70 साल का पाकिस्तानी मौलाना 26 वर्षीय दुल्हन का वायरल हुआ रोमांटिक पोज

एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में 70 वर्षीय पाकिस्तानी मौलाना और उनकी 26 वर्षीय दुल्हन एक पेशेवर फोटोशूट कराते दिखाई दे रहे हैं। इसमें दुल्हन अपने पति की गोद में बैठी है और मौलाना उसके साथ रोमांटिक पोज में नजर आता है।

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70 वर्षीय पाकिस्तानी मौलाना और उनकी 26 वर्षीय दुल्हन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 03:46 PM
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Maulana's Marriage : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में 70 वर्षीय पाकिस्तानी मौलाना और उनकी 26 वर्षीय दुल्हन एक पेशेवर फोटोशूट कराते दिखाई दे रहे हैं। इसमें दुल्हन अपने पति की गोद में बैठी है और मौलाना उसके साथ रोमांटिक पोज में नजर आता है।

मौलाना ने अपनी दुल्हन से किया है प्रेम विवाह 

यह जोड़ा पाकिस्तान के रावलपिंडी से बताया जा रहा है। खबरों के अनुसार, मौलाना ने अपनी दुल्हन से प्रेम विवाह किया है, जो उनसे लगभग 44 साल छोटी हैं। शादी के बाद दोनों ने एक विशेष ब्राइडल फोटोशूट कराया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं।

वायरल वीडियो में क्या दिखता है

* वीडियो में मौलाना और दुल्हन अलग-अलग पोज देते नजर आते हैं।

* फोटोग्राफर कैमरे का सही एंगल पाने के लिए कई बार जमीन पर लेटते और उठते दिखते हैं।

* एक अन्य क्लिप में दुल्हन अपने पति के लिए बॉलीवुड गाना गुनगुनाती हैं, और मौलाना भी सुर में सुर मिलाते हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

नेटिजन्स ने इस वीडियो पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ लोग उम्र के अंतर पर हँस रहे हैं, तो कुछ फोटोग्राफर की मेहनत पर मजाक कर रहे हैं। कुछ कमेंट मजेदार चुटकुलों और हँसी ठिठोली से भरे हुए हैं। हालांकि कई लोग इस वीडियो की सच्चाई पर संदेह कर रहे हैं, समाचार एजेंसियों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना वास्तविक बताई जा रही है। कहा जाता है कि यह फोटोशूट स्थानीय वेबसाइट द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन विवाद बढ़ने के कारण इसे बाद में हटा दिया गया।



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भारत और कनाडा के रिश्तों में आई ताजा नरमी, सभी आरोपों को किया दरकिनार

रिश्तों में आई ताजा नरमी को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। हाल के संकेत बताते हैं कि दोनों देश टकराव की स्थिति से बाहर निकलकर व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ना चाहते हैं। कनाडा ने पूर्व में भारत पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया है।

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भारत और कनाडा के रिश्तों में आई ताजा नरमी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 11:52 AM
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India-Canada Relations : भारत और कनाडा के रिश्तों में आई ताजा नरमी को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। हाल के संकेत बताते हैं कि दोनों देश टकराव की स्थिति से बाहर निकलकर व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ना चाहते हैं। कनाडा ने पूर्व में भारत पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया है। हालांकि यह करते हुए कोर्नी ने अपने वोट बैंक की भी परवाह नहीं की है, यह वर्तमान कनाडा सरकार की साहसिक पहल है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद उस समय के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कनाडाई संसद में कहा था कि भारतीय एजेंसियों की संभावित संलिप्तता की जांच की जा रही है। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। राजनयिकों की संख्या घटाई गई, वीजा सेवाओं पर असर पड़ा और चल रही व्यापार वातार्एं भी रोक दी गईं। भरोसे की कमी साफ नजर आने लगी।

अब बदला माहौल

2026 में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कोर्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडाई अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत को वर्तमान में कनाडा में चल रही हिंसक गतिविधियों से जोड़ने के ठोस आधार नहीं हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच संवाद जारी है और पहले जैसी चिंताएं अब सक्रिय रूप में मौजूद नहीं हैं। यह बदलाव दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बर्फ पिघलने का संकेत माना जा रहा है।

प्रैग्मैटिक रीसेट की रणनीति

कार्नी सरकार इस नए रुख को व्यावहारिक पुनर्संतुलन बता रही है। इसका उद्देश्य पुराने आरोपों की राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर साझा हितों पर ध्यान देना है। अब दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक, न्यूक्लियर सेक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाया जाएगा। द्विपक्षीय व्यापार पहले ही अरबों डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है, और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने की योजना पर चर्चा हो रही है।

पूरी तरह सुलह या रणनीतिक कदम?

हालांकि माहौल सकारात्मक है, लेकिन सभी पक्ष एकमत नहीं हैं। कनाडा के कुछ सिख संगठनों ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं। वहीं भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर स्पष्ट रुख बनाए हुए है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि दोनों देश खुले टकराव से हटकर संवाद और सहयोग की राह पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाला समय बताएगा कि यह सुधार स्थायी साझेदारी में बदलता है या केवल कूटनीतिक संतुलन तक सीमित रहता है।


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पीएम मोदी के इजराइल दौरे का बॉयकॉट करेगी इजराइली विपक्ष

नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल मची हुई है। खासतौर पर उनका इजराइली संसद (नेसेट) में संबोधन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। विपक्षी नेता याइर लैपिड ने चेतावनी दी है कि यदि कुछ औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया, तो वे मोदी के संबोधन का बॉयकॉट कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar23 Feb 2026 05:17 PM
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PM Modi Israel Tour : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल मची हुई है। खासतौर पर उनका इजराइली संसद (नेसेट) में संबोधन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। विपक्षी नेता याइर लैपिड ने चेतावनी दी है कि यदि कुछ औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया, तो वे मोदी के संबोधन का बॉयकॉट कर सकते हैं।

विवाद की वजहें

1. न्यायपालिका के शीर्ष पदाधिकारी को आमंत्रण नहीं:

लैपिड का कहना है कि अगर इजराइल के सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख यित्जाक को नेसेट सत्र में शामिल नहीं किया गया, तो वे मोदी के भाषण में हिस्सा नहीं लेंगे। उनका तर्क है कि यह परंपरा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा, क्योंकि आमतौर पर ऐसे अवसरों पर न्यायपालिका के उच्च अधिकारी को बुलाया जाता है।

2. न्यायपालिका की गरिमा को लेकर चिंता:

विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट प्रमुख को नजरअंदाज कर रही है, जिससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।

3. भारत और पीएम मोदी का सम्मान:

लैपिड ने यह भी कहा कि अगर आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं हुआ, तो इससे भारत और प्रधानमंत्री दोनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असुविधा हो सकती है।

घरेलू राजनीतिक संदर्भ

यह विवाद इजराइल के भीतर न्यायिक सुधारों और सरकार के अदालतों के खिलाफ रुख के संदर्भ में देखा जा रहा है। लैपिड इसे न्यायपालिका के सम्मान की रक्षा और परंपरागत शिष्टाचार बनाए रखने के प्रयास के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं कुछ आलोचक इसे राजनीतिक लाभ के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी मान रहे हैं।

भारत-इजराइल संबंधों पर असर

भारत और इजराइल के बीच मजबूत कूटनीतिक और सामरिक संबंध हैं। ऐसे में विपक्षी नेता भी चाहते हैं कि भारत के दौरे पर किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय असुविधा न आए। हालांकि, यदि जरूरी औपचारिकताओं का ध्यान नहीं रखा गया, तो विरोधी नेता संसद सत्र में शामिल न होकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर सकते हैं। संक्षेप में, यह विवाद इजराइल के आंतरिक राजनीतिक और न्यायिक तनावों का नतीजा है, जिसने एक महत्वपूर्ण विदेशी दौरे को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है।


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