ईरान पर US-इजराइल के हमले के बाद वैश्विक नेताओं ने जताई गहरी चिंता
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, "वॉशिंगटन और तेल-अवीव ने एक बार फिर एक खतरनाक एडवेंचर शुरू किया है, जो तेजी से इस इलाके को मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही के कगार पर ला रहा है।" मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका का मकसद ईरान की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और वहां की सरकार को उखाड़ फेंकना है।

Israel US Airstrike: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) का माहौल एक बार फिर तूफानी हो गया है। इस बड़े सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक स्तर पर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है, जबकि रूस ने इस हमले को 'खतरनाक एडवेंचर' करार दिया है।
क्या है हालात?
अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हवाई हमला किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी किस्मत खुद तय करने और इस्लामिक लीडरशिप के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की। इसके जवाब में, ईरान ने भी बहरीन, अबू धाबी, दुबई और रियाद समेत मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण इलाकों पर जवाबी हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया।
रूस का बयान- 'तबाही का खतरा'
रूस ने ईरान पर हमलों की सबसे सख्त आलोचना की है। क्रेमलिन ने इसे एक 'खतरनाक एडवेंचर' बताया है और अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की है। रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ एक 'कवर' थी।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, "वॉशिंगटन और तेल-अवीव ने एक बार फिर एक खतरनाक एडवेंचर शुरू किया है, जो तेजी से इस इलाके को मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही के कगार पर ला रहा है।" मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका का मकसद ईरान की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और वहां की सरकार को उखाड़ फेंकना है।
कतर ने ईरानी मिसाइलों को किया इंटरसेप्ट
कतर, जहां अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है, ने ईरान के जवाबी हमले को लेकर सख्त रुख अपनाया। दोहा में कई धमाके सुनाई दिए, जिसके बाद कतर की रक्षा व्यवस्था ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (रोक) कर लिया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों द्वारा कतर के इलाके को निशाना बनाना राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।" कतर ने साफ कर दिया कि उसे इस हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
EU और UK ने दिखाई चिंता
यूरोपीय संघ (EU) ने इस घटनाक्रम को 'खतरनाक' बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने न्यूक्लियर सुरक्षा सुनिश्चित करने को 'महत्वपूर्ण' बताया। EU की टॉप डिप्लोमैट काजा कैलास ने इलाके से गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है।
वहीं, ब्रिटेन ने साफ किया कि उसने US-इजराइल के इस हमले में कोई हिस्सा नहीं लिया है। ब्रिटिश सरकार ने कहा, "हम नहीं चाहते कि तनाव और बढ़े और यह बड़े इलाके के झगड़े में बदल जाए।" उसने अपनी प्राथमिकता वहां मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा बताई।
यूक्रेन और फ्रांस का रुख
यूक्रेन ने ईरान पर हमलों के लिए खुद ईरानी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। यूक्रेन ने कहा कि ईरानी शासन की अपने ही लोगों और दूसरे देशों के खिलाफ हिंसा और मनमानी ही इस स्थिति का कारण बनी। फ्रांस ने भी अपनी प्राथमिकता अपने नागरिकों और इस क्षेत्र में तैनात अपनी सेनाओं की सुरक्षा को बताया। पेरिस ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है।
अफ्रीकी संघ और रेड क्रॉस की चेतावनी
अफ्रीकी संघ (African Union) ने तत्काल तनाव कम करने और बातचीत की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष से अफ्रीका की आर्थिक सुरक्षा पर बुरा असर पड़ सकता है और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) की प्रेसिडेंट मिरजाना स्पोलजारिक ने चेतावनी दी कि यह लड़ाई पूरे इलाके में एक खतरनाक चेन रिएक्शन पैदा कर सकती है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने देशों से युद्ध के नियमों का सम्मान करने और मौत-तबाही रोकने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने को कहा। Israel US Airstrike
Israel US Airstrike: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) का माहौल एक बार फिर तूफानी हो गया है। इस बड़े सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक स्तर पर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है, जबकि रूस ने इस हमले को 'खतरनाक एडवेंचर' करार दिया है।
क्या है हालात?
अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हवाई हमला किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी किस्मत खुद तय करने और इस्लामिक लीडरशिप के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की। इसके जवाब में, ईरान ने भी बहरीन, अबू धाबी, दुबई और रियाद समेत मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण इलाकों पर जवाबी हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया।
रूस का बयान- 'तबाही का खतरा'
रूस ने ईरान पर हमलों की सबसे सख्त आलोचना की है। क्रेमलिन ने इसे एक 'खतरनाक एडवेंचर' बताया है और अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की है। रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ एक 'कवर' थी।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, "वॉशिंगटन और तेल-अवीव ने एक बार फिर एक खतरनाक एडवेंचर शुरू किया है, जो तेजी से इस इलाके को मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही के कगार पर ला रहा है।" मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका का मकसद ईरान की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और वहां की सरकार को उखाड़ फेंकना है।
कतर ने ईरानी मिसाइलों को किया इंटरसेप्ट
कतर, जहां अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है, ने ईरान के जवाबी हमले को लेकर सख्त रुख अपनाया। दोहा में कई धमाके सुनाई दिए, जिसके बाद कतर की रक्षा व्यवस्था ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (रोक) कर लिया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों द्वारा कतर के इलाके को निशाना बनाना राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।" कतर ने साफ कर दिया कि उसे इस हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
EU और UK ने दिखाई चिंता
यूरोपीय संघ (EU) ने इस घटनाक्रम को 'खतरनाक' बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने न्यूक्लियर सुरक्षा सुनिश्चित करने को 'महत्वपूर्ण' बताया। EU की टॉप डिप्लोमैट काजा कैलास ने इलाके से गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है।
वहीं, ब्रिटेन ने साफ किया कि उसने US-इजराइल के इस हमले में कोई हिस्सा नहीं लिया है। ब्रिटिश सरकार ने कहा, "हम नहीं चाहते कि तनाव और बढ़े और यह बड़े इलाके के झगड़े में बदल जाए।" उसने अपनी प्राथमिकता वहां मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा बताई।
यूक्रेन और फ्रांस का रुख
यूक्रेन ने ईरान पर हमलों के लिए खुद ईरानी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। यूक्रेन ने कहा कि ईरानी शासन की अपने ही लोगों और दूसरे देशों के खिलाफ हिंसा और मनमानी ही इस स्थिति का कारण बनी। फ्रांस ने भी अपनी प्राथमिकता अपने नागरिकों और इस क्षेत्र में तैनात अपनी सेनाओं की सुरक्षा को बताया। पेरिस ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है।
अफ्रीकी संघ और रेड क्रॉस की चेतावनी
अफ्रीकी संघ (African Union) ने तत्काल तनाव कम करने और बातचीत की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष से अफ्रीका की आर्थिक सुरक्षा पर बुरा असर पड़ सकता है और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) की प्रेसिडेंट मिरजाना स्पोलजारिक ने चेतावनी दी कि यह लड़ाई पूरे इलाके में एक खतरनाक चेन रिएक्शन पैदा कर सकती है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने देशों से युद्ध के नियमों का सम्मान करने और मौत-तबाही रोकने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने को कहा। Israel US Airstrike












