नमाज़-ए-तरावीह कैसे करें मुकम्मल? यहां है 10 अहम सूरतें
रमज़ान के पवित्र महीने में तरावीह की नमाज़ का खास महत्व होता है। तरावीह नमाज़ ईशा के बाद पढ़ी जाती है और इसमें 20 रकात होती हैं। इस नमाज़ में कुरान की तिलावत की जाती है और अलग-अलग सूरतें पढ़ी जाती हैं। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि तरावीह में कौन-कौन सी 10 सूरतें पढ़ी जाती हैं।

रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास माना जाता है। यह वो महीना है जब अल्लाह की रहमत और बख्शिश सबसे ज्यादा बरसती है। इस महीने में इंसान अपने दिल और इरादों को साफ करता है और सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है। रोज़ा रखने के अलावा रमज़ान में तरावीह की नमाज़ पढ़ना भी बेहद अहम माना जाता है। तरावीह नमाज़ ईशा के बाद अदा की जाती है और इसमें कुल 20 रकात होती हैं। हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। तरावीह की नमाज़ का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसमें कुरान की तिलावत की जाती है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही इसे पढ़ सकते हैं लेकिन पुरुषों के लिए इसे इमाम के साथ मस्जिद में पढ़ना और कुरान की तिलावत सुनना जरूरी माना जाता है। वहीं, महिलाएं घर पर भी 10 या 20 रकात में तरावीह पढ़ सकती हैं। चलिए जानते हैं नमाज़-ए-तरावीह में कौन-कौन सी सूरतें पढ़ सकते हैं।
सूरह नास
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल् आऊज़ु बिरब्बिन-नास। मलिकिन-नास। इलाहिन-नास। मिन शर्रिल वसवासिल ख़न्नास। अल्लज़ी युवस्सिवु फी सुदूरिन-नास। मिनल जिन्नति वन्नास।
सूरह कुरैश
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
ली इलाफि क़ुरैश। इलाफिहिम रिह्लताश शीत्वा वास-साफ़़। फलय’बुदु राब्बा हाज़ाल-बैत। अलज़ी अता’हुम मन्ना हुम वस्सलाम।
सूरह फील
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
अलम तरा कैफ़ फ़अ'ला रब्बुक़ बिअअशाबी अल-फील। अलज़ी अजला क़यदहुम फ़ी त़ुल्लीहिम। वजअला अम्बालहुम रज़्मा। फी अह़लीहिम क़बरम। फजअलहुम क़ईदं हुम फरक़ा
सूरह कौसर
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
इन्ना अअतैना कल कौसर। फसल लि लि रब्बि क वन हर। इन न शानि अ क हुवल अबतर।
सूरह काफिरून
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल या अय्युहल काफ़िरून। ला अ’अबुदु मा ता’अबुदून। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। वला अना आबिदुम मा अबद्तुम। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। लकुम दीनुकुम वलिय दीन।
सूरह इखलास
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल हुवल्लाहु अहद। अल्लाहुस्समद। लम यलिद वलम यूलद। वलम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
सूरह फलक
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल अऊजू बि रब्बिल फलक। मिन शर्रि मां खलक। वमिन शर्रि ग़ासिक़ीन इज़ा वक़ब। व् मिन शर्रिन नफ्फ़ा साति फिल उक़द। व् मिन शर्रि हासिदीन इज़ा हसद।
सूरह नस्र
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
इज़ा जा-अ नसरुल्लाहि वल फत्ह। व रअयतन्नासा यदखुलूना फी दीनिल्लाहि अफवाजा। फसब्बिह बिहम्दि रब्बिका वसतग़फिरह। इन्नहू काना तव्वाबा।
सूरह माऊन
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
अरा-अयतल्लज़ी युकज्जिबु बिद्दीन। फज़ालिकल्लज़ी यदउअुल यतीम। वला यहुद्दु अला तआमिल मिस्कीन। फवैलुल्लिल मुसल्लीन। अल्लज़ीना हुम अन सलातिहिम साहून। अल्लज़ीना हुम युरा-ऊन। वयम्नऊना अल माऊन। लहबसद।
सूरह लहब
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
तब्बत यदा अबी लहबिव्-व तवब। मा अग़ना अन्हु मालुहू वमा कसब। सयस्ला नारन ज़ात लहब। वम्रअतूहू हम्मालतल हतब। फी जीदिहा हबलुम मिम मसद।
रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास माना जाता है। यह वो महीना है जब अल्लाह की रहमत और बख्शिश सबसे ज्यादा बरसती है। इस महीने में इंसान अपने दिल और इरादों को साफ करता है और सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है। रोज़ा रखने के अलावा रमज़ान में तरावीह की नमाज़ पढ़ना भी बेहद अहम माना जाता है। तरावीह नमाज़ ईशा के बाद अदा की जाती है और इसमें कुल 20 रकात होती हैं। हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। तरावीह की नमाज़ का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसमें कुरान की तिलावत की जाती है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही इसे पढ़ सकते हैं लेकिन पुरुषों के लिए इसे इमाम के साथ मस्जिद में पढ़ना और कुरान की तिलावत सुनना जरूरी माना जाता है। वहीं, महिलाएं घर पर भी 10 या 20 रकात में तरावीह पढ़ सकती हैं। चलिए जानते हैं नमाज़-ए-तरावीह में कौन-कौन सी सूरतें पढ़ सकते हैं।
सूरह नास
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल् आऊज़ु बिरब्बिन-नास। मलिकिन-नास। इलाहिन-नास। मिन शर्रिल वसवासिल ख़न्नास। अल्लज़ी युवस्सिवु फी सुदूरिन-नास। मिनल जिन्नति वन्नास।
सूरह कुरैश
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
ली इलाफि क़ुरैश। इलाफिहिम रिह्लताश शीत्वा वास-साफ़़। फलय’बुदु राब्बा हाज़ाल-बैत। अलज़ी अता’हुम मन्ना हुम वस्सलाम।
सूरह फील
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
अलम तरा कैफ़ फ़अ'ला रब्बुक़ बिअअशाबी अल-फील। अलज़ी अजला क़यदहुम फ़ी त़ुल्लीहिम। वजअला अम्बालहुम रज़्मा। फी अह़लीहिम क़बरम। फजअलहुम क़ईदं हुम फरक़ा
सूरह कौसर
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
इन्ना अअतैना कल कौसर। फसल लि लि रब्बि क वन हर। इन न शानि अ क हुवल अबतर।
सूरह काफिरून
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल या अय्युहल काफ़िरून। ला अ’अबुदु मा ता’अबुदून। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। वला अना आबिदुम मा अबद्तुम। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। लकुम दीनुकुम वलिय दीन।
सूरह इखलास
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल हुवल्लाहु अहद। अल्लाहुस्समद। लम यलिद वलम यूलद। वलम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
सूरह फलक
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
कुल अऊजू बि रब्बिल फलक। मिन शर्रि मां खलक। वमिन शर्रि ग़ासिक़ीन इज़ा वक़ब। व् मिन शर्रिन नफ्फ़ा साति फिल उक़द। व् मिन शर्रि हासिदीन इज़ा हसद।
सूरह नस्र
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
इज़ा जा-अ नसरुल्लाहि वल फत्ह। व रअयतन्नासा यदखुलूना फी दीनिल्लाहि अफवाजा। फसब्बिह बिहम्दि रब्बिका वसतग़फिरह। इन्नहू काना तव्वाबा।
सूरह माऊन
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
अरा-अयतल्लज़ी युकज्जिबु बिद्दीन। फज़ालिकल्लज़ी यदउअुल यतीम। वला यहुद्दु अला तआमिल मिस्कीन। फवैलुल्लिल मुसल्लीन। अल्लज़ीना हुम अन सलातिहिम साहून। अल्लज़ीना हुम युरा-ऊन। वयम्नऊना अल माऊन। लहबसद।
सूरह लहब
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
तब्बत यदा अबी लहबिव्-व तवब। मा अग़ना अन्हु मालुहू वमा कसब। सयस्ला नारन ज़ात लहब। वम्रअतूहू हम्मालतल हतब। फी जीदिहा हबलुम मिम मसद।












