उत्तर प्रदेश का कुख्यात 'डॉक्टर डेथ' गिरफ्तार, हत्या के बाद मगरमच्छों को खिलाता था शव
UP News
दिल्ली
चेतना मंच
21 May 2025 06:15 PM
UP News : जरा सोचिए एक आदमी जो डॉक्टर की पढ़ाई कर लोगों की जान बचाने की कसम खाकर निकला था लेकिन कुछ ही सालों में 100 से ज़्यादा हत्याएं कर चुका है और यही नहीं, 125 से ज़्यादा किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाला ऐसा रैकेट चलाता था जिसमें इंसान की जान से ज़्यादा पैसा मायने रखता था। जी हां, ये कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में राजस्थान के दौसा से उत्तर प्रदेश के 67 वर्षीय देवेंद्र शर्मा उर्फ 'डॉक्टर डेथ' को गिरफ्तार किया है। जब इस डॉक्टर की हकीकत सामने आई तो अच्छे-अच्छों के होश उड़ गए।
कैसे बना डॉक्टर से हत्यारा?
जानकारी के मुताबिक, देवेंद्र कुमार शर्मा उर्फ 'डॉक्टर डेथ' उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला है जिसने बिहार से BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा) की पढ़ाई की और 1984 में पढ़ाई पूरी कर राजस्थान के दौसा में 'जनता क्लीनिक' के नाम से अपना अस्पताल खोला। लेकिन 1990 के दशक के मध्य से, देवेंद्र ने चिकित्सा को छोड़ अपराध की राह पकड़ ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सीरियल किलिंग की खौफनाक कहानी
पुलिस की पूछताछ में देवेंद्र ने खुद बताया कि 50 हत्याओं के बाद उसे गिनती भी याद नहीं रही कि उसने कितने लोगों को मारा। वह टैक्सी या ट्रक बुक करता फिर चालकों की हत्या कर उनके शवों को हजारा नहर (कासगंज) में फेंक देता जहां मगरमच्छ उन्हें खा जाते थे। शव मिलने का कोई सबूत न रहे इसलिए यह ‘नेचुरल डिस्पोजल सिस्टम’ उसकी अपराधी सोच का हिस्सा बन गया।
125 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट
डॉ. ने खुलासा किया कि, वर्ष 1998 में उसकी मुलाकात डॉ. अमित से हुई। अमित ने इसकाे किडनी डोनर लाने के लिए कहा। एक डोनर से इसको 5 से 7 लाख रुपये देने की बात हुई। वह बिहार, बंगाल और नेपाल के गरीब लोगों को लालच देकर डॉ. अमित के पास लाता था। इन लोगों ने 1998 से 2004 के बीच 125 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर दिए। 2004 में देवेंद्र और अमित गुरुग्राम में किडनी रैकेट मामले में गिरफ्तार हो गए।
पहले फर्जी गैस एजेंसी के नाम पर करता था ठगी
करीब 11 साल डॉक्टरी करने के दौरान इससे टावर लगवाने के नाम पर 11 लाख रुपये ठग लिए गए। उसके बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में वह फर्जी गैस एजेंसी के नाम पर ठगी करता था। बाद में उसने अपना गैंग बना लिया। वह टैक्सी और ट्रक को बुक कराकर चालकों की हत्या करने के बाद उनके शवों को ठिकाने लगा देता था। उनकी टैक्सी व ट्रक को अच्छे दामों में ग्रे मार्केट में बेच देता था।
2004 में पहली बार गिरफ्तारी हुई
कहा जा रहा है कि, 2004 में कई संगीन आरोपों में पहली बार देवेंद्र की गिरफ्तारी हुई और वह जेल गया। लेकिन 2023 में पैरोल पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया और पुलिस को चकमा देता रहा। जब तक कि 2025 में दौसा से दोबारा गिरफ्त में नहीं आ गया। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी के बाद न सिर्फ पुराने अनसुलझे केस खुलेंगे, बल्कि अंडरग्राउंड क्राइम नेटवर्क की परतें भी खुलेंगी। दिल्ली पुलिस ने इसे बड़ी कामयाबी बताया है और कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।