Ganesh Chaturthi 2023: गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना के साथ आज पधारेंगे बप्पा, जानें इसका पौराणिक और ऎतिहासिक महत्व
Ganesh Chaturthi 2023
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:32 PM
Ganesh Chaturthi 2023: एक लम्बे इंतजार के बाद आखिर अब बप्पा के घर आगमन का समय आ ही गया है. भाद्रपद माह के आगमन के साथ ही गणेश जी को घर पर स्थापित करने का समय भी भक्तों के लिए बहुत ही विशेष होता है. हर साल भक्त भाद्रपद माह की चतुर्थी के दिन गणेश जी को अपने घर में ला कर स्थापित करते हैं उनकी हर प्रकार से सेवा भाव करते हैं. गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी और गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, यह एक बेहद ही विशेष पर्व है जो देश भर में उत्साह के साथ मनाया जाता है. ज्ञान के देवता तथा सुखों को प्रदान करने वाले भगवान गणेश का आगमन अब होने ही वाला है आइये जानते हैं कब और किस समय आप भी बप्पा को अपने साथ घर पर ला कर उनकी भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना कर सकते हैं.
गणेश चतुर्थी पर शुरु हुआ भगवान के घर पर आगमन का उत्सव why we celebrate ganesh chaturthi
समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव के साथ ही आरंभ हो रहा है भगवान के घर आगमन का पर्व. यह समय देश भर में काफी उत्सह ओर जोश के साथ मनाया जाता है. भगवान बप्पा के जन्म के समय एवं उनके घर आगमन को लेकर भक्तों में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है. गणेश चतुर्थी भारत में विभिन हिस्सों में मनाई जाती है. यह समय गणेश भगवान की भक्ति से भरा होता है, खासकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश उत्तर भारत में इसकी रौनक देखते ही बनती है.
विध्नहर्ता का होगा आगमन दूर होंगे सभी कष्ट ganesh chaturthi kab se kab tak 2023
भगवान गणेश, जिन्हें सभी बाधाओं को दूर करने वाले के रूप में जाना जाता है, सभी हिंदू देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाते हैं. इस साल यह त्योहार 19 सितंबर से 28 सितंबर तक मनाया जाने वाला है.
Ganpati Sthapana Muhurat 2023 चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का घर में स्वागत करने का शुभ समय सुबह से ही आरंभ हो जाएगा इसके अलावा 11 शुरू इसका विशेष मुहूर्त प्राप्त होगा तथा 13:43 बजे तक इसकी उपस्थिति के समय सभी भक्त बप्पा को अपने घर पर विराजमान कर सकते हैं 10 दिनों तक चलने वाला यह पर गणेश उत्सव के रुप में मनाया जाता है इसका समापन 28 सितंबर को गणपति विसर्जन के साथ होगा.
गणेश चतुर्थी पूजा मंत्र ganesh chaturthi puja mantra
गणेश चतुर्थी का दिन भगवान श्री गणेश जी के पूजन का अत्यंत ही विशिष्ट समय होता है. ऎसे में भगवान श्री गणेश जी के इन मंत्रों का जाप करके भक्त अपनी भक्ति को ओर भी विशेष बना सकते हैं तथा चतुर्थी के दिन इन “ ॐ गणेशाय नमः, ॐ गं गणपतये नमः “ मंत्रों के जाप से भगवान श्री गणेश प्रसन्न होकर भक्तों को मनोवांछित वर प्रदान करते हैं.
गणेश चतुर्थी का ऎतिहासिक महत्व Ganesh Chaturthi Significance
भाद्रपद माह की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाने वाला गणेश उत्सव जहां अपनी पौराणिकता के लिए प्रसिद्ध है वहीं इसकी ऎतिहासिकता भी कई मायनों में खास है. प्राचीन काल में सातवाहन, चालुक्य इत्यादि राजवंशों के काल से इस उत्सव को मनाने के उल्लेख प्राप्त होते हैं. वहीं मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेश उत्सव को राष्ट्रीय धर्म और संस्कृति से जोड़कर इसे एक अलग ही रंग प्रदान किया. यह इसकी ऎतिहासिक पृष्ठभूमी को दर्शाता है जो आज भी उसी रंग में मौजूद देखी जा सकती है. शिवाजी महाराज के बाद मराठा शासकों ने गणेश उत्सव का सिलसिला भव्य रुप से मनाना जारी रखा गया. ब्रिटिश काल के दौरान यह उत्सव केवल हिंदू घरों तक ही सीमित था लेकिन फिर आजादी के नायकों ने इसे आगे बढ़ाने में अपना योगदन दिया लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को पुन: आरंभ किया, शुरुआत की और गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्त करना भी बन गया. इस प्रकार गणेश उत्सव का पर्व न केवल पौराणिक अपितु ऎतिहासिक संदर्भ से भी बेहद ही महत्वपूर्ण रहा है.
एस्ट्रोलॉजर राजरानी
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