जेवर एयरपोर्ट से कैसे बदलेगी आपकी यात्रा? जानिए पूरी डिटेल
इसी जरूरत के जवाब के तौर पर जेवर को चुना गया। उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली के एयर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा व राजस्थान के कुछ हिस्सों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक पहुंच पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी।

Jewar Airport : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आकार ले रहा जेवर एयरपोर्ट अब सिर्फ उड़ानों का नया ठिकाना नहीं, बल्कि पूरे रीजन की आर्थिक दिशा और शहरी पहचान को नई परिभाषा देने वाला प्रोजेक्ट बनकर उभर रहा है। लंबे समय तक दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहे नोएडा–ग्रेटर नोएडा को अब अपना एक स्वतंत्र, अंतरराष्ट्रीय स्तर का ग्लोबल गेटवे मिलने जा रहा है। दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते एयर ट्रैफिक के दबाव ने एक ऐसे आधुनिक विकल्प की जरूरत को और मजबूत किया, जो भविष्य की मांग को भी संभाल सके। इसी पृष्ठभूमि में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट आज उत्तर भारत की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट से मिलेगी बड़ी राहत
दिल्ली का मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लंबे समय से यात्रियों की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ते एयर ट्रैफिक के दबाव में काम कर रहा है। ऐसे में एक ऐसे वैकल्पिक एयरपोर्ट की जरूरत साफ हो गई थी, जो न सिर्फ आधुनिक सुविधाओं से लैस हो, बल्कि भविष्य की मांग को भी सहजता से संभाल सके। इसी जरूरत के जवाब के तौर पर जेवर को चुना गया। उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली के एयर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा व राजस्थान के कुछ हिस्सों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक पहुंच पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी।
जेवर के चारों ओर बन रहा ट्रैवल नेटवर्क
गौतम बुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे के बिल्कुल पास स्थित जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत उसकी लोकेशन है। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा और मथुरा जैसे बड़े शहरों से इसका सीधा रोड कनेक्शन बनता है, वहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यहां तक पहुंचना पहले से ही आसान है। आगे चलकर इस एयरपोर्ट को मेट्रो, रैपिड रेल और संभावित रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है, ताकि यात्रियों को एक ही विकल्प पर निर्भर न रहना पड़े। बता दें कि जेवर एयरपोर्ट को एक बार में नहीं, बल्कि फेज-वाइज (चरणबद्ध) तरीके से विकसित किया जा रहा है, ताकि शुरुआती संचालन के साथ ही भविष्य का विस्तार भी तेज़ी से आगे बढ़ सके। पहले चरण में एक रनवे और अत्याधुनिक टर्मिनल के जरिए उड़ानों की शुरुआत की योजना है। इसके बाद अगले चरणों में रनवे की संख्या बढ़ाई जाएगी और यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कैपेसिटी को कई गुना तक विस्तार देने का रोडमैप तैयार है। लक्ष्य सिर्फ एक वैकल्पिक एयरपोर्ट खड़ा करना नहीं, बल्कि लंबे समय में जेवर को बहु-रनवे, हाई-कैपेसिटी एविएशन हब के रूप में स्थापित करना है, जो एशिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स की सूची में जगह बना सके। इसी विज़न के तहत मास्टर प्लान में पैसेंजर टर्मिनल के साथ कार्गो टर्मिनल, मेंटेनेंस हब, कमर्शियल जोन और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी संतुलित ढंग से जोड़ा गया है ताकि यह एयरपोर्ट यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों को भी मजबूती दे सके।
जेवर एयरपोर्ट की हाई-टेक तैयारी
जेवर एयरपोर्ट का डिजाइन सिर्फ आधुनिक वास्तुकला तक सीमित नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और स्मार्ट ऑपरेशन की सोच पर तैयार किया जा रहा है। यात्रियों के अनुभव को सहज बनाने के लिए डिजिटल चेक-इन, ऑटोमैटिक बैगेज हैंडलिंग, उन्नत सुरक्षा सिस्टम और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भीड़ के बावजूद संचालन तेज़ और व्यवस्थित रहे। इसके साथ ही, इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण को भी केंद्र में रखा गया है। सोलर एनर्जी, जल संरक्षण प्रणालियाँ और हरित क्षेत्र के विकास के जरिए इसे ‘ग्रीन एयरपोर्ट’ की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों को क्या-क्या मिलेगा?
जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की योजना है। विशाल वेटिंग लाउंज, आधुनिक फूड कोर्ट, शॉपिंग एरिया, वीआईपी लाउंज, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं, मेडिकल सेवाएं और डिजिटल पेमेंट विकल्प इन सबका समावेश इसे एक संपूर्ण यात्रा अनुभव प्रदान करेगा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होंगी। इसके अलावा कार्गो टर्मिनल को विशेष रूप से मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि निर्यात और आयात गतिविधियों को गति मिल सके। जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जा रहा है। इसके निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य, सुरक्षा, ग्राउंड स्टाफ, आतिथ्य, परिवहन और लॉजिस्टिक्स हर क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाएं बढ़ेंगी। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक पार्क, वेयरहाउसिंग हब, होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और नई टाउनशिप के विकास की संभावनाएं हैं। रियल एस्टेट बाजार में पहले ही तेजी देखी जा रही है। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन चुका है। केवल आर्थिक ही नहीं, सामाजिक स्तर पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच और सुगम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार की संभावना है। स्थानीय व्यवसायों को नए बाजार और अवसर मिलेंगे। Jewar Airport
Jewar Airport : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आकार ले रहा जेवर एयरपोर्ट अब सिर्फ उड़ानों का नया ठिकाना नहीं, बल्कि पूरे रीजन की आर्थिक दिशा और शहरी पहचान को नई परिभाषा देने वाला प्रोजेक्ट बनकर उभर रहा है। लंबे समय तक दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहे नोएडा–ग्रेटर नोएडा को अब अपना एक स्वतंत्र, अंतरराष्ट्रीय स्तर का ग्लोबल गेटवे मिलने जा रहा है। दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते एयर ट्रैफिक के दबाव ने एक ऐसे आधुनिक विकल्प की जरूरत को और मजबूत किया, जो भविष्य की मांग को भी संभाल सके। इसी पृष्ठभूमि में विकसित हो रहा जेवर एयरपोर्ट आज उत्तर भारत की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट से मिलेगी बड़ी राहत
दिल्ली का मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लंबे समय से यात्रियों की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ते एयर ट्रैफिक के दबाव में काम कर रहा है। ऐसे में एक ऐसे वैकल्पिक एयरपोर्ट की जरूरत साफ हो गई थी, जो न सिर्फ आधुनिक सुविधाओं से लैस हो, बल्कि भविष्य की मांग को भी सहजता से संभाल सके। इसी जरूरत के जवाब के तौर पर जेवर को चुना गया। उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली के एयर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा व राजस्थान के कुछ हिस्सों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक पहुंच पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी।
जेवर के चारों ओर बन रहा ट्रैवल नेटवर्क
गौतम बुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे के बिल्कुल पास स्थित जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत उसकी लोकेशन है। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा और मथुरा जैसे बड़े शहरों से इसका सीधा रोड कनेक्शन बनता है, वहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यहां तक पहुंचना पहले से ही आसान है। आगे चलकर इस एयरपोर्ट को मेट्रो, रैपिड रेल और संभावित रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है, ताकि यात्रियों को एक ही विकल्प पर निर्भर न रहना पड़े। बता दें कि जेवर एयरपोर्ट को एक बार में नहीं, बल्कि फेज-वाइज (चरणबद्ध) तरीके से विकसित किया जा रहा है, ताकि शुरुआती संचालन के साथ ही भविष्य का विस्तार भी तेज़ी से आगे बढ़ सके। पहले चरण में एक रनवे और अत्याधुनिक टर्मिनल के जरिए उड़ानों की शुरुआत की योजना है। इसके बाद अगले चरणों में रनवे की संख्या बढ़ाई जाएगी और यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कैपेसिटी को कई गुना तक विस्तार देने का रोडमैप तैयार है। लक्ष्य सिर्फ एक वैकल्पिक एयरपोर्ट खड़ा करना नहीं, बल्कि लंबे समय में जेवर को बहु-रनवे, हाई-कैपेसिटी एविएशन हब के रूप में स्थापित करना है, जो एशिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स की सूची में जगह बना सके। इसी विज़न के तहत मास्टर प्लान में पैसेंजर टर्मिनल के साथ कार्गो टर्मिनल, मेंटेनेंस हब, कमर्शियल जोन और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी संतुलित ढंग से जोड़ा गया है ताकि यह एयरपोर्ट यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों को भी मजबूती दे सके।
जेवर एयरपोर्ट की हाई-टेक तैयारी
जेवर एयरपोर्ट का डिजाइन सिर्फ आधुनिक वास्तुकला तक सीमित नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और स्मार्ट ऑपरेशन की सोच पर तैयार किया जा रहा है। यात्रियों के अनुभव को सहज बनाने के लिए डिजिटल चेक-इन, ऑटोमैटिक बैगेज हैंडलिंग, उन्नत सुरक्षा सिस्टम और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भीड़ के बावजूद संचालन तेज़ और व्यवस्थित रहे। इसके साथ ही, इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण को भी केंद्र में रखा गया है। सोलर एनर्जी, जल संरक्षण प्रणालियाँ और हरित क्षेत्र के विकास के जरिए इसे ‘ग्रीन एयरपोर्ट’ की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों को क्या-क्या मिलेगा?
जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की योजना है। विशाल वेटिंग लाउंज, आधुनिक फूड कोर्ट, शॉपिंग एरिया, वीआईपी लाउंज, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं, मेडिकल सेवाएं और डिजिटल पेमेंट विकल्प इन सबका समावेश इसे एक संपूर्ण यात्रा अनुभव प्रदान करेगा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होंगी। इसके अलावा कार्गो टर्मिनल को विशेष रूप से मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि निर्यात और आयात गतिविधियों को गति मिल सके। जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जा रहा है। इसके निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य, सुरक्षा, ग्राउंड स्टाफ, आतिथ्य, परिवहन और लॉजिस्टिक्स हर क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाएं बढ़ेंगी। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक पार्क, वेयरहाउसिंग हब, होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और नई टाउनशिप के विकास की संभावनाएं हैं। रियल एस्टेट बाजार में पहले ही तेजी देखी जा रही है। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन चुका है। केवल आर्थिक ही नहीं, सामाजिक स्तर पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच और सुगम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार की संभावना है। स्थानीय व्यवसायों को नए बाजार और अवसर मिलेंगे। Jewar Airport












