दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा और बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने इतनी सख्ती क्यों दिखाई ? क्या वाहनों पर प्रतिबंध और निर्माण कार्यों पर रोक जैसे पुराने उपाय अब प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं ?

Delhi News: दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदूषण के गंभीर होते हालात पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वाहनों पर प्रतिबंध और निर्माण कार्यों पर रोक जैसे पुराने उपाय अब पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि दिल्ली में हर तरह का टैलेंट है, इसलिए यहां प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने नियमों से आगे बढ़कर प्रभावी कदम उठाने होंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण और दिल्ली-एनसीआर में भारी यातायात जाम पर चिंता जताई। पीठ ने अधिकारियों से पूछा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जमीन पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लगातार चर्चा और बयानबाजी के बावजूद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 तक पहुंच रहा है।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने प्रदूषण की गंभीरता बताते हुए कहा कि लोग बेहद खराब परिस्थितियों में रह रहे हैं। उन्होंने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि प्रदूषण के कारण आवाज तक प्रभावित हो रही है और ऐसा महसूस होता है जैसे लोग रोजाना 30 सिगरेट के बराबर धुआं अपने शरीर में ले रहे हों। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बारिश का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि इसकी वजह से सिगरेट की संख्या कुछ कम हुई है। सुनवाई के दौरान पराली जलाने, कूड़ा जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं को प्रदूषण के प्रमुख कारणों के रूप में उठाया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की बढ़ती संख्या और भारी ट्रैफिक जाम पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण की प्रमुख वजहों में शामिल है। बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक की स्थिति में प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। सुनवाई में यह मुद्दा भी उठा कि केवल पराली जलाने को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि 5 नवंबर को प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं के साथ कूड़ा जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी नियंत्रण जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बड़ी कारों और वाहनों के कारण आम लोगों, खासकर गरीबों को होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि दिवाली ऐसा समय होता है, जब गरीब तबके के लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, लेकिन बड़ी गाड़ियों के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अदालत ने किसानों को पराली जलाने के आर्थिक नुकसान के बारे में जागरूक करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उसका मानना था कि जब किसान इसके नुकसान को समझेंगे, तो वे खुद ही पराली जलाने से बचने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने पर सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए स्कूलों में कक्षाएं बंद करने की मांग वाली याचिका का मुद्दा भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में विशेषज्ञों की राय के आधार पर फैसला किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। इसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।े
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