ग्रेटर नोएडा PNB की ऐच्छर शाखा में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में खाताधारकों का धरना। बैंक पर ताला लगाने की कोशिश, पूर्व अधिकारियों की भूमिका और रकम वापसी पर उठे सवाल।
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करीब 35 करोड़ रुपये की हेराफेरी से खाताधारकों में आक्रोश, बैंक शाखा पर ताला लगाने की कोशिश; अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज लोगों ने बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई-1 स्थित ऐच्छर की पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अपनी जीवनभर की जमा पूंजी वापस पाने के लिए परेशान खाताधारकों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नाराज खाताधारकों ने बैंक के बाहर धरना देकर जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने बैंक पर ताला लगाने की कोशिश भी की। खाताधारकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी जमा रकम वापस नहीं मिली तो वे बैंक पर ताला जड़ने को मजबूर होंगे। चेतना मंच के ग्रेटर नोएडा संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के बाहर धरने पर बैठे खाताधारकों में महिलाओं और पुरुषों के साथ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अपनी जमा पूंजी की तत्काल जरूरत है। किसी के घर में शादी होनी है तो कोई परिवार के सदस्य के इलाज के लिए परेशान है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई बैंक में सुरक्षित रखने के भरोसे से जमा की थी, लेकिन अब जरूरत पड़ने पर उन्हें अपनी ही रकम के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। खाताधारकों के मुताबिक, अभी तक केवल 14 से 15 खाताधारकों को ही उनकी रकम वापस मिल पाई है। बाकी लोग लगातार बैंक के चक्कर काट रहे हैं। खाताधारकों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के इतने गंभीर मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। लोगों का सवाल है कि आखिर उनकी जमा पूंजी कहां गई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई-1 स्थित ऐच्छर की पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में जमा रकम वापस नहीं मिलने से परेशान खाताधारकों ने सोमवार को धरना देकर बैंक प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इस दौरान बैंक परिसर के बाहर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। नाराज लोगों ने बैंक में ताला लगाने का प्रयास किया। खाताधारकों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से उनकी समस्या हल नहीं होगी। उन्हें अपनी जमा रकम वापस चाहिए। जब तक पैसा नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने चेतावनी दी है कि बैंक प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। Greater Noida News
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दरअसल, पंजाब नेशनल बैंक की सेक्टर पाई-1 ऐच्छर शाखा में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद से ही बैंकिंग व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में बैंक की निलंबित कर्मचारी दीपांशी की भूमिका सामने आई है। हालांकि, खाताधारकों और किसान संगठनों का आरोप है कि पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी पर डालकर बैंक के दूसरे अधिकारियों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। खाताधारकों की मांग है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत उन सभी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिनके कार्यकाल में संदिग्ध लेनदेन हुए। उनका कहना है कि करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी कोई सामान्य घटना नहीं है। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन में बैंक की निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। Greater Noida News
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मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा की इस बैंक शाखा से झारखंड के बैंक खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद खाताधारकों ने संबंधित खातों के संचालन और करोड़ों रुपये के लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच की मांग की है। पूर्व ब्रांच मैनेजर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया गया है कि पूर्व ब्रांच मैनेजर मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग की रहने वाली हैं। खाताधारकों का कहना है कि इस तथ्य सहित सभी परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि रकम किन खातों में गई तथा इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। Greater Noida News
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बैंक की शिकायत के अनुसार, 16 सितंबर 2026 को एक महिला खाताधारक अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने शाखा पहुंची थी। पासबुक में खाते से तीन ऐसे लेनदेन दर्ज मिले, जिनकी जानकारी परिवार को नहीं थी। महिला ने शाखा प्रमुख से मिलने की मांग की, लेकिन उस समय शाखा प्रमुख मौजूद नहीं थीं। आरोप है कि इसी दौरान बैंक कर्मचारी दीपांशी ने परिवार को इन लेनदेन के सही होने का भरोसा दिलाने का प्रयास किया। बाद में महिला के पति ने मामले की शिकायत शाखा प्रमुख से की। पूछताछ के दौरान दीपांशी ने कथित तौर पर बताया कि महिला ने फोन पर अपने पति को संपत्ति में निवेश करने और आशुतोष नामक व्यक्ति के खाते में रकम भेजने की जानकारी दी थी। हालांकि, बैंक की आंतरिक जांच में इन तीनों लेनदेन से संबंधित डेबिट वाउचर शाखा के रिकॉर्ड में नहीं मिले। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर बैंक का संदेह गहरा गया। इसके बाद हुई पूछताछ में दीपांशी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि संबंधित लेनदेन आशुतोष के कहने पर किए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था और खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। Greater Noida News
इस मामले में किसान नेता बृजेश भाटी ने भी बैंक प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि केवल दीपांशी के खिलाफ कार्रवाई करके मामले में शामिल अन्य बैंककर्मियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि पूर्व शाखा प्रबंधक सहित सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। Greater Noida News
इस मामले का एक दूसरा पहलू भी जांच एजेंसियों के सामने है। बैंक की आंतरिक जांच के अनुसार, महिला खाताधारक संगीता की शिकायत से पहले किसी अन्य ग्राहक की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं की गई थी। संगीता के परिवार की आपत्ति के बाद ही मामले की जांच शुरू हुई थी। अब जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि सभी प्रभावित खाताधारक वास्तव में धोखाधड़ी के शिकार हैं या किसी अन्य स्तर पर उनकी भी कोई भूमिका रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी खाताधारक की संलिप्तता अभी साबित नहीं हुई है। वहीं, खाताधारकों का आरोप है कि बैंक उनकी जमा रकम लौटाने में भी पूरी पारदर्शिता नहीं बरत रहा है। उनका कहना है कि उन्हें केवल मूलधन ही नहीं, बल्कि नियमानुसार देय ब्याज सहित पूरी रकम वापस मिलनी चाहिए। Greater Noida News
PNB की ऐच्छर शाखा में सामने आया यह मामला अब केवल बैंक के एक कर्मचारी की कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी, झारखंड के खातों में रकम ट्रांसफर होने की जानकारी, पूर्व शाखा प्रबंधक की भूमिका पर उठते सवाल और खाताधारकों का लगातार बढ़ता आक्रोश इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर बना रहे हैं। बैंक के बाहर धरने पर बैठे लोगों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी को बेटी की शादी करनी है तो किसी को अपने परिजन का इलाज कराना है। इन लोगों के लिए बैंक में जमा पैसा महज एक बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और भविष्य की सुरक्षा है। अब खाताधारकों की निगाहें बैंक प्रशासन, पुलिस और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। सवाल साफ है कि करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की पूरी सच्चाई कब सामने आएगी? रकम किन लोगों के खातों में पहुंची? पूर्व बैंक अधिकारियों की क्या भूमिका रही? और सबसे महत्वपूर्ण, अपनी ही जमा पूंजी के लिए बैंक के चक्कर काट रहे खाताधारकों को उनका पैसा कब वापस मिलेगा? फिलहाल खाताधारकों ने साफ कर दिया है कि पैसा नहीं मिला तो बैंक पर ताला लगाने का आंदोलन और तेज किया जाएगा। Greater Noida News
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