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Greater Noida: प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और संस्थान प्रबंधन द्वारा कई दौर की वार्ता की गई लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में बुधवार रात हुए हंगामे के बाद जिम्स प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों पर कड़ा एक्शन लिया है। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जीआईएमएस) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की हड़ताल और धरना प्रदर्शन के दौरान बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। संस्थान के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने कासना थाने में शिकायत देकर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
संस्थान प्रशासन के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांग उनकी सेवाओं को नियमित किए जाने की बताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और संस्थान प्रबंधन द्वारा कई दौर की वार्ता की गई लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
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शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने ओपीडी के मुख्य प्रवेश द्वार और मरीज पंजीकरण क्षेत्र में धरना देकर अस्पताल की सेवाओं को प्रभावित किया। प्रशासन का दावा है कि इससे मरीजों के पंजीकरण और उपचार कार्य में बाधा उत्पन्न हुई तथा अस्पताल आने वाले लोगों में भ्रम की स्थिति बनी।
निदेशक द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, 24 जून की शाम पुलिस और जिला प्रशासन की मौजूदगी में कर्मचारियों से पंजीकरण क्षेत्र छोड़कर किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन करने का अनुरोध किया गया। इसके बाद कुछ कर्मचारियों के उग्र होने, संस्थान कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल के दरवाजे, शीशे, कुर्सियां और अन्य फर्नीचर को नुकसान पहुंचा। साथ ही निदेशक ने आरोप लगाया है कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रदर्शन में बाहरी लोगों और विभिन्न संगठनों के सदस्यों को शामिल किया गया जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई। शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों ने अस्पताल के मुख्य गेट पर भी हंगामा किया और गेट तोड़ने का प्रयास किया। जीआईएमएस प्रशासन ने कासना पुलिस से राजकीय कार्य में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अस्पताल सेवाओं को प्रभावित करने के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ थाना कासना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191 (2), 132, 352, 351(2), 324 (4), 125, 353 (1) (बी) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 व 4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
आपको बता दें कि जिम्स अस्पताल के आउटसोर्सिंग कर्मचारी नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बीते 15 जून से अस्पताल के ओपीडी पर्ची हॉल में दिन-रात धरना दे रहे थे। कर्मचारियों का आरोप है कि बुधवार रात करीब 8 बजे कासना कोतवाली पुलिस बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंची और उन्हें जबरन खदेडऩा शुरू कर दिया। इस दौरान हुए लाठीचार्ज में कई महिला और पुरुष कर्मचारी घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें आईसीयू (ढ्ढष्ट) में भर्ती कराना पड़ा। कर्मचारियों के मुताबिक, देर रात करीब 12:30 बजे उन्हें बसों में भरकर पुलिस लाइन ले जाया गया।
इन गंभीर आरोपों के बीच, राजकीय आयुर्वेदिक संस्थान (जिम्स) के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने एक वीडियो बयान जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने लाठीचार्ज के दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि जिम्स अस्पताल में पूरी तरह से शांति व्यवस्था कायम है। जो कर्मचारी 15 जून से धरना प्रदर्शन पर बैठे थे उन्हें अस्पताल के अंदर ही दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कोई परेशानी न हो। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर लाठीचार्ज और चोट लगने के जो वीडियो या खबरें चल रही हैं वे पूरी तरह गलत हैं। यह संस्थान को बदनाम करने की कोशिश है।
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