दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के बाद भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्या राजधानी में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के साथ नहीं होना चाहिए ?
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Delhi News : दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग के लिए सरकारी ऐप शुरू होने के बाद राजधानी की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। नागरिकों के एक वर्ग का कहना है कि सरकार को डिजिटल सुविधाओं का विस्तार सबसे पहले आम आदमी की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहिए। ऐसे समय में जब स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आपातकालीन सुविधाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बनी हुई हैं, शराब की ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था को प्राथमिकता देना आखिर किस तरह की शासन व्यवस्था का संकेत है? चेतना मंच ने दिल्ली के अनेक नागरिकों से बातचीत की। बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने शराब की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा पर नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि सरकार की तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल आम नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए अधिक प्रभावी ढंग से क्यों नहीं किया जा रहा है। नागरिकों की इन प्रतिक्रियाओं में दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी सरकार के प्रति निराशा भी दिखाई दी। Delhi News
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दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) के प्रबंधन ने दिसंबर 2024 में ऐप विकसित करने की मंजूरी दी थी। इसके बाद 2 जनवरी 2025 को ऐप बनाने के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया गया और आवश्यक परीक्षणों के बाद नवंबर 2025 में इसे शुरू किया गया। निगम के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य शराब की खुदरा बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना, डिजिटल भुगतान की सुविधा देना और ग्राहकों को किसी विशेष ब्रांड की शराब खरीदने के लिए प्रेरित किए जाने की शिकायतों पर अंकुश लगाना है। यह समय-सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐप को विकसित करने की मंजूरी पिछली सरकार के कार्यकाल में दी गई थी, जबकि इसकी शुरुआत बाद में हुई। इसलिए इस फैसले की राजनीतिक जिम्मेदारी पर चर्चा करते समय मंजूरी, विकास और संचालन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखना जरूरी है। Delhi News
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दिल्ली के नागरिकों की नाराजगी का प्रमुख कारण यह है कि डिजिटल शासन का लाभ आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, सरकारी स्कूलों में समय पर किताबें, जरूरतमंद मरीजों के लिए एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच जैसे विषय सीधे जनहित से जुड़े हैं। चेतना मंच से बातचीत में कई नागरिकों ने सवाल किया कि यदि सरकारी व्यवस्था शराब की उपलब्धता जांचने, बुकिंग करने और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर सकती है, तो इसी तरह की डिजिटल सुविधाओं को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और बेहतर क्यों नहीं बनाया जा सकता? हालांकि, शराब बुकिंग ऐप शुरू होने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि दिल्ली में दवाइयों, किताबों या एंबुलेंस की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इन सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित विभागों के आंकड़ों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए। लेकिन नागरिकों की यह मांग स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकताओं में जनहित की बुनियादी सुविधाओं को सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिए। Delhi News
चेतना मंच से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े एक पुराने कार्यकर्ता ने भी इस विषय पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाजपा से लोगों को अपेक्षा थी कि वह दिल्ली में ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करेगी, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और आम नागरिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना था कि दिल्ली में शराब की दुकानों के विस्तार और अब ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा से यह सवाल पैदा होता है कि सरकार अपनी प्राथमिकताएं किस आधार पर तय कर रही है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि जनहित से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और शराब की बिक्री को सुविधाजनक बनाने वाली व्यवस्थाएं अधिक चर्चा में रहीं, तो इससे भाजपा के समर्थकों और आम नागरिकों में निराशा बढ़ सकती है। इस कार्यकर्ता की टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह असंतोष केवल विपक्षी दलों तक सीमित होने के बजाय सरकार से अपेक्षा रखने वाले लोगों के बीच भी मौजूद होने का संकेत देती है। हालांकि, इसे पूरे संगठन या सभी भाजपा समर्थकों की राय नहीं माना जा सकता। Delhi News
दिल्ली में शराब का मुद्दा पहले भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के समय नई आबकारी नीति को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगे थे। इस मामले में जांच, गिरफ्तारियों और कानूनी कार्यवाही ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अब शराब की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा सामने आने के बाद कुछ नागरिक पुरानी शराब नीति से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि राजनीतिक दलों को शराब से संबंधित फैसलों में जनहित, पारदर्शिता और सामाजिक प्रभाव का विशेष ध्यान नहीं रखना चाहिए क्या? हालांकि, मौजूदा ऐप को पिछली आबकारी नीति के विवादों के समान मानना उचित नहीं होगा। दोनों के संदर्भ और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अलग हैं। ऐप को लेकर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में पारदर्शिता और ब्रांड चयन की स्वतंत्रता को इसका उद्देश्य बताया गया है। Delhi News
शराब की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि फिलहाल यह सुविधा घर पर शराब पहुंचाने की व्यवस्था नहीं है। ग्राहक ऐप पर उपलब्ध ब्रांड और स्टॉक की जानकारी देखकर बुकिंग तथा डिजिटल भुगतान कर सकते हैं, लेकिन उन्हें चुने हुए सरकारी बिक्री केंद्र पर जाकर शराब प्राप्त करनी होगी। यह सुविधा DSIIDC के 208 शराब बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध बताई गई है। दिल्ली की चार सरकारी निगमों द्वारा संचालित शराब की दुकानों की कुल संख्या 700 से अधिक है। ऐप का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहक की उम्र कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए तथा निर्धारित आबकारी नियम लागू रहेंगे। इस प्रकार सरकार की ओर से इसे शराब की बिक्री में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने की पहल बताया जा रहा है, जबकि आलोचकों का सवाल है कि डिजिटल शासन की ऐसी ही गंभीरता आम नागरिकों की जरूरी सेवाओं में भी दिखाई देनी चाहिए। Delhi News
दिल्ली के नागरिकों की अपेक्षा है कि सरकार केवल नई डिजिटल सुविधाएं शुरू करने तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी बताए कि अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक संसाधनों, एंबुलेंस सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में क्या सुधार हुआ है। शराब की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर उठी बहस का वास्तविक केंद्र यही है कि सरकार विकास और डिजिटल सुविधा के नाम पर किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है। किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल नई योजनाओं या ऐप की संख्या से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से होना चाहिए। चेतना मंच से बातचीत में सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि शराब की बुकिंग के लिए डिजिटल सुविधा शुरू होने के बाद भी नागरिकों की अपेक्षाएं स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी हुई हैं। दिल्ली सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह इन सवालों का जवाब अपने काम और ठोस परिणामों के माध्यम से दे। Delhi News े:
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