अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका है। बाजार पहले ही होर्मुज में बढ़ते जोखिम को लेकर सतर्क है।

US-Iran War : अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका है। बाजार पहले ही होर्मुज में बढ़ते जोखिम को लेकर सतर्क है। यदि संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो तेल कंपनियों और आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौते तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
US-Iran War
तेहरान ने अमेरिकी कार्रवाई को शांति समझौते का उल्लंघन बताया और अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने की बात कही। स्ट्रेट आफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है। अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, एलएनजी सप्लाई प्रभावित हो सकती है और इस कारण वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।
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हालांकि, कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई जारी रहने पर क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने का खतरा बना हुआ है। अमेरिका-ईरान विवाद का नया दौर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट आॅफ होर्मुज पर बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटते हैं या संघर्ष और बढ़ता है।
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