ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में अवैध निर्माण को लेकर फिर सवाल उठे हैं। चेतना मंच के वीडियो के बाद प्राधिकरण की निगरानी, सरकारी जमीनों पर कब्जे और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग तेज हुई है।

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा में इन दिनों चारों तरफ अवैध निर्माण का अवैध धंधा खूब फल-फूल रहा है। पता चला है कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण करके हजारों करोड़ रूपए मूल्य की जमीन पर खुलेआम कब्जा कराया जा रहा है। चेतना मंच के पास मौजूद पुख्ता जानकारी के अनुसार ग्रेटर नोएडा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का खेल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में ठेके (पुन: तैनाती) पर तैनात महाप्रबंधक (GM) ए.के. सिंह के आर्शीवाद से चल रहा है। ग्रेटर नोएडा में GM प्रोजेक्ट के पद पर तैनात ए.के. सिंह के विरूद्ध भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोप पहले भी लग चुके हैं।
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ग्रेटर नोएडा में चल रहे अवैध निर्माण को लेकर तमाम सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं। सामाजिक संगठनों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस वाली नीति पूरी तरह से फेल हो रही है? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषित नीति है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह भी सबको पता है कि अवैध निर्माण करके सरकारी जमीन कब्जाने वाले भू-माफियाओं को योगी आदित्यनाथ मिट्टी में मिला चुके हैं। फिर भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के GM प्रोजेक्ट के आर्शीवाद से अवैध निर्माण का गंदा धंधा जारी रहना बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रेटर नोएडा में चल रहे अवैध निर्माण के धंधे को आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं। ग्रेटर नोएडा शहर में विकसित हुए ग्रेटर नोएडा वेस्ट से लगा हुआ एक प्रसिद्ध गाँव है। इस प्रसिद्ध गाँव का नाम शाहबेरी है। शाहबेरी गाँव में जमीन की कीमत आसमान छू रही है। इस शाहबेरी गाँव में सरकारी जमीन पर कब्जा करके रात-दिन अवैध निर्माण का गंदा धंधा चल रहा है। ग्रेटर नोएडा के इसी शाहबेरी गाँव में वर्ष 2018 में बहुमंजिला इमारतों के ढहने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। चेतना मंच के द्वारा X पर शेयर किए गए एक वीडियो ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहबेरी में अवैध निर्माण का मुद्दा केवल सरकारी जमीन, भवन मानचित्र या नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। यह हजारों लोगों की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। सवाल यह है कि जिस इलाके में पहले इमारतें गिरने से नौ लोगों की जान जा चुकी है, वहां दोबारा ऐसे निर्माणों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर क्या कर रहे हैं?
चेतना मंच के द्वारा X पर शेयर किए गए वीडियो में शाहबेरी क्षेत्र की एक इमारत के आसपास निर्माण संबंधी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। वीडियो में कुछ लोग भवन के पास काम करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में निर्माण गतिविधियों की वैधता और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शाहबेरी में बिल्डर माफिया एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। आरोप यह भी हैं कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के GM प्रोजेक्ट ए.के. सिंह की मिलीभगत के बिना इतने संवेदनशील इलाके में अवैध निर्माण का कारोबार दोबारा फल-फूल पाना संभव नहीं है।
शाहबेरी में अवैध निर्माण का इतिहास बेहद डरावना रहा है। 17 जुलाई 2018 को यहां एक छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत पास की चार मंजिला इमारत पर गिर गई थी। इस भीषण हादसे में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने मलबे से नौ शव बरामद किए थे। इस हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शाहबेरी में अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ अभियान चलाया था। सितंबर 2018 में प्राधिकरण ने लगभग 30 इमारतों को सील किए जाने के बाद चार अवैध इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की थी। उस समय ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अवैध निर्माण रोकने और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन मौजूदा समय में फिर से अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है।
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