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कामदेव के दोनों ओर त्रिभंग मुद्रा में दो स्त्रियां खड़ी हैं और आसन के पास है घोड़े जैसे मुख वाला एक जीव। ये सारे चिह्न मत्स्य पुराण में दर्शाए गए कामदेव से मिलते हैं। माना जाता है कि मूर्ति में जो दो स्त्रियां दिख रही हैं, वे उनकी पत्नी रति और प्रीति होगी। यह मूर्ति इसलिए चौंकाती है, क्योंकि कामदेव से जुड़ी कथाएं तो बहुत है, उनसे जुड़े उत्सव भी मनाए जाते हैं, लेकिन उनकी बहुत मूर्तियां नहीं मिलती और न ही मंदिर। इस खोज से जुड़े भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व डीजी राकेश तिवारी के मुताबिक, 'यह मूर्ति नौवीं से 10वीं शताब्दी के बीच की हो सकती है। जहां यह मिली, वहां मंदिरों के अवशेष हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि हजार साल पहले उत्तराखंड में कामदेव की पूजा होती थी।'