भीष्म पंचक के पांच दिनों में पाएं संपूर्ण कार्तिक माह का फल
पंचक का नाम आते ही उन पांच दिनों का ध्यान आता है जब कोई भी अच्छे कार्य करने से पूर्व सोचना पड़ता है.
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:09 AM
Bhishma Panchak 2023 पंचक का नाम आते ही उन पांच दिनों का ध्यान आता है जब कोई भी अच्छे कार्य करने से पूर्व सोचना पड़ता है. किंतु कार्तिक माह में आने वाले भीष्म पंचक काफी अलग होते हैं. यह सामान्य पंचकों की भांति नहीं होती है. इन पांच दिनों को बेहद ही पुण्यफल पाने वाला समय माना गया है.
यह भीष्म पंचक भक्तों को कार्तिक माह का संपूर्ण एवं शुभ फल तो देते ही हैं साथ में जो भक्त इन दिनों में व्रत, जप, पूजा, पाठ, अनूष्ठान एवं अन्य प्रकार की धार्मिक कृत्यों को करते हैं उन्हें अक्षय फलों की प्राप्ति होती है. जन्मों जन्मों के पाप कर्म भी इन पंचकों में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों द्वारा शांत होते हैं.
Bhishma Panchak kab hai
कब से कब तक मनाया जाता है भीष्म पंचक
कार्तिक माह में आने वाले पंचक बेहद ही विशेष माने गए हैं. इन पंचक को भीष्म पंचक नाम से जाना जाता है. यह पांच दिन धर्म कर्म के कार्यों हेतु बहुत ही विशेष होते हैं. भीष्म पंचक का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक यह रहते हैं. एकादशी से पूर्णिमा तक के ये पांच दिन काफी महत्व रखते हैं. इन पांच दिनों दीपदान, व्रत, जप एवं स्नान दान पुण्य के कार्य लगातार जारी रहते हैं.
भीष्म पंचक डेट 2023
इस वर्ष 23 नवंबर 2023 को बृहस्पतिवार से भीष्म पंचक आरंभ होंगे और 27 नवंबर 2023 को सोमवार के दिन भीष्म पंचक की समाप्ति होगी. 23 नवंबर 2023 को एकादशी तिथि के दिन से भीष्म पंचक का आरंभ होगा और द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी व पूर्णिमा तिथि तक की यह पांच तिथियां विशेष होंगी. इन दिनों के दौरान श्री हरि का पूजन, तुलसी पूजन, दीप दान, धार्मिक स्थलों का दर्शन, मंत्र जाप, तीर्थ स्नान एवं दान करने का विधान विशेष है. मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति संपूर्ण कार्तिक माह के नियम नहीं कर पाता है तो ऎसे में यदि भीष्म पंचक के दौरान भगवान का पूजन एवं व्रत इत्यादि करता है तो उसे संपूर्ण कार्तिक माह का फल प्राप्त होता है.
भीष्म पंचक पौराणिक महत्व
भीष्म पंचक का संबंध महाभारत काल से संबंधित माना गया है. कथाओं के अनुसार भीष्म पितामह शर शैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार कर रहे होते हैं इस कारण से इन पांच दिनों में किए जाने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठान एवं शुभ कर्म जीवन में शुभ गुणों में वृद्धि करते हैं तथा सुख समृद्धि का आगमन होता है.
आचार्या राजरानी