नमाज़-ए-तरावीह कैसे करें मुकम्मल? यहां है 10 अहम सूरतें

रमज़ान के पवित्र महीने में तरावीह की नमाज़ का खास महत्व होता है। तरावीह नमाज़ ईशा के बाद पढ़ी जाती है और इसमें 20 रकात होती हैं। इस नमाज़ में कुरान की तिलावत की जाती है और अलग-अलग सूरतें पढ़ी जाती हैं। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि तरावीह में कौन-कौन सी 10 सूरतें पढ़ी जाती हैं।

Taraweeh Surah
तरावीह की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दस सूरतें
locationभारत
userअसमीना
calendar19 Feb 2026 03:21 PM
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रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास माना जाता है। यह वो महीना है जब अल्लाह की रहमत और बख्शिश सबसे ज्यादा बरसती है। इस महीने में इंसान अपने दिल और इरादों को साफ करता है और सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है। रोज़ा रखने के अलावा रमज़ान में तरावीह की नमाज़ पढ़ना भी बेहद अहम माना जाता है। तरावीह नमाज़ ईशा के बाद अदा की जाती है और इसमें कुल 20 रकात होती हैं। हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। तरावीह की नमाज़ का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसमें कुरान की तिलावत की जाती है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही इसे पढ़ सकते हैं लेकिन पुरुषों के लिए इसे इमाम के साथ मस्जिद में पढ़ना और कुरान की तिलावत सुनना जरूरी माना जाता है। वहीं, महिलाएं घर पर भी 10 या 20 रकात में तरावीह पढ़ सकती हैं। चलिए जानते हैं नमाज़-ए-तरावीह में कौन-कौन सी सूरतें पढ़ सकते हैं।

सूरह नास

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

कुल् आऊज़ु बिरब्बिन-नास। मलिकिन-नास। इलाहिन-नास। मिन शर्रिल वसवासिल ख़न्नास। अल्लज़ी युवस्सिवु फी सुदूरिन-नास। मिनल जिन्नति वन्नास।


सूरह कुरैश

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

ली इलाफि क़ुरैश। इलाफिहिम रिह्लताश शीत्वा वास-साफ़़। फलय’बुदु राब्बा हाज़ाल-बैत। अलज़ी अता’हुम मन्ना हुम वस्सलाम।


सूरह फील

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

अलम तरा कैफ़ फ़अ'ला रब्बुक़ बिअअशाबी अल-फील। अलज़ी अजला क़यदहुम फ़ी त़ुल्लीहिम। वजअला अम्बालहुम रज़्मा। फी अह़लीहिम क़बरम। फजअलहुम क़ईदं हुम फरक़ा


सूरह कौसर

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

इन्ना अअतैना कल कौसर। फसल लि लि रब्बि क वन हर। इन न शानि अ क हुवल अबतर।


सूरह काफिरून

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

कुल या अय्युहल काफ़िरून। ला अ’अबुदु मा ता’अबुदून। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। वला अना आबिदुम मा अबद्तुम। वला अन्तुम आबिदूना मा अ’अबुद। लकुम दीनुकुम वलिय दीन।


सूरह इखलास

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

कुल हुवल्लाहु अहद। अल्लाहुस्समद। लम यलिद वलम यूलद। वलम यकुल्लहू कुफुवन अहद।


सूरह फलक

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

कुल अऊजू बि रब्बिल फलक। मिन शर्रि मां खलक। वमिन शर्रि ग़ासिक़ीन इज़ा वक़ब। व् मिन शर्रिन नफ्फ़ा साति फिल उक़द। व् मिन शर्रि हासिदीन इज़ा हसद।


सूरह नस्र

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

इज़ा जा-अ नसरुल्लाहि वल फत्ह। व रअयतन्नासा यदखुलूना फी दीनिल्लाहि अफवाजा। फसब्बिह बिहम्दि रब्बिका वसतग़फिरह। इन्नहू काना तव्वाबा।


सूरह माऊन

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

अरा-अयतल्लज़ी युकज्जिबु बिद्दीन। फज़ालिकल्‍लज़ी यदउअुल यतीम। वला यहुद्दु अला तआमिल मिस्कीन। फवैलुल्‍लिल मुसल्लीन। अल्लज़ीना हुम अन सलातिहिम साहून। अल्लज़ीना हुम युरा-ऊन। वयम्नऊना अल माऊन। लहबसद। 


सूरह लहब

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम

तब्बत यदा अबी लहबिव्-व तवब। मा अग़ना अन्हु मालुहू वमा कसब। सयस्‍ला नारन ज़ात लहब। वम्‍रअतूहू हम्‍मालतल हतब। फी जीदिहा हबलुम मिम मसद।

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Ramadan Mubarak: सहरी के साथ शुरू हुआ मुकद्दस माह-ए-रमजान, कितने बजे खुलेगा रोजा?

Ramadan 2026: रमजान 2026 का पाक महीना भारत में शुरू हो चुका है और मुसलमानों ने सहरी के साथ पहला रोजा रखा है। इस पवित्र महीने में रोजेदार सुबह सहरी करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ रोजा खोलते हैं। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे बेहद रहमतों और बरकतों वाला महीना माना जाता है।

Iftari Time
सहरी और इफ्तार का वक्त
locationभारत
userअसमीना
calendar19 Feb 2026 08:56 AM
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रमजान का महीना आते ही फिजा में एक अलग ही सुकून और रूहानी एहसास घुल जाता है। सुबह की सहरी से लेकर शाम की इफ्तार तक पूरा दिन इबादत, सब्र और खुद पर काबू रखने का पैगाम देता है। भारत में आज (जुमेरात) से रमजान की शुरुआत हो चुकी है। रोजा रखने वाले लोगों ने सुबह सहरी के साथ अपने पहले रोजे की नीयत की और अब शाम को इफ्तार के साथ पहला रोजा खोला जाएगा। माह-ए-रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि अपने दिल और किरदार को बेहतर बनाने का मौका भी है।

माह-ए-रमजान में ही क्यों रखा जाता है रोजा?

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान नौवां महीना होता है और इसे बेहद पाक माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब पर कुरआन-ए-पाक नाजिल किया था। यही वजह है कि इस पूरे महीने को इबादत, तिलावत और दुआओं का महीना कहा जाता है। भारत में चांद दिखाई देने के बाद आज पहला रोजा रखा गया है। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद चांद नजर आता है इसलिए यहां रोजे की शुरुआत भी एक दिन बाद होती है।

सहरी और इफ्तार का वक्त क्या है?

रोजे की शुरुआत सहरी से होती है। सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला खाना सहरी कहलाता है। आज सुबह 05 बजकर 22 मिनट तक सहरी का समय था। इसके बाद पूरे दिन रोजेदार कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है जिसे इफ्तार कहते हैं। आज पहले रोजे का इफ्तार शाम 06 बजकर 14 मिनट पर होगा। इफ्तार के वक्त लोग खजूर और पानी से रोजा खोलते हैं और फिर नमाज अदा करते हैं।

रोजा का मकसद क्या है?

रमजान में रोजा रखना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज माना गया है लेकिन इसका असली मकसद सिर्फ भूखा रहना नहीं है। रोजा इंसान को सब्र सिखाता है और बुरी आदतों से दूर रहने की ताकत देता है। ‘तकवा’ यानी परहेजगारी इस महीने की सबसे बड़ी सीख है। जब इंसान अपनी भूख और प्यास पर काबू कर सकता है तो वह गुस्से, झूठ और लालच जैसी बुराइयों पर भी आसानी से काबू पा सकता है।

इंसानियत का पैगाम

यह महीना इंसानियत और मदद का भी पैगाम देता है। रमजान में लोग ज्यादा से ज्यादा दान करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और अपने रिश्तों को मजबूत बनाने की कोशिश करते हैं। मस्जिदों में नमाज और तरावीह का खास इंतजाम होता है। घरों में भी इबादत का माहौल रहता है। रमजान हमें यह याद दिलाता है कि असली खुशी सिर्फ अपने लिए जीने में नहीं बल्कि दूसरों का ख्याल रखने में है। यह महीना आत्मशुद्धि, सादगी और इंसानियत का प्रतीक है। जैसे-जैसे दिन बीतता है रोजेदारों का हौसला और भी मजबूत होता है और इबादत का जज्बा और गहरा होता जाता है।

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महाशिवरात्रि के लिए बेहतरीन संदेश, सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए परफेक्ट

महाशिवरात्रि का पावन अवसर भोलेनाथ के भक्तों के लिए खास संदेश और शुभकामनाएं लाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं और रात्रि जागरण में भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। आप अपने प्रियजनों और परिवार को भक्ति और श्रद्धा से भरे संदेश भेजकर इस पावन पर्व को और खास बना सकते हैं।

महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि शुभकामना संदेश
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userअसमीना
calendar15 Feb 2026 10:05 AM
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महाशिवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और प्रेम का पर्व है। यह वह पावन रात है जब हर शिवभक्त “हर हर महादेव” के जयकारे के साथ अपने आराध्य को याद करता है। इस दिन उपवास, पूजा और रात्रि जागरण के जरिए भगवान शिव की कृपा पाने की कामना की जाती है। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर अपने प्रियजनों, दोस्तों और परिवार को भक्ति से भरे संदेश भेजना भी एक सुंदर परंपरा है। आइए कुछ ऐसे ही दिल से निकले शुभकामना संदेश पढ़ते हैं जिन्हें आप अपनों को भेज सकते हैं।

जब शिव हों साथ तो डर कैसा?

जब शिव हों साथ तो दुनिया से कैसा है डर,

महाशिवरात्रि पर शिव खुशियों से झोली दें भर।

हैप्पी महाशिवरात्रि 2026।

भक्ति में है असली पहचान

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान,

मैं तो भस्मधारी हूं,

भस्म से होता जिनका श्रृंगार,

मैं उस शिव का पुजारी हूं।

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

सुख और शांति की कामना

शिव की भक्ति में डूब जाए आपका मन,

महाशिवरात्रि लाए सुख, शांति और चैन-अमन।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।

तरक्की और प्यार का आशीर्वाद

भोले बाबा का आशीर्वाद आपको मिले,

उनकी दुआ का प्रसाद आपको मिले,

आप करें जिंदगी में इतनी तरक्की,

हर किसी का प्यार बस आपको मिले।

हैप्पी महाशिवरात्रि 2026।

हर सांस में हो शिव का नाम

आपकी हर सांस में बसे शिव का नाम,

महाशिवरात्रि में पूरे हो जाएं आपके काम।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।

भोलेनाथ की महिमा

हाथ में है डमरू जिनके,

और साथ में है काला नाग,

है जिसकी लीला अपरंपार,

वो हैं भोलेनाथ।

शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।