बिहार में पुलिस भर्ती का बड़ा अपडेट! 4236 पदों पर बढ़ी वैकेंसी, देखें किस कैटेगरी में कितनी सीटें

बिहार में CSBC ने कांस्टेबल, मद्य निषेध सिपाही और जेल वार्डर भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 4236 कर दी है। जानें कैटेगरी वाइज सीटों का विवरण, चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न की पूरी जानकारी।

CSBC बिहार पुलिस भर्ती 2026
CSBC बिहार पुलिस भर्ती 2026
locationभारत
userसुप्रिया श्रीवास्तव
calendar11 Feb 2026 02:56 PM
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बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। केन्द्रीय चयन पर्षद सिपाही भर्ती यानी CSBC ने मद्य निषेध सिपाही, कक्षपाल यानी जेल वार्डर और चलंत दस्ता सिपाही भर्ती में पदों की संख्या बढ़ा दी है। ताजा नोटिस के अनुसार संशोधित रिक्तियों के बाद अब कुल पदों की संख्या बढ़कर लगभग 4236 हो गई है। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को फायदा मिलेगा जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे।

पर्षद द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि विभिन्न विभागों से नई अधियाचनाएं मिलने के बाद पदों में वृद्धि की गई है। खास तौर पर मद्य निषेध सिपाही और कक्षपाल पदों में बढ़ोतरी की गई है। चलंत दस्ता सिपाही के पदों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

किन पदों पर कितनी बढ़ी वैकेंसी

मद्य निषेध सिपाही के पद

  • मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग में पहले 1685 पद घोषित किए गए थे। अब इसमें 12 नए पद जोड़ दिए गए हैं। इसके बाद कुल पदों की संख्या 1697 हो गई है।
  • इन पदों का वेतनमान लेवल 3 निर्धारित है। कुल 1697 पदों में से 554 पद बिहार की मूल निवासी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इससे महिला अभ्यर्थियों को विशेष अवसर मिलेगा।

कक्षपाल यानी जेल वार्डर के पद

  • कारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालय के अंतर्गत कक्षपाल पदों में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले घोषित रिक्तियों में 14 नए पद जोड़े गए हैं, जो अनुसूचित जाति श्रेणी से संबंधित हैं। अब कुल पदों की संख्या बढ़कर 2431 हो गई है।
  • इन पदों का वेतनमान भी लेवल 3 है। इस भर्ती में सीधी नियुक्ति के साथ गृह रक्षक और भूतपूर्व सैनिकों के लिए भी निर्धारित कोटा रखा गया है।

चलंत दस्ता सिपाही के पद

  • चलंत दस्ता सिपाही पदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • कुल पद 108 हैं और इनका वेतनमान लेवल 2 है।

चयन प्रक्रिया कैसे होगी

  • सभी पदों के लिए चयन प्रक्रिया एक समान रहेगी। सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफल होंगे, उन्हें ही शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतिम मेरिट सूची केवल फिजिकल टेस्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। इस भर्ती में इंटरव्यू नहीं होगा।
  • लिखित परीक्षा में 30 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे। लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर प्रत्येक श्रेणी में रिक्तियों के पांच गुना अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा।
  • अन्य राज्यों के अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

लिखित परीक्षा का पैटर्न

  • लिखित परीक्षा 100 अंकों की होगी और इसका स्तर बिहार बोर्ड की 10वीं कक्षा के बराबर रहेगा। परीक्षा के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा।
  • परीक्षा में कुल 100 प्रश्न होंगे और प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा। प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के होंगे।

परीक्षा में इन विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे

  • हिंदी
  • अंग्रेजी
  • गणित
  • सामाजिक विज्ञान जिसमें इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र शामिल हैं
  • विज्ञान जिसमें भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान शामिल हैं
  • सामान्य ज्ञान और समसामयिक मामले

आरक्षण और कोटिवार जानकारी

रिक्तियों का विस्तृत कोटिवार विवरण जैसे अनारक्षित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित जानकारी केन्द्रीय चयन पर्षद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी के लिए csbc.bihar.gov.in पर जाकर नोटिस देख सकते हैं।

युवाओं के लिए बड़ा अवसर

4236 पदों पर बढ़ी यह वैकेंसी बिहार के युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू नहीं है और लिखित परीक्षा का स्तर 10वीं कक्षा का रखा गया है। ऐसे में मेहनत और सही रणनीति से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के पास सरकारी नौकरी पाने का अच्छा मौका है।

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AIIMS Faculty Vacancy: एम्स में 2561 प्रोफेसर पद खाली, सरकार बना रही नया भर्ती प्लान

एम्स में प्रोफेसरों के 2561 पद खाली हैं। आरक्षित वर्ग में उम्मीदवार न मिलने से संकट गहराया। सरकार अब कुल पद बढ़ाकर नई भर्ती योजना पर काम कर रही है।

एम्स फैकल्टी वैकेंसी
एम्स फैकल्टी वैकेंसी
locationभारत
userसुप्रिया श्रीवास्तव
calendar10 Feb 2026 01:20 PM
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देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में गिने जाने वाले एम्स में प्रोफेसरों की भारी कमी सामने आई है। संसद और आरटीआई के माध्यम से सामने आए आंकड़ों के अनुसार एम्स में प्रोफेसरों के लगभग 40 फीसदी पद खाली हैं। इस स्थिति ने न केवल मेडिकल शिक्षा बल्कि मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार अब एक नया भर्ती प्लान तैयार कर रही है, जिसमें कुल स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

एम्स में प्रोफेसरों की कमी कितनी गंभीर

देश में कुल 23 एम्स स्वीकृत हैं, जिनमें से 19 एम्स फिलहाल पूरी तरह संचालित हो रहे हैं। इन एम्स में प्रोफेसरों के कुल 6,376 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 2,561 पद अभी भी खाली पड़े हैं। यह संख्या कुल पदों का करीब 40 प्रतिशत है, जो किसी भी बड़े संस्थान के लिए गंभीर स्थिति मानी जाती है। प्रोफेसरों की कमी के कारण पढ़ाई, रिसर्च और मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।

आरक्षित वर्ग में उम्मीदवार न मिलना बड़ी वजह

एम्स में खाली पड़े पदों की सबसे बड़ी वजह आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की उपलब्धता न होना है। ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए कुल पदों में लगभग 49.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। सूत्रों के अनुसार, एम्स में जो पद खाली हैं उनमें से करीब 90 से 95 फीसदी पद इन्हीं आरक्षित श्रेणियों के हैं। कई बार विज्ञापन निकालने के बावजूद इन श्रेणियों में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं।

सरकार क्यों बढ़ाना चाहती है कुल पद

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संस्थानों का कामकाज प्रभावित न हो। आरक्षित पदों को सामान्य श्रेणी में बदलने की प्रक्रिया बेहद लंबी और जटिल होती है। इसके लिए बार-बार विज्ञापन, संबंधित मंत्रालयों की अनुमति और आरक्षण से जुड़े आयोगों की अनापत्ति लेनी पड़ती है, जिसमें काफी समय लग जाता है। इसी वजह से सरकार अब कुल स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि सामान्य और आरक्षित दोनों श्रेणियों में पर्याप्त संख्या में प्रोफेसर उपलब्ध रह सकें।

खाली पद सामान्य में बदलने की प्रक्रिया क्यों कठिन

नियमों के तहत आरक्षित श्रेणी के पदों को सीधे सामान्य श्रेणी में बदलना आसान नहीं है। पहले कई बार भर्ती प्रक्रिया करनी होती है, फिर यह साबित करना पड़ता है कि उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद कार्मिक मंत्रालय और सामाजिक न्याय से जुड़े आयोगों की अनुमति जरूरी होती है। यही कारण है कि यह प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है और संस्थानों को लंबे समय तक खाली पदों के साथ काम करना पड़ता है।

भर्ती तेज करने के लिए उठाए गए कदम

सरकार ने एम्स में प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए कुछ अहम कदम भी उठाए हैं। इसके तहत एम्स में हर तीन महीने में साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं, यानी साल में चार बार भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने पद खाली होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की पहल की है, ताकि रिक्तियों का असर कम किया जा सके।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी हालात चिंताजनक

एम्स के साथ-साथ देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी प्रोफेसरों की भारी कमी है। यहां करीब 5,400 पद खाली पड़े हैं। इन विश्वविद्यालयों में भी आरक्षित श्रेणियों में रिक्तियों की स्थिति ज्यादा गंभीर है। आंकड़ों के अनुसार, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग में 75 से 80 फीसदी तक पद खाली हैं। इस समस्या से निपटने के लिए यूजीसी ने सीयू चयन नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बढ़ी हलचल

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को चार महीने के भीतर भरने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे अहम पद एक महीने में भरे जाएं। इसके बाद सरकार और संस्थानों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

सरकार की कोशिश और आगे की राह

सरकार ने सभी केंद्रीय संस्थानों को बैकलॉग रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अब कुल पदों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो आने वाले समय में एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी कुछ हद तक दूर हो सकती है और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

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DU Recruitment 2026: लंबे इंतजार के बाद 12 कॉलेजों में 600 असिस्टेंट प्रोफेसर की बंपर वैकेंसी!

दिल्ली यूनिवर्सिटी भर्ती 2026 में बड़ा अपडेट। DU के 12 कॉलेजों में 600 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर मार्च 2026 से भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। पूरी खबर पढ़ें।

दिल्ली यूनिवर्सिटी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
दिल्ली यूनिवर्सिटी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
locationभारत
userसुप्रिया श्रीवास्तव
calendar10 Feb 2026 12:10 PM
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दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ी बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया अब शुरू होने जा रही है। दिल्ली सरकार की मदद से चल रहे डीयू के 12 कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया मार्च 2026 से शुरू होगी। इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा, बल्कि वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे कॉलेजों को भी स्थायित्व मिलेगा।

DU के 12 कॉलेजों में क्यों खास है यह भर्ती

दिल्ली विश्वविद्यालय के ये 12 कॉलेज दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित हैं। बीते कई वर्षों से इन कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से ज्यादा पद खाली होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पा रही थीं। इसकी वजह विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार के बीच नियुक्तियों, खर्च और गवर्निंग बॉडी को लेकर चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध था। अब यह अड़चन दूर हो गई है और भर्ती को लेकर सभी स्तरों पर सहमति बन चुकी है।

मार्च 2026 से शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया

डीयू के डीन ऑफ कॉलेज प्रोफेसर बलराम पाणि के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली सरकार की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कुछ महीनों से इन कॉलेजों के रुके हुए फंड और शिक्षकों के वेतन संबंधी अनुदान भी जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में अब भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई बड़ी बाधा नहीं बची है।

पिछली सरकार के फैसले से क्यों अटकी थी भर्ती

दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित कॉलेजों के एक प्रिंसिपल के अनुसार पहले कॉलेज की गवर्निंग बॉडी की अनुमति से रिक्त पदों पर नियुक्तियां हो जाया करती थीं। लेकिन पिछली सरकार के दौरान व्यवस्था बदली गई और रिक्त पदों पर भर्ती के लिए सीधे सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई। इसी बदलाव के बाद से नियुक्तियों में देरी और गतिरोध की स्थिति बनती चली गई।

लंबे समय से तदर्थ और अतिथि शिक्षक संभाल रहे थे पढ़ाई

इन कॉलेजों में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर भी पड़ा। कई विभागों में वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जब दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों में पांच हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई थीं, तब भी इन 12 कॉलेजों में रिक्तियां नहीं भरी जा सकीं। अब स्थायी भर्ती शुरू होने से शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली सरकार और डीयू के बीच बनी सहमति

रिक्त पदों को भरने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बैठकें हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की पूरी संभावना है। इससे पहले जो प्रशासनिक अड़चनें थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है।

गवर्निंग बॉडी गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में

इन 12 कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के गठन को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है। डीयू के एक अधिकारी के मुताबिक यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। इन गवर्निंग बॉडी में दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार, दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। गवर्निंग बॉडी बनने के बाद प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों में और तेजी आने की उम्मीद है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों में 600 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर होने वाली यह भर्ती न केवल अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा मौका है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।

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