
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विरुद्ध किसानों द्वारा चल रहे धरना प्रदर्शन को आज 21 दिन हो गए हैं। पीड़ित किसान आज प्राधिकरण का घेराव करेंगे। जिसके लिए विभिन्न समाजसेवी और विभिन्न पार्टियों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है। धरने प्रदर्शन को शामिल होने वाले समाजवादी पार्टी के नेता इंद्र प्रधान को पुलिस ने कल शाम से हाउस अरेस्ट कर लिया है ताकि वह प्रदर्शन में शामिल ना हो सके। जिसकी सूचना मिलते ही धरना दे रहे किसानों में गुस्सा बढ़ गया। किसानों ने प्राधिकरण के खिलाफ धोखेबाजी के नारे लगाए।
इंद्र प्रधान ने बताया कि उन्हें आज पीड़ित किसानों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल हो समर्थन करने कि घोषणा के बाद पुलिस-प्रशासन ने घबराकर कल शाम से मुझे असंवैधानिक तरीके से हाउस अरेस्ट कर रखा है और धरने में शामिल होने से रोका जा रहा है। यह प्राधिकरण द्वारा किसानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं। हमारे पीड़ित किसान इतने भी कमजोर नहीं है कि वह अपने हक की लड़ाई ना लड़ सके।
किसान सभा के प्रवक्ता डॉ रुपेश वर्मा ने कहा प्राधिकरण पीड़ित किसानों के बढ़ते हौसले और संख्या को देखकर डर गया है प्राधिकरण ने डर की वजह से ही जय जवान जय किसान नेता सुनील फौजी और समाजवादी पार्टी के नेता इंद्र प्रधान को हाउस अरेस्ट कर लिया है। अब यह आंदोलन पुलिस के तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाने के बावजूद तेजी से आगे बढ़ेगा। इस क्षेत्र के किसान बहादुर किसान हैं और वह अपने हक और अधिकारों को अच्छी तरह समझते हैं। संविधान की धारा 19 सभी नागरिकों को अपने हकों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने का हक देती है। पुलिस प्रशासन द्वारा किसानों के इस हक को छिनने की कार्रवाई पुलिस प्रशासन एवं सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर आत्मघाती कदम होगा।
किसानों की वाजिब समस्याओं जिसमें 10% आबादी प्लाट सर्कल रेट का 4 गुना मुआवजा आबादियों की लीज बैक, न्यूनतम प्लाट साइज 120 वर्ग मीटर, आबादियों की शिफ्टिंग में संपूर्ण रखने की लीज बैक साढे 17% प्लाट कोटा, शिफ्टिंग रोजगार एवं अन्य मांगों पर प्राधिकरण द्वारा गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मुद्दों को उलझाने और टालने के मकसद से प्राधिकरण के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों की नीयत मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी साफ नहीं है। इन समस्याओं पर पीड़ित किसानों द्वारा अधिकारियों से कई बार बातचीत की गई लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। प्राधिकरण किसानों को नजरअंदाज कर रहा है।