बहुत तेजी से किया जा रहा है। फलस्वरूप गुड़ की मांग में काफी वृद्धि हो गयी है। इस बदलाव के कारण छोटे एवं मध्यम किसान गुड़ बनाकर अधिक से अधिक लाभ कमा सकते हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक स्टार्टअप योजना भी शुरू की है। किसान इस योजना का लाभ उठाकर गुड़ उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते है एवं गुड़ उद्यमी बन सकते हैं।
गुड़ उद्यम एक बहुत ही अच्छा रोजगार है। इससे बेरोजगारी भी समाप्त हो जाती है। भारत सरकार के कृषि एवं प्रसंस्करित खाद्व उत्पादन निर्यात विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में भारत द्वारा विदेशों को 341.355.34 मौट्रिक टन गुड़ और गुड़ से बने उत्पादों का निर्यात किया या जिससे लगभग 1633.64 करोड़ रुपये का शुद्व लाभ प्राप्त हुआ। यह है कि भारत केवल चीनी में ही नहीं अपितु गुड़ में भी बड़ा निर्यातक बन चुका है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गन्ने से संबंधित सभी शोध संस्थानों तथा राज्य सरकारों द्वारा गन्ना किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं पर कार्य चल रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग कमीशन भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार की योजनानुसार, गन्ना पेराई के लिए कोल्हू खरीदने तथा गुड़ इकाई स्थापित करने के लिए आर्थिक अनुदान दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में प्रथम है। यहां पर छोटी-बड़ी कुल 10,000 से ज्यादा गुड़ इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। आधुनिक गुड़ उत्पादन इकाई को बहुत अच्छी तरह से सोच समझकर बनाया गया है, जिसमें चिमनी से कम धुआं निकलता है एवं प्रदूषण भी कम होता है। एशिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक जिला मुजफ्फरनगर है। यहां लाखों किसान गुड़ उत्पादन का कार्य करते हैं। भाकृअनुप- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ भी विगत कई वर्षों से गुड़ बनाने के लिए किसानों को अनवरत प्रशिक्षण देने के काम में लगा हुआ है। यह उन स्थानों के किसानों के लिए वरदान समान है, जिन स्थानों पर चीनी मिलें बंद हो चुकी है। ऐसे क्षेत्रों के बेरोजगार युवक गुड़ उत्पादन का उद्यम करके अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं तथा अपने जीवन में मिठास ला सकते हैं।