Taraweeh: रमज़ान का महीना इस्लाम धर्म में सबसे पाक और पवित्र माना जाता है। इस दौरान मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। रमज़ान में तरावीह की नमाज़ पढ़ना विशेष महत्व रखता है। यह नमाज़ ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है और इसमें कुल 20 रकात होती हैं।

रमज़ान (Ramadan) इस्लाम धर्म का सबसे पाक महीना माना जाता है। रमज़ान के पाक महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। रमज़ान सिर्फ भूख और प्यास सहने का महीना नहीं है बल्कि यह आत्मा की सफाई और खुदा के करीब जाने का खास मौका भी है। माह-ए-रमज़ान में लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह की बरकत पाने के लिए रोज़ाना नमाज़ और तरावीह पढ़ते हैं।
तरावीह की नमाज़ ईशा के बाद अदा की जाती है और इसका मकसद सिर्फ अल्लाह की इबादत करना नहीं बल्कि कुरआन की तिलावत करना और दिल को सुकून देना भी है। पुरुषों के लिए तरावीह 20 रकात होती है जबकि महिलाओं के लिए 10 रकात सही मानी जाती हैं। इस नमाज़ में हर 2-4 रकात के बाद दुआ पढ़ना जरूरी माना जाता है ताकि इसका सवाब पूरा मिल सके।
तरावीह की दुआ का पढ़ना भी उतना ही अहम है जितना रोज़े की दुआ का पढ़ना। दुआ बिना पढ़े तरावीह का सवाब कम हो जाता है और इसे सही तरीके से पढ़ने का महत्व भी कम हो जाता है। इस दौरान अल्लाह से अपने दिल की इच्छाओं और जरूरतों की प्रार्थना करना चाहिए ताकि वह हमारी इबादत को स्वीकार करें और हमें बरकत दें।
सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत, सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर।
سبحان ذي الملك و الملكوت سبحان ذي العزة و الجبروت سبحان الحي الذي لا يموت
سبحان الذي خضعت لعظمته الرقاب سبحان الذي ذلت لجبروته الصعاب سبحان رب الأرباب مسبب الأسباب
तरावीह की नमाज़ की नियत पुरुषों और महिलाओं के लिए थोड़ी अलग होती है। पुरुषों को यह कहते हुए पढ़ना चाहिए:
"मैं दो रकात सुन्नत तरावीह अल्लाह तआला के वास्ते पढ़ रहा हूं, वक्त ईशा का, मुंह काबा की तरफ, अल्लाहु अकबर"।
महिलाओं के लिए नियत होती है-
"मैं दो रकात सुन्नत तरावीह अल्लाह तआला के वास्ते पढ़ रही हूं, वक्त ईशा का, मुंह काबा की तरफ, अल्लाहु अकबर"।
यह नियत मन और इरादे दोनों को तैयार करती है ताकि नमाज़ सही तरीके से अदा हो। घर पर पढ़ते समय हर 2 रकात में कुरान की 10 सूरतें पढ़ी जा सकती हैं। अगर मस्जिद में पढ़ रहे हैं तो इमाम (नमाज़ पढ़ाने वाला) कुरआन पढ़ता है और पीछे वाले उसका पालन करते हैं। महिलाओं के लिए घर पर पढ़ना ही सबसे सही माना गया है। इस नमाज़ को रोजाना पढ़ना चाहिए ताकि पूरे रमज़ान का सवाब मिले।
तरावीह की नमाज़ के फायदे भी बहुत हैं। कुरआन की तिलावत से दिल को सुकून मिलता है और पढ़ते समय इंसान खुद को अल्लाह के करीब महसूस करता है। इफ्तार के बाद तरावीह पढ़ना शरीर को हल्की व्यायाम भी देता है और रात के समय मन और शरीर दोनों को ताजगी मिलती है।