जेवर के अवैध अस्पताल चौधरी मेडिकेयर के मुद्दे पर क्यों सांप सूंघ गया है समाज के ठेकेदारों को Noida News
On the issue of Chaudhary Medicare, the illegal hospital of Jewar, why the snake has sniffed the contractors of the society
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 01:43 PM
नोएडा/जेवर। एक छह वर्षीय मासूम बच्चे का जीवन बर्बाद करने वाले चौधरी मेडिकेयर नामक अस्पताल के मुद्दे पर समाज के तमाम ठेकेदारों को सांप ने सूंघ लिया है। छोटे-बड़े मामलों में प्रेस से लेकर सड़कों तक बवाल काटने वाले सारे समाजसेवी पता नहीं कहां 'खो' गए हैं। एक बच्चे के पूरे जीवन को बर्बाद करने वाले चौधरी मेडिकेयर के मालिक डॉ. अजीत चौधरी व उनके चेले पीड़ित परिवार पर कुछ ले-देकर समझौते का दबाव बना रहे हैं।
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क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर कस्बे में चौधरी मेडिकेयर के नाम से एक अस्पताल है। सारे कायदे कानून तोड़कर यह अस्पताल बिजली की हाईटेंशन लाइन के नीचे बनाया गया है। सबको पता है कि हाईटेंशन लाइन के नीचे कोई भी निर्माण नहीं हो सकता है। जेवर में अस्पताल जैसा महत्वपूर्ण संस्थान न केवल हाईटेंशन लाइन के नीचे बनाया गया, बल्कि कई सालों से चल भी रहा था। हाल ही में 25 जून 2023 को उस अस्पताल में अपने परिजनों के साथ गया 6 साल का मासूम बच्चा माधव बिजली की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया। जब उस बच्चे को इलाज के लिए एम्स अस्पताल में ले जाया गया तो उसकी जान बचाने के लिए एम्स के डॉक्टरों को बच्चे के दोनों हाथ काटने पड़े। अभी वह बच्चा जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है।
'चेतना मंच' की खबर के बाद सील हुआ अस्पताल
इतनी बड़ी दर्दनाक घटना के बाद भी अवैध रूप से बना हुआ अस्पताल चौधरी मेडिकेयर बाकायदा चलता रहा। जब 'चेतना मंच' ने इस मुद्दे पर एक के बाद एक अनेक समाचार प्रकाशित किए और 'चेतना मंच' के यूट्यूब चैनल पर पूरे प्रकरण के वीडियो सार्वजनिक किए तो सरकारी तंत्र नींद से जागा और अवैध अस्पताल को बंद कराया। इस प्रकरण में जेवर थाने की पुलिस ने चौधरी मेडिकेयर के मालिक अजीत चौधरी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर रखी है। डॉ. अजीत चौधरी का 'सिस्टम' में इतना बड़ा रसूख है कि उसे गिरफ्तार करना तो दूर, पुलिस उसे टच तक नहीं कर रही है।
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पुलिस अफसरों का कुतर्क यह है कि धारा-338 के जिस सेक्शन में डॉक्टर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज है, उस धारा में बिना पूरी जांच किए उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अब भला पुलिस अफसरों को कौन समझाए कि यह मामला तो सरासर हत्या के प्रयास की धारा-307 का बनता है। आएदिन एफआईआर में धाराएं तरमीम करने वाली पुलिस इस मामले में धारा तरमीम करके डॉक्टर को जेल क्यों नहीं भेज रही है। यहां यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि जिस तहरीर के आधार पर यह एफआईआर दर्ज हुई है, वह तहरीर भी मासूम माधव के पिता ने खुद अपने हिसाब से लिखवाई है।
क्यों मौन हैं समाज के ठेकेदार ?
आप आएदिन देखते व सुनते हैं कि आज अमुक मुद्दे पर सामाजिक व राजनीतिक संगठन ने प्रदर्शन किया। कल किसी दूसरे मुद्दे पर तो परसों किसी तीसरे मुद्दे पर। यहां एक 6 साल के बच्चे के दोनों हाथ काट दिए गए। इतनी दर्दनाक घटना पर एक भी समाजसेवी ने ना तो कोई बयान दिया, ना सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट की और ना ही कोई प्रदर्शन हुआ। 'चेतना मंच' की अपील है कि एक आर आप नीचे दिए गए वीडियो में मासूम बच्चे को देख लें। उसके परिवार के दर्द को सुन लें। फिर जरूर सोचें कि हर गली-मोहल्ले में सक्रिय सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर क्यों मौन हैं ?
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