"वक्फ हमारा घरेलू मामला है"- ओवैसी का पाकिस्तान को करारा जवाब
Asaduddin Owaisi
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 05:08 PM
Asaduddin Owaisi : वक्फ कानून को लेकर चल रही बहस के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर सरकार और आलोचकों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वक्फ संपत्ति और उससे जुड़े अधिकार "घर के मामले" हैं, और इसमें बाहरी हस्तक्षेप या अनावश्यक विवाद उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में 20 मई को वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई होनी है, लेकिन उससे पहले ओवैसी का यह बयान चर्चाओं में आ गया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने संध और पाकिस्तान दोनों पर तंज कसा। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “पहले तो संघ परिवार के लोग मुझे गालियां देते थे, अब पाकिस्तान ने भी मुझे अपना दूल्हा भाई बना लिया है।
देश के लिए थे, हैं और रहेंगे
ओवैसी ने जोर देकर कहा कि जब बात भारत की एकता और अखंडता की आती है, तो वे हर किसी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, हम किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए खड़े हैं। जब हमारे अधिकार और संविधान पर हमला होगा, तब - तब हम जरूर आवाज उठाएंगे। लेकिन देश की बात आएगी, तो हम एकजुट रहेंगे। इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में सबसे पहले बलिदान देने वाले मुसलमान उलेमा थे, और आज भी वही वर्ग इस कानून को लेकर सरकार से सवाल कर रहा है।
वक्फ कानून को बताया असंवैधानिक
ओवैसी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल वक्फ संपत्तियों को कमजोर करना है। उन्होंने पूछा कि अगर हर मुद्दे के लिए अलग कानून हो सकते हैं, तो समान नागरिक संहिता (UCC) को ‘समान’ कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने वक्फ कानून के समर्थकों को खुली चुनौती कि - “कोई मुझे यह बताएं कि इस कानून में ऐसा कौन सा प्रावधान है जिससे वक्फ की संपत्ति संरक्षित होगी, आय बढ़ेगी या अतिक्रमण हटेगा?” उन्हों आगे अपने बयान में कहा कि नए संशोधन में पुराने कानून के अच्छे प्रावधान हटा दिए गए हैं, और कोई भी यह नहीं बता पा रहा कि नया कानून किस तरह से प्रगतिशील है।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में संविधान सम्मत निर्णय देगा और वक्फ बोर्ड व मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा भी करेगा। ओवैसी ने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए। Asaduddin Owaisi :