क्या दिल्ली की हवा लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है ? राजधानी में सर्दी की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया।

Delhi News : देश की राजधानी दिल्ली में सर्दी की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो गई है। शुक्रवार सुबह कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया। रोहिणी में AQI 476, आईआईटी दिल्ली में 473, पंजाबी बाग में 466 और जहांगीरपुरी में 460 तक पहुंच गया। हवा की बिगड़ती गुणवत्ता के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राजधानी में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू हैं, लेकिन इसके बावजूद वायु गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। हालात को देखते हुए निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर भी अस्थायी रोक लगाई गई है।
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दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। रोहिणी में AQI 476 और आईआईटी दिल्ली में 473 दर्ज किया गया। वहीं पंजाबी बाग में 466 तथा जहांगीरपुरी में 460 का स्तर सामने आया। इसके अलावा आरके पुरम में 446, मुद्रिका में 441, विवेक विहार में 439, सोनिया विहार में 438, अलीपुर में 438, नरेला में 438 और ओखला फेज-2 में 431 AQI दर्ज किया गया।
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राजधानी के कई अन्य क्षेत्रों में भी वायु प्रदूषण का स्तर 400 के पार रहा। पड़पड़गंज में AQI 423, पूसा में 420, नॉर्थ कैंपस (दिल्ली विश्वविद्यालय) में 429, सिरीफोर्ट में 431, मंदिर मार्ग पर 412 और नेहरू नगर में 361 दर्ज किया गया। इसी तरह आईटीओ में 424, नजफगढ़ में 417, जेएनयू में 409, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 423, मथुरा रोड पर 409, द्वारका सेक्टर-8 में 418 और बवाना में 430 AQI दर्ज किया गया। कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन वहां भी हवा की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं थी। आनंद विहार में AQI 359, अशोक विहार में 360, नांगलोई में 360, बदरपुर में 352 और बुराड़ी में 376 दर्ज किया गया।
दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए GRAP-2 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इसके बावजूद राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं दिख रहा है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम में बदलाव, हवा की गति और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों जैसे कारकों की भूमिका हो सकती है।
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए 5 नवंबर से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर रोक लगाई गई है। इस प्रतिबंध का असर राजधानी में चल रही निर्माण परियोजनाओं और विकास कार्यों पर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में मौसम और हवा की स्थिति में कितना सुधार होता है। फिलहाल दिल्लीवासियों के लिए साफ हवा में सांस लेना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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